सावधानी से करें इनकम टैक्स रिटर्न फाइलिंग और ना करें यह गलतियां

income tax return Filling

जैसा कि हम जानते हैं कि वित्त वर्ष 2018-19 समाप्‍त हो चुका है और अब इनकम टैक्‍स रिटर्न भरने का समय आ गया है । अगर आप ऑडिट के दायरे में नहीं आते हैं तो 31st जुलाई तक आप सभी को इनकम टैक्स रिटर्न भरनी होगी | इस बात को भी समझ लें कि अब ITR से जुड़े कई नियम बदल गए हैं और फॉर्म्स में भी बदलाव आया है | ऐसे में रिटर्न फाइल करते समय अनजाने में कुछ गलतियां हो सकती हैं और कभी कभी हम जान बूझ कर कुछ गलतियां यह सोच कर करते हैं कि आयकर विभाग को पता नहीं चलेगा | लेकिन अब ऐसा नहीं है ऐसी गलतियां आपको भारी पड़ सकती हैं क्योंकि विभाग अब ऑटोमेटेड सॉफ्टवेयर से चलता है और अर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का प्रयोग करता है | ITR भरते वक़्त होने वाली सामान्य गलतियां नीचे दी गयी हैं जिनका ध्यान अवश्य रखना चाहिए:

1.  बचत खाते पर मिलने वाले ब्याज को जरूर दिखाएं

इनकम टैक्स रिटर्न भरते वक्त बचत खाते पर मिलने वाले ब्याज को जरूर दिखाएं | अगर आप अपनी इस आय को नहीं दिखाते हैं, तो इसे टैक्स चोरी के तौर पर देखा जाएगा और आपके खिलाफ कार्यवाही की जा सकती है जबकि अगर आप इस ब्याज को अपनी ITR में दिखाते हैं तो इनकम टैक्स के सेक्शन 80TTA के द्वारा आप इस ब्याज पर 10000 तक की छूट का लाभ उठा सकते हैं |

2.    पिछली कंपनी से हुई वेतन  की  आय का ब्योरा दें

आयकर रिटर्न भरते वक्त ध्यान रखें कि यदि आपने वित्त वर्ष के दौरान नौकरी छोड़ कर दूसरी नौकरी में शामिल हुए हैं तो रिटर्न भरते वक्त दोनों कंपनियों से हुई आय का विवरण अपनी ITR में करें वरना आपको दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है | ऐसे में ज़रूरी है की आप अपनी पिछली और वर्तमान दोनों ही कंपनियों के नियोक्ता से फॉर्म 16 अवश्य लें | फॉर्म 16 सुनिश्चित करता है कि आपके रिटर्न में कम से कम समय लगे और उसमें कम से कम गलतियां हों |

3.    फॉर्म 26AS अवश्य डाउनलोड करें और अपनी आय का उससे मिलान करें

फॉर्म 26AS या टैक्स क्रेडिट स्टेटमेंट आपकी आय पर काटे गए TDS के भुगतान की सभी जानकारी दे देता है | अपना टैक्स रिफंड क्लेम करने से पहले इसे जरूर जांच लें | यह टैक्स  कैलकुलेशन में किसी भी तरह की गलती से आपको बचाएगा जिससे आप एक सही टैक्स रिटर्न फाइल कर पाएंगे |

  • फॉर्म 26AS के मिसमैच होने पर लापरवाही ना बरतें

हर करदाता का यह कर्त्तव्य है की वह अपने फॉर्म 16/16A को फॉर्म 26AS से मिला ले | यदि फॉर्म 16/16A  में आ रही आय और फॉर्म 26AS में आ रही आय में कोई अंतर है तो आप आयकर विभाग से इस बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं अथवा अपने नियोक्ता या TDS काटने वाले व्यक्ति से संपर्क कर सकते हैं | इस तरह के अंतर की बहुत सी वजहें हो सकती हैं | अगर टैक्स काटने वाले ने TDS रिटर्न फाइल नहीं किया, या काटा गया TDS इनकम टैक्स विभाग के पास जमा नहीं कराया तो फॉर्म 26AS अधूरे आंकड़े देगा | इसके साथ ही गलत कर निर्धारण वर्ष लिखने, परमानेंट अकाउंट नंबर सही नहीं होने या चालान की डीटेल गलत लिखने की वजह से भी फॉर्म 26AS में मिसमैच हो सकता है | इस तरह की गलती को आयकर विभाग आमदनी या टैक्स देनदारी कम/ अधिक दिखाने के प्रयास के रूप में ले सकता है | इस तरह की गलती की वजह से आयकर विभाग आपके खिलाफ जांच कर सकता है  या नोटिस भेज सकता है |

5.    पूंजीगत हानियों व  नुकसान को न छुपाएं

रिटर्न फाइल करने का मतलब यह है कि आपको  न सिर्फ अपनी आय बल्कि अपने नुकसान  का भी ब्यौरा देना है | कई बार हमें पूंजीगत हानियाँ भी होती हैं जिसे हम ITR में नहीं दिखाते हैं | ऐसा करना गलत है क्योंकि किसी साल में हानि होने पर आप उस को अपनी रिटर्न में शामिल करके कैपिटल गेन से समयोजित कर सकते हैं या इस नुकसान को आने वाले सालों के लिए आप कैरी फॉरवर्ड भी कर सकते हैं जिसे आप आगामी आठ वर्षों में कभी भी कैपिटल गेन से समयोजित कर सकते हैं |

6.    गलत व्यक्तिगत जानकरी न दें

अपनी सभी जानकारियों को सही-सही ITR फॉर्म में भरें | ध्यान रहे कि आपके नाम की स्पेलिंग, पूरा पता, ईमेल, कॉन्टेक्ट नंबर जैसी जानकारी आपके पैन, ITR और आधार में एक जैसी हो | वही मोबाइल नंबर डालें जिस पर SMS आ सके | गलत जानकारी देने पर आपको रिफंड मिलने में मुश्किल होगी | विभाग से बचने के लिए गलत जानकारी देना महंगा पड़ सकता है |

