झुंझुनूं
शेखावाटी की सबसे बहुप्रतीक्षित यमुना जल परियोजना अब धीरे-धीरे धरातल की ओर बढ़ती नजर आ रही है। प्रदेश सरकार ने परियोजना के संचालन और क्रियान्वयन को गति देने के लिए पांच नए कार्यालय खोलने तथा 46 नए तकनीकी पद सृजित करने की मंजूरी देकर बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया है। इनमें से तीन महत्वपूर्ण कार्यालय सीकर में स्थापित होंगे, जो झुंझुनूं, सीकर और चूरू तक यमुना का पानी पहुंचाने की पूरी प्रक्रिया की निगरानी करेंगे।
इस निर्णय से वर्षों से पेयजल संकट झेल रहे शेखावाटी के लाखों लोगों की उम्मीदों को नया बल मिला है। सबसे बड़ी बात यह है कि हाल ही में झुंझुनूं दौरे पर आए जल संसाधन मंत्री सुरेश रावत ने भी अक्टूबर-नवंबर 2026 से परियोजना के निर्माण कार्य शुरू होने के संकेत दिए थे। ऐसे में नए कार्यालयों की स्वीकृति को परियोजना को धरातल पर उतारने की दिशा में सबसे अहम प्रशासनिक कदम माना जा रहा है।
झुंझुनूं की 24 लाख आबादी के लिए राहत की उम्मीद
यमुना जल परियोजना पूरी होने पर झुंझुनूं जिले की करीब 24 लाख आबादी को दीर्घकालिक पेयजल सुरक्षा मिलने का मार्ग प्रशस्त होगा। जिले के शहरों और गांवों में लगातार गिरते भूजल स्तर तथा फ्लोराइड युक्त पानी की समस्या से राहत मिलने की उम्मीद है। इसके साथ ही लाखों पशुओं के लिए भी पानी की उपलब्धता बेहतर होगी और किसानों को सिंचाई के लिए अतिरिक्त जल मिलने से कृषि उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलेगी।
भूमि अधिग्रहण से लेकर निर्माण तक आएगी तेजी
जल संसाधन विभाग के आदेश के अनुसार सीकर में अतिरिक्त मुख्य अभियंता (यमुना जल संभाग), अधीक्षण अभियंता (यमुना जल वृत्त) तथा अधिशासी अभियंता (यमुना जल खंड-प्रथम) के कार्यालय स्थापित किए जाएंगे। इसके अलावा हरियाणा के कुरुक्षेत्र में दो नए अधिशासी अभियंताओं के कार्यालय खोले जाएंगे। इन कार्यालयों के सक्रिय होने से परियोजना की विस्तृत योजना तैयार करने, लागत का प्राक्कलन, भूमि अधिग्रहण, वन एवं यमुना नदी क्षेत्र से जुड़ी स्वीकृतियां, वन्यजीव संबंधी अनुमतियां, टेंडर और निर्माण सामग्री की खरीद जैसी प्रक्रियाओं में तेजी आएगी। अब अलग-अलग स्तर पर होने वाले कार्यों की निगरानी स्थानीय स्तर पर ही हो सकेगी, जिससे परियोजना में अनावश्यक देरी कम होगी।
भूजल पर निर्भरता होगी कम, खेती को मिलेगा नया संबल
शेखावाटी लंबे समय से गिरते भूजल स्तर और बारिश पर निर्भर खेती की चुनौती से जूझ रहा है। यमुना का सतही जल उपलब्ध होने से भूजल दोहन में कमी आएगी। इससे भविष्य में जल स्तर सुधारने के साथ-साथ किसानों को सिंचाई के लिए स्थायी जल स्रोत मिलेगा। पर्याप्त सिंचाई सुविधा मिलने से फसल विविधीकरण, उत्पादन और किसानों की आय बढ़ाने की संभावनाएं भी मजबूत होंगी।
सरकार ने परियोजना के लिए कुल 46 नए पदों को मंजूरी दी है। इनमें अतिरिक्त मुख्य अभियंता, अधीक्षण अभियंता, अधिशासी अभियंता, सहायक अभियंता और कनिष्ठ अभियंता शामिल हैं। इन सभी पदों को जल संसाधन विभाग के कैडर में शामिल किया जाएगा, जिससे परियोजना की मॉनिटरिंग और क्रियान्वयन अधिक प्रभावी ढंग से हो सकेगा। इसके अलावा होमगार्ड की भी संविदा पर सेवाएं ली जाएंगी।
अक्टूबर-नवंबर से शुरू हो सकते हैं निर्माण कार्य
जल संसाधन मंत्री सुरेश रावत ने हाल ही में झुंझुनूं दौरे के दौरान कहा था कि यमुना जल परियोजना के निर्माण कार्य अक्टूबर-नवंबर 2026 से शुरू करने का लक्ष्य है। अब नए कार्यालयों और तकनीकी स्टाफ की मंजूरी के बाद इस समय-सीमा पर अमल की संभावनाएं और मजबूत हो गई हैं। शेखावाटी के लिए यमुना जल परियोजना केवल एक जल परियोजना नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के जल भविष्य से जुड़ा मिशन है।
नए कार्यालयों और तकनीकी पदों की स्वीकृति से यह स्पष्ट संकेत मिला है कि सरकार अब परियोजना को केवल कागजों तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि उसे तेजी से धरातल पर उतारने की दिशा में बढ़ रही है। यदि तय समय पर निर्माण कार्य शुरू होकर परियोजना पूरी होती है, तो झुंझुनूं, सीकर और चूरू के लाखों लोगों को पेयजल संकट से राहत मिलने के साथ कृषि, पशुपालन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नई मजबूती मिलेगी।