पटना
राज्य में विज्ञापन और होर्डिंग लगाने की व्यवस्था अब नए नियमों के दायरे में आएगी। शहरों में होर्डिंग्स और यूनिपोल लगाने की मनमानी नहीं चलेगी।
कहां, कितने और कितनी अवधि के लिए विज्ञापन लगाए जा सकेंगे, यह तय करने का अधिकार नगर निकायों के साथ राज्य सरकार के पास भी होगा।
राज्य सरकार भी नियमावली बना सकेगी। अभी तक बिहार नगरपालिका अधिनियम में विज्ञापन के प्रविधान तो थे, लेकिन सरकार को अलग से नियम बनाने का स्पष्ट अधिकार नहीं था।
अब बिहार नगरपालिका अधिनियम, 2007 की धारा 146 में संशोधन कर राज्य सरकार को भी नियम बनाने का अधिकार दिया गया है।
नगरपालिका भी अपने स्तर से विनियम बना सकेगी। इससे विज्ञापन लगाने, लाइसेंस जारी करने और उनके नियमन के लिए एक व्यवस्थित व्यवस्था तैयार करने का रास्ता खुलेगा।
इससे विज्ञापन व्यवस्था पर राज्य स्तर से निगरानी होगी और शहरी निकायों की आय बढ़ाने का रास्ता भी खुलेगा। इसके लिए बिहार नगरपालिक (संशोधन) अध्यादेश 2026 के तहत धारा 146 की अलग-अलग उपधाराओं में बदलाव किया गया है।
विज्ञापन की अवधि के भी नियम बदले
पहले केवल नगरपालिका और उसके विनियमों का उल्लेख था, अब राज्य सरकार के नियमों और नगरपालिका के विनियमों दोनों को शामिल किया गया है।
इसी प्रकार विज्ञापन की एक वर्ष की अवधि से जुड़े प्रविधान को बदलकर निर्धारित अवधि कर दिया गया है। यानी सरकार और नगरपालिका तय कर सकेंगे विज्ञापन कितनी अवधि के लिए मान्य होगा।
इतना ही नहीं अध्यादेश में विज्ञापन के दायरे को भी बढ़ाया गया है। अब जमीन, भवन, दीवार और होर्डिंग के अलावा सार्वजनिक प्रदर्शन के अन्य माध्यम भी इसके दायरे में आएंगे।
फ्रेम, खंभे, निओन, आकाशीय चिह्न और विज्ञापन लगाने के लिए इस्तेमाल होने वाले आधार को भी इसमें शामिल किया गया है।
नगर निकायों की आय बढ़ाने पर जोर
नई विज्ञापन नीति में राज्य सरकार ने विज्ञापन लाइसेंस के लिए शहरी निकायों को चार वर्गों में बांटा है। इसमें पटना नगर निगम, पटना के साथ सभी नगर निगम, सभी नगर परिषद और सभी नगर पंचायत की श्रेणी शमिल की गई है।
इससे निकायों की आय बढ़ेगी। अभी कई ऐसे भी निकायहै जहां होर्डिंग्स, बैनर लगाने के लिए कोई शुल्क नहीं वसूला जाता।
लाइसेंस से लेकर निगरानी तक की व्यवस्था
संशोधन में विज्ञापन और होर्डिंग के लाइसेंस जारी करने, उनके नियमन, निरीक्षण और पर्यवेक्षण को भी महत्व दिया गया है। इसका उद्देश्य शहरों में अनियंत्रित विज्ञापन और बेतरतीब होर्डिंग पर नियंत्रण के साथ शहरी सौंदर्य बनाए रखना और सार्वजनिक सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
अब राज्य सरकार नियम बनाकर विज्ञापन व्यवस्था के लिए एक समान ढांचा तैयार कर सकेगी।
सरकार अपने अधिकारी भेज करा सकेगी जांच
अध्यादेश में प्रविधान किए गए हैं कि राज्य सरकार अपने अधिकारियों को किसी भी नगरपालिका के विभाग, कार्यालय, सेवा या संपत्ति की जांच के लिए भेज सकेगी।
नगर निकायों में गड़बड़ी की जांच अब अधिकारी के पद के हिसाब से होगी। नगर निगम और 'क' व 'ख' श्रेणी के नगर परिषदों की जांच के लिए कम से कम उप सचिव स्तर के अधिकारी को जिम्मेदारी दी जाएगी।
वहीं, 'ग' श्रेणी के नगर परिषद और नगर पंचायतों की जांच अवर सचिव स्तर के अधिकारी कर सकेंगे। इसके अलावा संबंधित जिले के डीएम भी अपने स्तर से जांच शुरू कर सकेंगे।
वे इसके लिए अधिकारियों की समिति भी बना सकेंगे। हालांकि समिति में शामिल अधिकारियों के लिए भी यही पद की शर्त लागू होगी।