5 हज़ार साल के इतिहास में पहली बार जन्माष्टमी के दिन भक्तों के प्रवेश पर लगी पाबंदी

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मथुरा और वृंदावन के हर मंदिर में प्रवेश पर 10-13 अगस्त तक लगी पाबंदी

मथुरा। नोवल कोरोना वायरस ने व्यवसाय, नौकरी, यात्रा और लोगों की पूजा व आस्था को भी बुरी तरह से प्रभावित किया है। आज देश के कई राज्यों में जन्माष्टमी का पावन त्योहार मनाया जा रहा है, इस वर्ष बाजारों और मंदिरों में कोरोना वायरस के चलते हर साल की तरह होने वाली चमक देखने को नहीं मिल रही है। आपको बता दे कि श्री कृष्ण की नगरी मथुरा और वृंदावन के हर मंदिर को 10 से लेकर 13 अगस्त तक बाहर से आए लोगों के लिए बंद कर दिया गया है।

श्री कृष्ण जन्माष्टमी के दिन मथुरा और वृंदावन की सड़को पर आमतौर पर भक्तों का बड़ा जमावड़ा लगता है और मार्किट में खाने-पीने, साज-श्रृंगार और दूसरी छोटी-छोटी दुकानों से चमकता हुआ दृश्य आता था। लेकिन इस बार की जन्माष्टमी में यहां की सड़के बिल्कुल दिख रही है। इक्का-दुक्का लोग आ जा रहे हैं। आपको बता दे कि पुलिस चेक पोस्ट से मंदिर के मुख्य गेट के बीच क़रीब 100 दुकानें हैं।

सख्ती और सोशल डिस्टेंस के चलते दुकानों का खुलना न खुलना बराबर जान पड़ता है। मंदिर के बाहर की सड़क पर हर साल जन्माष्टमी के मौके पर 3-4 करोड़ रु का व्यापार होता था। इसी कमाई से जो सालभर अपना काम चलाते थे वो कैसे और कब तक इस स्थिति का सामना कर पाएंगे।

आपको बता दे कि कोरोना वायरस के कहर को देखते हुए इस बार मथुरा और वृंदावन के हर मंदिर को 10 अगस्त से लेकर 13 अगस्त तक बाहर से आए लोगों के लिए बंद कर दिया गया है। पांच हज़ार साल के इतिहास में पहली बार मथुरा में श्री कृष्ण जन्माष्टमी पर भक्तों के प्रवेश पर पाबंदी है।

Ban on entry of devotees in every temple of Mathura and Vrindavan from 10-13 August in view of Corona Virus outbreak.


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