मुखौटा कंपनियों के पंजीकृत कार्यालय और डिजिटल हस्ताक्षर करने वाले निदेशकों की भी होगी जाँच: मोदी सरकार का नया कॉर्पोरेट स्वच्छता मिशन |

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काले  धन  की  उत्पत्ति  और  परिचालन  को  रोकने  के  अंतिम  लक्ष्य  को  ध्यान  में  रखते  हुए  मुखौटा  कंपनियों  के  खिलाफ  कई  सारे  कड़े  कदम  उठाने  के  बाद  भारतीय  कॉर्पोरेट  क्षेत्र  को  और  अधिक  स्वच्छ  और  निर्मल  बनाने  के  लिए  मोदी  सरकार  ने  एक  बहुत  ही  महत्वाकांक्षी  कदम  उठाया  है  जिसमे  सभी  कंपनियों  को  दो  काम  करने  होंगे  |  पहला  काम  कंपनी  के  पंजीकृत  कार्यालय  को  भौगोलिक  आधार  पर  चिन्हित  करने,  कम्पनी  का  अस्तित्व,  पंजीकृत   कार्यालय   के  चित्र  और  उसके  पूर्ण  पते  का  सत्यापन  करना  और  दूसरा  काम  सभी  कंपनियों  के  डिजिटल  हस्ताक्षर  करने  वाले  निदेशकों  या  प्रमुख  व्यक्तियों  (KMP)  की  जाँच  करने  के  लिए  उनकी  पंजीकृत  कार्यालय  में  उपस्थिति  का  सत्यापन  करना  और  इसके  लिए  MCA  ने  एक  नया  फॉर्म  निकाला  है  जो  कि  सभी  कंपनियों  को  MCA  की  वेबसाइट  पर  जमा  करना  होगा  | 

इस  फॉर्म  के  आने  से  ऐसी  मुखौटा  कंपनियों  की  पहचान  भी  हो  सकेगी  जो  नकली  या  झूठे  पते  पर  पंजीकृत  हैं  और  साथ  ही  नकली  हस्ताक्षरकर्ता  निदेशक  भी  पकड़  में  आएंगे  |  इस  नए  कदम  को  लेने  से  पहले  भी  मोदी  सरकार  ने  भारतीय  कॉर्पोरेट  सेक्टर  की  सफाई  करने  के  लिए  काफी  कड़े  कदम  उठाये  थे  जिनमें  मुखौटा  कंपनी  को  बंद  करना  (strike  off),  निदेशकों  की  पहचान  करना,  निदेशकों  के  DIN  को  आधार  से  लिंक  करना  और  इसके  अलावा  लोन  और  डिपॉजिट  का  प्रकटीकरण  (disclosure)  एक  नए  फॉर्म  में  करना  और  इसके  अलावा  पोंजी  स्कीम  पर  रोक  लगाना  आदि  |  वर्तमान   में   लिया   गया   यह   सरकार  का  एक  बड़ा  कदम  है  जो  भारतीय  कॉर्पोरेट  सेक्टर  को  और   स्वच्छ  करेगा  और  इससे  विश्व  भर  में  Ease  of  Doing  Business  की  श्रेणी  में  भारत  की  स्थिति  सुधरेगी  | 

काले  धन  की  जांच  में  लगी  एजेंसियों  के  सामने  ऐसे  कई  केस  हुए  थे  जिनमें  मुखौटा  कंपनियों  के  डायरेक्टर  अपनी  जिम्मेदारियों  से  ये  कह  कर   बच   निकल  जाते  थे  कि  उन्हें  तो  इस  बात  की  जानकारी  ही  नहीं  है  कि  वो  इस  कंपनी  में  डायरेक्टर  है  और  तो  और,  वह   यह   भी   कहते   थे   कि   उन्होंने   तो   कंपनी  के  पंजीकृत  कार्यालय  की  शक्ल     भी  नहीं   देखी   है   दूसरी  और  शेयर  होल्डर  की  कोई  क़ानूनी  तौर  पर  कोई  जिम्मेदारी  नहीं  होती  है  |  वहीँ  दूसरी  ओर  कंपनी  के  असली  प्रमोटर  और  काले  धन  के  शोधन   के   खिलाड़ी  अपने   खेल  खेलते  रहते  थे  और   उनका   कंपनी  में  कहीं  कोई   नाम  और   जिम्मेदारी   नहीं   थी  |  ऐसे  में  किसी  न  किसी  की  जिम्मेदारी  तय  हो  ताकि  क़ानूनी  प्रक्रिया  को  सिरे  चढ़ाया  जा  सके  इसके  लिए  ही  मोदी  सरकार  ने  यह  कदम  बढ़ाया  है  जिसमें  हस्ताक्षरकर्ता  निदेशकों  की  जिम्मेदारियों  को  तय  करने  और  कंपनी  के  रजिस्टर्ड  ऑफिस  की  वास्तविकता  का  सत्यापन  करने  के  लिए,  सरकार  ने  रजिस्टर्ड  ऑफिस  की  भौगोलिक  टैगिंग  शुरू  करने  का   फैसला   लिया  |  जिसके  लिए  कंपनी  (निगमन)  संशोधन  नियम,  2019  दिनांक  25  फरवरी  2019  को  पारित  किया  गया  है  जिसमें  अधिकतम  25  april  2019  तक  अर्थात  60  दिनों  के  अंदर  –  अंदर  ई-प्रपत्र  ‘सक्रिय’  (सक्रिय  कंपनी  टैगिंग  पहचान  और  सत्यापन)  दाखिल  करना  होगा  और  यह  उन  सभी  कंपनियों   जो  31  दिसंबर  2017  या  उसे  पहले  निगमित  सभी  कंपनियों  पर  लागू  होगा  |  इसके  अलावा,  MCA  की   वेबसाइट  के  मास्टर  डाटा  में  कंपनी  के  नियम  अनुपालन  की  स्थिति  (अनुपालित  और  गैर-अनुपालित)  भी  दर्शाई  जाएगी  जो  कि  फॉर्म  दाखिल  करने  की  स्थिति  के  अनुसार  आवंटित  की  जाएगी  ।

MCA  ने  कंपनियों  के  लिए  यह  अनिवार्य  कर  दिया  है  कि  वे  उस  भवन  के  अंदर  व्  बाहर  के  चित्र  भी   इस  ई-फॉर्म  में  लगाएं  जिसमें  कंपनी  के  रजिस्टर्ड  ऑफिस  स्थित  है  |  साथ  ही  ऑफिस  में  हस्ताक्षरकर्ता  निदेशक  या  सबंधित  हस्ताक्षरकर्ता  KMP  की  उपस्थिति  को  सुनिश्चित  करने  के  लिए  उनका   भी   चित्र  लेना  भी  अनिवार्य  किया  गया  है  जो  डिजिटल  हस्ताक्षर  दाखिल  करते  समय  संलग्न  किया  जाएगा।  इसके  अलावा  इस  फॉर्म  को  पेशेवर  प्रैक्टिस  कर  रहे  सीए,  सीएस  या  सीएमए  द्वारा  प्रमाणित  किया  जाएगा  जिनकी  यह  जिम्मेदारी  यह  भी  होगी  कि  वो  कंपनी  का  अस्तित्व,  इसकी  ई-मेल  आईडी  और  इसके  रजिस्टर्ड  ऑफिस  की  सत्यता  की  जांच  करें  व्  सत्यापन  के  बाद  ऐसे  सभी  रिकॉर्ड  अपनी  फाइलों  में  अपनी  अभिरक्षा  में  रखेंगे  |  यह  फॉर्म  बिना  किसी  शुल्क  या  भुगतान  के  दाखिल  किया  जा  सकेगा  ।  यदि  कंपनी  ने  अपने  वित्तीय  विवरण  या  वार्षिक  रिटर्न  दाखिल  नहीं  किए  हैं  तो  ऐसी  कंपनी  को  यह  फॉर्म  दाखिल  करने  की  अनुमति  नहीं  दी  जाएगी  |

