पार्वती की कविताओं के भीतर एक जीवंत दुनिया.
पार्वती की कविताओं के भीतर एक जीवंत दुनिया. राँची हिन्दी कविता की युवतम पीढ़ी में पार्वती तिर्की का स्वर अलग से पहचाना जा सकता है। उनकी कविताओं में आदिवासी जीवन-दृष्टि, प्रकृति और सांस्कृतिक स्मृतियों का वह रूप सामने आता है, जो अब तक मुख्यधारा के साहित्य में बहुत कम दिखाई देता रहा है। झारखंड … Read more