भारत-चीन सीमा टकराव भारतीयों के लिए जागृत आह्वान है

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नई दिल्ली। चीनी सैनिकों द्वारा भारतीय क्षेत्र में घुसपैठ के बाद भारत के विभिन्न हिस्सों में आज बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन देखने को मिला। हाल के दिनों में भारत-चीन सीमा पर विवाद चल रहा है जिसके बाद से ही सोशल मीडिया और अन्य प्लेटफार्मों पर चीनी उत्पादों और मोबाइल एप्लिकेशन का बहिष्कार करने की मुहिम चल रही है। भारत चीनी उत्पादों का एक बड़ा आयातक है, जबकि भारत से बिल्कुल थोड़ा सा ही हिस्सा चीन को निर्यात होता है। भारत और चीन के बीच बड़े पैमाने पर निर्यात घाटा हैं। जानकारी के अनुसार 2018-19 वित्तीय वर्ष में भारत और चीन के बीच कुल 6.09 लाख करोड़ रुपए का कारोबार हुआ, जिसमें भारत ने लगभग 1.17 लाख करोड़ रुपये का सामान चीनी बाजार में बेचा गया। वहीं इसी समय में चीन ने लगभग 4.92 लाख करोड़ रुपये का सामान भारत भेजा। इस लिहाज से भारत 3.74 लाख करोड़ रुपये कम ही व्यापार कर पाया।

चीन दुनिया का एकमात्र देश है जो पूरे विश्व में निर्यात करता है और चीन का जीडीपी पूरी तरह से निर्यात पर निर्भर रहता है। छोटे से लेकर बड़े, स्थानीय से लेकर ब्रांडेड उत्पाद या तो चीन में बनते हैं या इकट्ठा होते हैं और ज्यादातर चीजें जिसका हम उपयोग करते हैं वह मेड इन चाईना ही होती है। दुनिया में कोरोना वायरस के प्रकोप के बाद से ही विकसित हो या विकासशील देश दोनों ने पहली बार चीन के अलावा किसी अन्य देश की आवश्यकता को महसूस किया है जिससे वह आयात कर सके। इस कड़ी में सबसे पहला नाम भारत का ही आता है, चूंकि यहां संसाधनों और सस्ते श्रम की प्रचुरता उपलब्धता है। भारत एक मात्र देश है जिसके दुनिया के अधिकांश देशों के साथ अच्छे संबंध हैं।

कोरोना वायरस के इस कठिन समय में जहां चीन अब भी चाले और घटिया रणनीति चल रहा है, वहीं भारत पूरी दुनिया को हर संभव सहायता प्रदान कर रहा है।जानकारों का कहना है कि ऐसे तमाम क्षेत्र हैं जहां भारत के मुकाबले चीनी उत्पादों का दबदबा ज्यादा है। भारत-चीन सीमा विवाद में चीनी उत्पादों का बहिष्कार लंबे समय तक फायदेमंद साबित नहीं हो सकता। मसलन, देश में इस्तेमाल होने वाले सभी एयरोप्लेन बोइंग और एयरबस के हैं। इसी तरह भारतीय कंपनियों में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल की सप्लाई भी चीन से होती है। ऐसे हालात में दोनों देशों के लिए ही व्यापार में बहिष्कार नुकसानदेह है। अगर भारत से विनिर्माण पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा तो भारत चीन से आगे बढ़ेगा और इससे भारतीय अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा मिलेगा।

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