देश को चाहिए डॉक्टर अब्दुल कलाम जैसे महान व्यक्तित्व वाले लीडर

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पुण्यतिथि विशेष:

नई दिल्ली। पांच साल पहले आज के ही दिन देश की महानतम व्यक्तित्व में से एक डॉक्टर एपीजे अब्दुल कलाम का निधन हुआ था। कलाम साहब के व्यक्तित्व के बारे में शब्दों में वर्णन करना असंभव है। पूर्व राष्ट्रपति और मिसाइल मैन डॉक्टर एपीजे अब्दुल कलाम का निधन 27 जुलाई 2015 को शिलॉन्ग में लेक्चर देते वक्त दिल का दौरा पड़ने से हुआ था। वह भारत में स्वामी विवेकानंद के बाद सबसे बड़े विद्वान, बौद्धिक और महान दूरदर्शी माने जाने वाले व्यक्ति थे।

वह देश के 11वें राष्ट्रपति थे और सर्वोच्च पद पर होने के बवाजूद उन्होंने बहुत ही सरल जीवन जिया। उनके नेतृत्व में भारत 1998 में पोखरण 2 परमाणु का सफल परीक्षण कर पाया था। कलाम ने कभी भी देश के राष्ट्रपति होने के नाते अपनी शक्ति का दुरुपयोग नहीं किया है और इसके कई उदाहरण हैं। आपको बता दे कि कलाम के राष्ट्रपति रहने के दौरान कुछ रिश्तेदार उनसे मिलने राष्ट्रपति भवन पहुंचे थे, उनका कुछ दिनों तक ठहरने का कार्यक्रम था। अधिकारियों को साफ निर्देश था कि इन मेहमानों के लिए राष्ट्रपति भवन की कारें इस्तेमाल नहीं की जाएंगी। वे जितने दिन रुके, उनके आने-जाने और रहने-खाने का सारा खर्च कलाम ने अपनी जेब से दिया।

कलाम एक महान प्रेरक भी थे, राष्ट्रपति कार्यकाल को पूरा करने के बाद वह अपना अधिकांश समय बच्चों को बीच ही व्यतीत करते थे। वह बच्चों को कहते थे कि वे जितना हो सके उतनी पढ़ाई करें और अपने लक्ष्य को पाने के लिए हमेशा कड़ी मेहनत करें। कलाम बहुत विनम्र व्यक्ति थे, जब कलाम को आईआईटी के दीक्षांत समारोह में ब्यौर मुख्य अतिथि बुलाया गया, तो उन्होंने देखा कि मंच पर रखी पांच कुर्सियों में से एक कुर्सी का आकार बड़ा है, जो उनके लिए थी। कलाम ने पहले कुर्सी के बड़ा होने का कारण पूछा और फिर उस पर बैठने से मना कर दिया। उन्होंने वाइस चांसलर से उस कुर्सी पर बैठने का अनुरोध किया, लेकिन वह नहीं बैठे, तुरंत राष्ट्रपति के लिए दूसरी कुर्सी मंगाई गई जो साइज में बाकी कुर्सियों जैसी ही थी। डॉक्टर कलाम उन चुनिंदा लोगों में शामिल हैं, जिन्हें देश के सभी सर्वोच्च पुरस्कार मिले. उन्हें 1981 में पद्म भूषण, 1990 में पद्म विभूषण, 1997 में भारत रत्न से सम्मानित किया गया था.

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