फर्ज-ए-कुर्बानी कर के देश में मनाई जा रही है ईद उल अजहा

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लखनऊ। देश में लोग फर्ज-ए-कुर्बानी करके ईद-उल-अजहा मना रहे हैं। यह इस्लाम धर्म में दूसरा सबसे अधिक मनाया जाने वाला त्योहार है। ईद उल फितर के करीब 70 दिनों के बाद यह त्योहार मनाया जाता है। मीठी ईद के बाद यह इस्लाम धर्म का प्रमुख त्योहार है।

इस्लामी मान्यता के अनुसार जब हजरत इब्राहिम ने अपने बेटे हजरत इस्माइल को इसी दिन खुदा की राह में कुर्बान किया था। तब खुदा ने उनके जज्बे को देखकर उनके बेटे को जीवनदान दिया था। इस प्रथा को जारी रखते हुए मुस्लिम लोग इस दिन अपने प्रिय जानवर को खुदा की राह में कुर्बान करते है।

कुर्बानी के बाद गरीब लोगों पर विशेष ध्यान दिया जाता है। कुर्बानी के बाद गोश्त के तीन हिस्से किए जाते हैं। इन तीन हिस्सों में खुद के लिए एक हिस्सा रखा जाता है, एक हिस्सा पड़ोसियों और रिश्तेदारों को बांटा जाता है और एक हिस्सा गरीब और जरूरतमंदों को बांट दिया जाता है। इसके जरिए पैगाम दिया जाता है कि अपने दिल की करीब चीज भी दूसरों की बेहतरी के लिए अल्लाह की राह में कुर्बान कर दी जाती है।

Eid ul Adha is second main festival in Islam after Mithi Eid. People are celebrating this festival by performing sacrifice ritual.

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