इस  प्रक्रिया  के  लिए  सबंधित  निदेशक  को  रजिस्टर्ड  ऑफिस  में  स्वयं  जाकर  फोटो  खिंचवाना  अनिवार्य  है  |  जो  कंपनियां  फर्जी  कार्यालयों  में  चलती  दिखाई  जा  रही  हैं  या  जहां  एक  बेहद  छोटे  कार्यालय  में  कई  कंपनियां  काम  करती  दिखाईं  जा   रही  थी,  उन  का  अतिरिक्त  विश्लेषण  और  मूल्यांकन  किया  जा  सकता  है  और  आवश्यक  होने  पर  कार्रवाई  के  दायरे  में  लाया  जाएगा।  ऐसी  कंपनियों  के  लिए  यह  बहुत  मुश्किल  होगा  कि  आवासीय  /  अनुपयुक्त  या  बेहद  छोटे  स्तर  के  स्थानों  को   अपने  पंजीकृत  कार्यालय   दिखाएँ  क्योंकि  अब  ऐसी  जगहों  की  तस्वीरों  का  सत्यापन  करना  मुश्किल  होगा  |  यूं  तो  पंजीकृत  ऑफिस  के  लिए  नियमों  में  कुछ  भी  उल्लेखित  नहीं  है  मगर  प्रमाणित  करने  वाले  पेशेवर  के  लिए  इस  तरह  के  सत्यापन  खतरें  से   खाली   नहीं   होंगे  |  सत्यापनकर्ता   पेशेवर  के  लिए  यह  उचित  ही  है  कि  वह  ऑफिस   की  प्रामाणिकता  सुनिश्चित  करने  के  लिए  स्वयं  या  सहयोगी  के  ऐसे  कार्यालय  की  यात्रा  करे  या  एक  वीडियो  कॉन्फ्रेंस  के  माध्यम  से  भी  जाँच  की  जा  सकती  हैं  और  उसके  रिकॉड  को  अपने  पास  रख  सकते  हैं  |  इसके  अलावा  समुचित  वीडियो  रिकॉर्डिंग  की  व्यवस्था  करके  बाहरी  और  आंतरिक  कार्यालय  के  सत्यापन  का  विकल्प  चुना  जा  सकता  है  |  हालाँकि  यह  उसका  विवेकाधीन  व्यावसायिक  निर्णय  है  ।   

वर्तमान  में  यह  एक  बार  की  प्रक्रिया  है,  लेकिन  आने  वाले  समय  में  इसकी  पुनरावृत्ति  हो  सकती  है  |  इस  फॉर्म  के  फाइलिंग  नहीं  करने  के  परिणाम  गंभीर  होंगे  |  यदि  कंपनी  25,  अप्रैल,  2019  या  उससे  पहले  यह  फॉर्म  फाइल  नहीं  करते  है  तो  बाद  में  Rs.10,000  का   जुर्माना  भी  देना  होगा  और  तभी  फॉर्म  फाइल  हो  सकेगा । इसके  अलावा  तब  तक  कंपनी  का  स्टेटस  सक्रिय  गैर-  अनुपालित  के  रूप  में  दिखाई  देगा  |  यदि  कंपनी  इस   फॉर्म  में  अपेक्षित  विवरण  नहीं  देती  है  तो  कंपनी  अधिनियम,  2013  के  सेक्शन  12(9)  के  तहत  जिम्मेदार  होगी,  जिसके  अंतर्गत   कंपनी   के  रजिस्ट्रार  सम्बंधित  कंपनी  के  नाम  को  उसके  रजिस्टर  से  हटा  सकता  है  या  कंपनी  के  डायरेक्टर  पर  पेनल्टी  और  सजा  लगाई  जा  सकती  है  |  इसके  अलावा  सेक्शन  12  के  आधार  पर  सक्रिय  गैर-अनुपालित  कंपनियां  अपनी  पूँजी,  रजिस्टर्ड  ऑफिस  या  निदेशकों  में  कोई  बदलाव  नहीं  कर  पाएंगे  |  हम  समझते  हैं  कि  इन्  कदमों  से  काले  धन  के  परिचालन  पर   भारी  चोट  होगी  और  यह  कदम  अपने  उद्देश्यों  की  पूर्ति  में  सफल  होगा  |

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