कोरोना वायरस को हल्के में ले रहे दिल्लीवासी: शंटी

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नई दिल्ली। कोरोना काल की इस भीषण महामारी के समय जहा अपने अपनों को हाथ लगाने से इंकार कर रहे है वही एक शहीद भगत सिंह सेवा दल नाम की संस्था ने उन लावारिस व अन्य शवों का पूरे रीती रिवाजो के साथ दाहसंस्कार करवाने का जिम्मा उठाकर पूरी दुनिया के लिए एक मिसाल कायम की है। शहीद भगत सिंह सेवा दल पिछले 25 सालो से लोगो की सेवा में लगे हुए है। इस दल के प्रेजिडेंट जितेंद्र सिंह शंटी, जिन्हें अपने नेक कार्यो के चलते अनगिनत पुरुष्कारो से नवाजा जा चूका है।

इन 25 सालों में लगभग 40,000 से ज्यादा शवों, 22,000 से अधिक कोरोना मरीजों की इस सेवा दल ने शव वाहन व एम्बुलेंस से सेवा की है। पुरे कोरोना काल में तकरीबन 600 से अधिक शवों और 1,200 से ज्यादा कोरोना पॉजिटिव मरीज़ों की कोरोना वारियर्स ने सेवा की है जिनमें 150 ऐसे भी दाहसंस्कार कराए गए थे जिनके परिवार वाले क्वारंटाइन थे और 26 ऐसे थे जो अपने परिवार वालो के शवों को छोड़ कर भाग गए।

उन्होंने दिल्ली अप टू डेट के साथ हुए एक इंटरव्यू में बताया की दिल्ली निगम भोग घाट पर हुई एक घटना ने उन्हें शव के दाहसंस्कार की सेवा का ज़िम्मा उठाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने बताया ” एक व्यक्ति के पास अपने बच्चे के दाहसंस्कार के लिए पैसे न होने पर लोगो की चिताओ की जली हुई लकड़ियों को उठाना। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में जहा लोग अपने मकान, शादी व कार पर करोड़ो रूपये खर्चते है लेकिन उसी राजधानी में जब किसी का अपना मर जाए और दाहसंस्कार के लिए पैसे न हो ये बहुत कष्टदायक बात है।” उस निराश घटना से भावुक होकर शंटी जी ने मुफ्त में शवों के दाहसंस्कार करने की सेवा करने का निर्णय लिया।  

कोरोना के बढ़ते संक्रमण और शवों की बढ़ती संख्या को देखते हुए शंटी ने बताया कि भारत में कोरोना अपनी चरम सिमा पर आ चूका है इस गंभीर समय में हल्की सी भी चूक या ढिलाई की गुंजायश नहीं है जिस तेजी से शवों की संख्या दिन-ब-दिन बढ़ रही है भारत में इटली जैसा मंजर दूर नहीं है जब रास्तो पर लाशो के ढेर पड़े होगे।

दिल्ली की स्तिथि टस से मस

दिल्लीवासी कोरोना की गंभीरता को नहीं समझ रहे है और कोरोना संक्रमण को वो किसी अन्य वायरस की तरह समझ रहे है इस वक्त लोगो का जागरूक होना और सावधानी बरतना अति आवश्यक हो चूका है। सरकार जो आंकड़े दिखा रही है वो सिर्फ अस्पतालों में मरने वाले लोगो के है घरों में मरने वाले लोगो के आंकड़े इससे कही गुणा ज्यादा है। लाशो को जलाने के लिए शमशान घाटों में जगह नहीं बची है, सीएनजी से दाहसंस्कार करने के लिए घंटो इंतज़ार करना पड़ रहा है। पिछले दस दिनों की बात करे तो 1000 से अधिक लोगों की कोरोना से मृत्यु हुई है जो कि बहुत ही चिंताजनक है। अस्पतालों में बेड खाली नहीं है, बेड है तो ऑक्सीजन नहीं है, ऑक्सीजन है तो वेंटिलेटर नहीं है और अगर कोई मर जाता है तो शव को जलाने के लिए शमशान घाट खाली नहीं है। दिल्ली की स्तिथि दिन-ब-दिन बतर होती जारी है।

शहीद भगत सिंह सेवा दल के कोरोना वारियर्स  
वैसे तो शहीद भगत सिंह सेवा दल से अनगिनत लोग जुड़े है व सेवा का कार्य पूरी निष्ठा से कर रहे है पर कोरोना की खतरनाक परिस्तिथि में जब लोग घरों से निकलने को तैयार नहीं थे ऐसे में 21 कोरोना वारियर्स ने शंटी का साथ देते हुए लोगो की सेवा में दिन-रात एक कर दिए। जिनमे से एक कोरोना वारियर कोरोना पॉजिटिव होने के कारण शहीद हो गए। कोरोना वारियर्स ने गर्मी में पसीने से लतपत होकर भी सेवा की है और अब सर्दी में भी उतनी ही शिद्दत से सेवा कर रहे है।

क्वारंटाइन के दौरान लिया निर्णय
सेवा करते वक्त बीच में जितेंद्र सिंह शंटी के साथ अन्य 8 लोग कोरोना पॉजिटिव हुए थे तब क्वारंटाइन के समय में उनको पता लगा की सरकार क्वारंटाइन हुए लोगो पर ध्यान ही नहीं दे रही है अगर उन्हें किसी चीज की जरूरत है या किसी आपातकालीन परिस्तिथि में है उन पर तो कोई ध्यान ही नहीं दे रहा। क्वारंटाइन में लोगो के आस पड़ोसी पास आने से इंकार कर रहे है ऐसे में उनकी समस्या कौन हल करेगा तब उन्होंने अपने सभी क्वारंटाइन लोगो की जरूरतो को पूरा करने की सेवा करने का निर्णय लिया। 


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