सदर विधानसभा के विधायक सोमदत्त मारपीट व दंगा फैलाने मे दोषी सिद्ध आखिर क्या है ये पूरा मामला?

दिल्ली अप टू  डेट 
नई दिल्ली। दिनांक 29-06-2019 दिल्ली की राऊज एवेन्यू स्पेशल कोर्ट के मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट विशाल समर ने सदर विधानसभा से आम आदमी पार्टी विधायक को मारपीट एवम दंगा फैलाने का दोषी पाया। अब सजा का ऐलान 4 जुलाई को होना बाकी है। साल 2015, 10 जनवरी की शाम तकरीबन 6 बजे आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ता, गुलाबी बाग  आवासीय परिसर परिसर में अपना चुनाव प्रचार कर रहे थे। और एक एक घर का दरवाजा खुलवा कर लोगों से अपनी पार्टी और प्रत्याशी के बारे में जानकारी दे रहे थे। इसी क्रम में “संजीव राणा” नामक व्यक्ति के घर का दरवाजा भी खुलवाया गया और दरवाजा खुलते ही अपशब्दों का प्रयोग होने लगा, जिसके परिणाम स्वरूप दोनों पक्षों में मारपीट शुरू हो गई एवम  100 नम्बर पर कॉल कर, मामला गुलाबी बाग थाने में पहुंचा, और केस संजीव राणा की मारपीट की शिकायत पर दर्ज कर लिया गया। विधायक सोमदत्त ने भी संजीव राणा के विरुद्ध मारपीट का मामला दर्ज करा दिया, अपनी शिकायत में सोमदत्त ने अपने 3 साथियों के साथ मारपीट, गाली गलौज व छेड़छाड़ का दर्ज करा दिया। समय बीत गया, सोमदत्त चुनाव जीत गए, चुनाव जीतने के साथ ही सफलता के नशे में चूर सोमदत्त ने अपने 3 साथियों को भुलाते हुए हाशिये पर डाल दिया और तीनों के विरुद्ध विभिन्न प्रकार के आरोप लगाते हुए अपने आप एवम पार्टी से दूर कर दिया। कहते हैं कि समय, कब, कहाँ, किसका, सामना किस से, करा दे ये कोई नहीं जानता और यही हुआ भी, संजीव राणा ने समझौता करने से इनकार कर दिया, कोर्ट ने कई बार आपसी सुलह के लिए समय दिया। परन्तु सोमदत्त के परम मित्र एवम सर्वेसर्वा, राजेश कुमार के कारण बात न बनी, जब भी बात बनने की शरूआत  होती तो, सोमदत के परम मित्र ये कहकर बात खत्म कर देते की संजीव राणा का कोई वजूद ही नहीं है, इससे कोई हजार्ने के नाम पर समझौता नहीं करना, और ये सारे लोग जानते भी हैं कि राजेश कुमार (गोल्डी) की बात काटने की हिम्मत विधायक सोमदत्त में नहीं है। समय गुजर गया और कोर्ट के सामने अब अपनी न्यायिक प्रकिया जारी रखने के अलावा कोई और रास्ता ना बचा, क्योंकि दोनों तरफ से अब समझौते के आसार खत्म हो चले थे। कोर्ट में संजीव राणा ने कहा कि 10 जनवरी 2015 की शाम विधायक सोमदत्त अपने 50- 60 समर्थकों के साथ आये और बेसबाल के बैट से मुझे मारने पीटने लगे, इनके साथ एक सिक्ख समथर्क ने भी मेरे साथ मारपीट की, सब मिलकर मुझे पीटने लगे और मैं अचेत होकर गिर पड़ा, जब मेरी आँख खुली तो मैं हिन्दू राव अस्पताल में था, तथा मेरे पैर की हड्डी टूटी हुयी थी, जिस वजह से 4 दिन मुझे अस्पताल में रहना पड़ा। कोर्ट में संजीव राणा ने ये भी कहा कि मैं सभी का चेहरा नहीं पहचान सकता  क्योंकि मैं अचेत होता जा था, सब मेरी आँखों से ओझल हो रहा था, जिसका फायदा, कोर्ट से राणा को मिलना स्वाभाविक था, हिन्दू राव अस्पताल के डॉक्टर ने भी अपने बयान में हड्डी टूटने और गम्भीर चोटें आने की तस्दीक की।
सोमदत्त की तरफ से तीन गवाहों के बयान होने थे, जिनमें से एक सिक्ख गवाह ने बताया कि उस रात संजीव राणा ने अत्याधिक शराब पी रखी थी, एवम मेरे साथ मारपीट कर मेरी पगड़ी गिरा दी। जबकि अन्य दो गवाहों ने मौके पर होने से ही इनकार कर दिया।
जिसके फलस्वरूप मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट विशाल समर ने “दंगा फैलाने, और मारपीट के लिए सोमदत्त को दोषी करार दिया। और सजा के लिए 4 जुलाई के दिन सुरक्षित रखा। इस फैसले से कहीं न कहीं सोमदत्त के राजनैतिक जीवन असर पड़ता दिखाई देता है। हालांकि भारतीय कानून बहुत लचीला है, सोमदत्त भारतीय कानून के मुताबिक,निचली अदालत के फैसले को सेशन कोर्ट, हाई कोर्ट, आदि में जा सकते हैं। अब देखना ये है कि कोर्ट सजा के तौर पर क्या फैसला सुनाती है, और आम आदमी पार्टी  क्या इस पर एक्शन लेती है? 

क्यों तुमने लगाए हैं यहां, जुर्म के ढेरे
धन साथ न जाएगा, बने क्यों हो लुटेरे
पीते हो गरीबों का लहू, शाम सवेरे 
खुद पाप करो नाम है, शैतान का बदनाम।।
इंसान बनों कर लो भलाई का कुछ काम
दुनियाँ से चले जाओगे, रह जायेगा बस नाम।। 

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