हम अपने घर जाना चाहते हैं…’ PAK में जबरन धर्म परिवर्तन-निकाह का आरोप, अदालत के बाहर रोती रहीं दो हिंदू बहनें

सिंध प्रांत
पाकिस्तान के सिंध प्रांत से सामने आई दो नाबालिग हिंदू बहनों की गुहार आपको झकझोरकर रख देगी. रोते-सिसकते उनकी बस एक ही मांग थी, कि उन्हें अपने माता-पिता के पास घर भेज दिया जाए. लेकिन कोर्ट ने उन्हें परिवार के साथ भेजने के बजाय दो दिनों के लिए सेफ हाउस भेजने का आदेश दे दिया। 

मामला तंदो अल्लाहयार के जिला कोर्ट का है, जहां सुनावाई के बाद दोनों बहनें रोती बिलखती नजर आईं. दोनों बहनों की पहचान सीता और रूपी के तौर पर बताई जा रही है. जानकारी के मुताबिक उनकी उम्र करीब 13 और 14 साल है। 

परिवार का आरोप है कि दोनों को पहले अगवा किया गया, फिर धर्म परिवर्तन कराया गया और मुस्लिम युवकों से जबरन उनकी शादी करा दी गई. हालांकि अभी कर किसी सार्वजनिक पुलिस या कोर्ट दस्तावेजों से बच्चियों की उम्र और दावे की पुष्टि नहीं हुई है। 

कोर्ट के बाहर रोती रहीं बच्चियां
दोनों बहनों को तंदो अल्लाहयार की अदालत में पिछले हफ्ते दर्ज हुए किडनैपिंग के मामले में पेश किया गया था. सुनवाई के बाद बच्चियों ने अपने परिवार के पास जाने की इच्छा जताई.वहां मौजूद पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने बताया कि वे लगातार रो रही थीं और घर जाने की बात कह रही थीं। 

अदालत ने फिलहाल दोनों को दो दिन के लिए सेफ हाउस भेज दिया. कुछ अल्पसंख्यक अधिकारों से जुड़े कार्यकर्ताओं ने मांग की है कि बच्चियों की बात सीधे सुनी जाए और उन्हें स्वतंत्र कानूनी और मनोवैज्ञानिक मदद दी जाए। 

10 दिन में 6 नाबालिग लड़कियों के दावे से चिंता बढ़ी
यह मामला इसलिए भी और है क्योंकि एक दिन बाद तंदो अल्लाहयार से 14 साल की एक और हिंदू लड़की पांसी कोहली के अपहरण की खबर सामने आई थी.  एक पाकिस्तानी पत्रकार के मुताबिक, 10 दिनों के अंदर जिले में छह नाबालिग हिंदू लड़कियों के अपहरण और जबरन धर्म परिवर्तन के मामले सामने आ चुके हैं।  

सिंध पाकिस्तान में सबसे ज्यादा हिंदू आबादी वाला इलाका है. यहां हिंदू लड़कियों के अपहरण, धर्म परिवर्तन और मुस्लिम युवकों से शादी के आरोप पहले भी सामने आते रहे हैं. खास तौर पर गरीब और कमजोर परिवारों की बेटियां ज्यादा असुरक्षित मानी जा रही हैं। 

कानून की नजर में नाबालिग, फिर शादी कैसे?
अगर दोनों बहनों की उम्र 13 और 14 साल होने की पुष्टि होती है, तो सिंध के कानून के मुताबिक वे नाबालिग मानी जाएंगी. सिंध में शादी की न्यूनतम उम्र 18 साल है. यानी उम्र की पुष्टि होने पर 18 साल से कम उम्र में हुई शादी कानून के खिलाफ होगी. अब इस मामले में यह देखना अहम होगा कि बच्चियों की उम्र और उनकी इच्छा को लेकर कोर्ट क्या फैसला सुनाती है। 

कब थमेगा डर का ये सिलसिला?
यह कहानी दो बहनों के साथ पाकिस्तान में रहने वाले उन हजारों अल्पसंख्यक परिवारों की भी है, जो हर दिन अपनी बेटियों की सुरक्षा को लेकर डर के साये में जीते हैं। 

लगातार नाबालिग लड़कियों के अपहरण, जबरन शादी और धर्म परिवर्तन के मामलों से पाकिस्तान की न्यायिक और प्रशासनिक व्यवस्था पर अब सवाल उठ रहे हैं. अब नजर इस बात पर है कि आखिर इन बच्चियों को न्याय मिलेगा, या हजारों बच्चियों की तरह वो भी अदालती सुनवाई का हिस्सा बन कर रह जाएंगी। 

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Author: Editor

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