हरियाणा के सरकारी स्कूलों में बाहरी लोगों की एंट्री पर रोक, अभिभावकों को भी अनुमति जरूरी

चंडीगढ़
हरियाणा सरकार ने सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों की सुरक्षा को लेकर बड़ा फैसला लिया है। शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा ने कहा है कि सरकारी स्कूलों में बाहरी व्यक्तियों की एंट्री प्रतिबंधित रहेगी।

यहां तक कि किसी बच्चे के अभिभावक को भी बिना अनुमति स्कूल परिसर में प्रवेश नहीं दिया जाएगा। मंत्री के मुताबिक, बिना जांच-पड़ताल के किसी भी व्यक्ति को स्कूल में प्रवेश देना विद्यार्थियों की सुरक्षा के लिहाज से उचित नहीं है।

शिक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया कि स्कूल में किसी बाहरी व्यक्ति की एंट्री स्कूल मैनेजमेंट कमेटी (एसएमसी) की अनुमति के बाद ही होनी चाहिए। उनका कहना है कि बिना जांच किए किसी व्यक्ति को स्कूल परिसर में प्रवेश देने से यह पता नहीं चल सकता कि वह व्यक्ति वहां आकर क्या गतिविधि करेगा। इसलिए विद्यार्थियों और खासकर छात्राओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह व्यवस्था लागू की जा रही है।

मंत्री के अनुसार, गांव के प्रबुद्ध और जिम्मेदार लोगों को स्कूल से संबंधित आवश्यक कार्यों के लिए अनुमति के साथ प्रवेश दिया जा सकेगा। इसका उद्देश्य स्कूलों में प्रवेश पूरी तरह बंद करना नहीं, बल्कि अनधिकृत और बिना सत्यापन वाले प्रवेश पर रोक लगाना है।

इस व्यवस्था से स्कूल प्रबंधन, शिक्षकों, विद्यार्थियों और अभिभावकों के बीच संपर्क के लिए एक निर्धारित प्रक्रिया बनाए जाने की उम्मीद है। किसी अभिभावक को बच्चे से संबंधित जरूरी काम होने पर स्कूल प्रबंधन से अनुमति लेनी होगी।

शिक्षा विभाग में भी लागू हुआ नया स्थायी आदेश
दूसरी ओर, हरियाणा के स्कूल शिक्षा विभाग ने विभागीय कामकाज को व्यवस्थित करने के लिए नया स्थायी आदेश जारी किया है। इस आदेश में अलग-अलग स्तर के अधिकारियों के अधिकार और जिम्मेदारियां स्पष्ट कर दी गई हैं। अब विभाग के विभिन्न मामलों का निपटारा तय स्तर के अधिकारी कर सकेंगे।

नए आदेश के साथ पुराने सभी आदेश रद कर दिए गए हैं। इसका मकसद फाइलों के निपटारे में स्पष्टता लाना और यह तय करना है कि किस प्रकार का मामला किस अधिकारी के पास जाएगा।

बड़े नीतिगत मामले मुख्यमंत्री स्तर पर
नए आदेश के मुताबिक, ग्रुप-ए अधिकारियों की नियुक्ति, पदोन्नति, निलंबन, सजा और विदेश भेजने जैसे महत्वपूर्ण मामले मुख्यमंत्री के स्तर पर निपटाए जाएंगे। बड़े नीतिगत फैसले, गंभीर वित्तीय अनियमितताएं तथा सरकारी स्कूलों को खोलने या बंद करने से जुड़े मामले भी मुख्यमंत्री स्तर पर जाएंगे।

स्कूल शिक्षा मंत्री के स्तर पर ग्रुप-बी, सी और डी कर्मचारियों की नियुक्ति और सजा से जुड़े मामले आएंगे। इसके अलावा अधिकारियों को अतिरिक्त जिम्मेदारी देने, प्रशिक्षण के लिए भेजने, शिक्षा नियमों में बदलाव और एसीआर से संबंधित अपीलों जैसे मामलों पर भी मंत्री स्तर से फैसला लिया जाएगा।

एसीएस और प्रमुख सचिव स्तर पर अपीलों समेत कई मामले
अतिरिक्त मुख्य सचिव/प्रधान सचिव स्तर पर अपील, परिवीक्षा अवधि बढ़ाने, छोटे दंड, विधानसभा समितियों को जवाब, सेवा अवधि बढ़ाने, ऑडिट आपत्तियों और पूछताछ अधिकारी की नियुक्ति जैसे मामलों का निपटारा किया जा सकेगा।

वहीं सचिव और विशेष सचिव स्तर पर क्षेत्रीय अधिकारियों की सजा के खिलाफ अपील, छोटे कर्मचारियों की सजा, एक लाख रुपये तक की वित्तीय हानि माफ करने, मेडिकल बिल पास करने तथा पासपोर्ट के लिए एनओसी देने जैसे मामले निपटाए जाएंगे।

संयुक्त सचिव और अतिरिक्त सचिव को भी अधिकार
संयुक्त सचिव/अतिरिक्त सचिव स्तर पर छुट्टियां मंजूर करने, 25 हजार रुपये तक की हानि माफ करने, नाम या जन्मतिथि में बदलाव और निजी स्कूलों से संबंधित शिकायतों जैसे मामलों का निपटारा किया जा सकेगा।

शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा के नए आदेश में यह भी व्यवस्था की गई है कि यदि मंत्री या कोई वरिष्ठ अधिकारी शहर से बाहर है और किसी मामले में तत्काल निर्णय जरूरी है, तो संबंधित अधिकारी के नीचे का अधिकृत अधिकारी फैसला ले सकेगा।

हालांकि, ऐसे फैसले की जानकारी बाद में संबंधित मंत्री या वरिष्ठ अधिकारी को देना अनिवार्य होगा। किसी निर्णय पर केवल इस आधार पर सवाल नहीं उठाया जा सकेगा कि फाइल संबंधित अधिकारी के पास निर्धारित क्रम के अनुसार नहीं पहुंची थी।

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Author: Editor

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