7.    टैक्स रिटर्न को वेरीफाई करें

पहली बार टैक्स फाइल करने वाले लोग यह गलती बहुत अधिक करते हैं | वह सोचते हैं कि उनके द्वारा टैक्स रिटर्न भरने के बाद उनका काम खत्म हो गया है  जबकि रेगुलर करदाता जानते हैं कि आपको टैक्स रिटर्न फाइल करने के बाद उसे वेरिफाई भी करना होता हैं | आप अपने इनकम टैक्स के ई-फाइलिंग पोर्टल से अपने टैक्स रिटर्न को ई-वेरिफाई कर सकते हैं या सीपीसी-बेंगलुरू भेज कर भी उसे वेरिफाई करा सकते हैं |

  • छूट प्राप्त आय   कर मुक्त आय का भी खुलासा करें

पूर्व में ITR फॉर्म में दिए गए एक सिंगल कॉलम में आपको करमुक्त आय का ब्यौरा देना होता था | लेकिन अब नए ITR फॉर्म में कई कॉलम है जहां कृषि आय, लाभांश, दीर्घ अवधि के पूंजीगत लाभों (लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन) पर मिलने  वाली छूट का ब्यौरा विशेष रूप से अलग कॉलम में देना होता है|

  • इनकम टैक्स रिटर्न भरने में देर करना

यह भी एक बड़ी आम गलती है जिसे लोग अक्सर कर देते हैं । इस बार अगर आप 31 जुलाई से चूके तो आप पर 5,000 रुपये तक का जुर्माना लग सकता है। अगर आप 31 दिसंबर तक भी ITR नहीं फाइल कर पाए तो यह जुर्माना 10,000 रुपये तक हो सकता है। देर से ITR  दाखिल करने पर आप टैक्स रिफंड पर फाइल कर ब्याज भी प्राप्त नहीं कर पाएंगे। 

  1. फर्जी छूटों का न लें सहारा

लोग टैक्‍स से बचने के लिए फर्जी छूटों का सहारा लेते हैं | झूठे  दान की आड़ में टैक्‍स बचाने की कोशिश की जाती है | इसके अलावा बच्‍चों की पढ़ाई के नाम पर फर्जी फीस रसीदें, फर्जी किराये की रसीदें, बिल, लोन के कागज, नकली निवेश की रसीदें आदि का इस्‍तेमाल भी किया जाता है | यदि आपने कोई भी फर्जी छूट अपनी ITR में दिखाई है तो आप यकीन मानें कि वर्तमान समय में आप इनकम टैक्स विभाग की नज़रों में हैं और आप पर कार्यवाही की जा सकती है |

  1. बैंकिंग डिटेल में गलती ना करें

अगर आप रिफंड के लिए दावा नहीं कर रहे हैं तब भी आपको अपने बैंक खाते की सही जानकारी उपलब्ध कराना जरूरी है | ई-फाइलिंग करते समय अपने बैंक का नाम, खाता संख्या, IFSC और MICR कोड को दोबारा जरूर चेक कर लें |

  1. सभी बैंक खातों की डिटेल भरें          

बहुत से लोग अपने सभी बैंक खातों की जानकारी नहीं देते जिनसे उन्होंने उस वित्तीय वर्ष में लेन देन किया है | ऐसा करना खतरनाक है क्योंकि आयकर विभाग के पास आपके सभी बैंक खातों की जानकारी है जो उन्हें बैंकों से मिलती है इसलिए करदाता को अपने नाम पर पंजीकृत सभी बैंक खातों की जानकारी देनी होगी |

  1. करमुक्त आय की सीमा से कम होने पर भी रिटर्न भरें 

यह सामान्य परंपरा है कि अगर आय करमुक्त आय की सीमा से कम है तो ITR फाइल करना ज़रूरी नहीं हैं और इनकम टैक्स कानून के अनुसार भी ऐसा ज़रूरी नहीं है | लेकिन ऐसा करने से भविष्य में आपको कई मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है जैसे की बैंक से लोन लेना, वीसा के लिए आवेदन देना, वाहन खरीदना इत्यादि जैसे कार्यों में ITR देना आवश्यक है | इसलिए ITR अवश्य भरें इससे आपको भविष्य में लाभ होगा |

14. गलत ITR फॉर्म न भरें

आयकर विभाग ने कई ITR फॉर्म निर्धारित किए हैं | आपको अपनी आय के साधन के आधार पर   सावधानी से अपना तयशुदा ITR चुनना होगा, अन्यथा  टैक्स विभाग इसे अस्वीकार कर देगा और आपको इनकम टैक्स के सेक्शन 139(5) के तहत संशोधित विवरणी (Revised Return) दाखिल करने के लिए कहा जाएगा |

यूँ तो ITR में होने वाली गलतियों को सेक्शन 139(5) के अंतर्गत संशोधित विवरणी (Revised Return) के जरिए ठीक करने का विकल्प करदाता के पास होता है लेकिन इस के लिए आपको 142(1) की सूचना आने से पहले ही अपनी रिटर्न को संशोधित करना होगा और यदि गलतियां सही नहीं कराई गई तो पेनाल्टी का भी भुगतान करना पड़ सकता है | ऐसे में ज़रूरी है की हर व्यक्ति ऊपर दी गयी बिंदुओं का ध्यान  रखे | आप में से कई लोग पहली बार ITR फाइल कर रहे होंगे इसलिए आप सभी को विशेष ध्यान देने की आवयश्कता है |

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *