सुकमा.
जिले के दूरस्थ वनांचल क्षेत्रों में संचालित आश्रमों और छात्रावासों की व्यवस्थाओं को लेकर जिला प्रशासन ने सख्ती दिखाई है. कलेक्टर अमित कुमार के निर्देश पर विभागीय टीमों ने जिले की आवासीय शिक्षण संस्थाओं का आकस्मिक और सघन निरीक्षण किया.
निरीक्षण प्रतिवेदनों की समीक्षा में कुछ संस्थाओं में निर्धारित रोस्टर का पालन नहीं होने और मूलभूत व्यवस्थाओं में कमियां पाए जाने की बात सामने आई. इसके बाद प्रशासन ने संबंधित संस्थाओं के अधीक्षकों और अधीक्षिकाओं से जवाब तलब किया है. बालक आश्रम गुट्टागुड़ा, नीलावरम, मुनगा, नामापारा और मिरीवाड़ा सहित विभिन्न संस्थाएं इस कार्रवाई के दायरे में हैं. कन्या आश्रम चिंगावरम, पोस्ट मैट्रिक कन्या छात्रावास सुकमा तथा कोंटा, तोंगपाल और अन्य स्थानों के छात्रावासों को भी नोटिस जारी किया गया है. कुल 15 संस्थाओं के जिम्मेदार अधिकारियों को नोटिस प्राप्त होने के दो दिन के भीतर उपस्थित होकर स्पष्टीकरण देने के निर्देश दिए गए हैं.
प्रशासन का कहना है कि आवासीय संस्थाओं में बच्चों के पोषण, रहने की सुविधा, अनुशासन और शिक्षा की व्यवस्था से समझौता नहीं किया जा सकता. दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले बच्चों के लिए आश्रम और छात्रावास केवल आवास नहीं, बल्कि शिक्षा और सुरक्षित जीवन का महत्वपूर्ण आधार हैं. ऐसे में निरीक्षण के दौरान सामने आई कमियों को दूर करना और जिम्मेदार कर्मचारियों की जवाबदेही तय करना जरूरी है. अब संबंधित अधीक्षकों के जवाब और विभागीय जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी.