मनीष सिसोदिदया का उद्यमिता पाठ्यक्रम, दिल्ली के दो सौ से ज्यादा उद्यमियों से की मुलाकात

दिल्ली सचिवालय एंटरप्रिन्योरशिप माइंडसेट करिकुलम

मनीष सिसोदिया ने दो सौ उद्यमियों से की मुलाकात

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नई दिल्ली। दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने दिल्ली सचिवालय में एक कार्यक्रम के दौरान दिल्ली के दो सौ उद्यमियों से मुलाकात कर कई अहम मसलों पर वार्ता की है। मनीष सिसोदिया ने बैठक में कहा कि दिल्ली सरकार का उद्यमिता पाठ्यक्रम (एंटरप्रिन्योरशिप माइंडसेट करिकुलम) देश के आर्थिक विकास में योगदान देगा। इस पाठयक्रम का उद्देश्य जीडीपी के मामले में देश को एक बार फिर पांचवें स्थान या उससे भी अधिक ऊपर लाने की चुनौती को पूर्ण करने का लक्ष्य है।

दिल्ली सरकार के शिक्षा मंत्री ने देश की अर्थव्यवस्था रैंकिंग पिछड़ने पर खासा खैद प्रकट करते हुए पुन: पूर्व स्थान पर पहुंचने या उससे अधिक आगे निकलने के लिए बैठक में उद्यमियों से चर्चा की कि इस चर्चा का मतलब देश की जीडीपी सकल घरेलू उत्पाद की ग्लोबल रैंकिंग बढ़ाने का उनका प्रयास करना है। दिल्ली के उपमुख्यमंत्री एवं शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया ने उद्यमियों से कहा कि जीडीपी की बात करें तो भारत आज दो स्थान नीचे खिसक गया है। सरकार चाहे किसी की हो, अर्थव्यवस्था का धीमा होना सभी को प्रभावित करता है। भारत का विकास करने के लिए हमें एक साथ मिलकर काम करना होगा। आज हमारे सामने चुनौती है कि दिल्ली भारत को 5वें स्थान पर या ऊपर लाने में क्या योगदान कर सकती है।

उन्होंने कहा कि दिल्ली के सभी सरकारी स्कूलों में इसी साल कक्षा 9 से 12 के लिए उद्यमिता पाठ्यक्रम शुरू किया गया है। इसका उद्देश्य है कि उद्यमी समुदाय का नियमित रूप से जुड़ाव इन बच्चों के साथ हो। उन्होंने बताया कि कई शीर्ष संस्थान आज उद्यमिता पाठयक्रम चला रहे हैं। इससे छात्र व्यवसाय शुरू करने में सक्षम बन रहे हैं। लेकिन, जो कमी है वह उद्यमशीलता के प्रति मानसिकता बदलने की है।

​शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा कि हमारे कॉलेजों से निकलने वाले 99 फीसद स्नातक नौकरी चाहने वाले हैं। हम चाहते हैं कि भारत रोजगार देने वाली अर्थव्यवस्था बने। मौजूदा हालातों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि आज एक अच्छे दिमाग वाले को माइक्रोसॉफ्ट, एडोब आदि में नौकरी मिलती है और इसे हम सफलता का प्रमाण मानते हैं। हमारी अर्थव्यवस्था को सिर्फ उस व्यक्ति की तनख्वाह और उसके द्वारा भरे जाने वाले टैक्स से गति मिलती है।

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