नवजात शिशु को ब्रेस्टफीडिंग बेहद जरुरी

लंदन । नवजात शिशु को ब्रेस्टफीडिंग करवाना बेहद ज़रूरी है क्योंकि इससे शिशु मृत्यु दर में कमी लाई जा सकती है। जन्म के एक घंटे के अंदर स्तनपान करवाने से शिशु की जान बच सकती है। इससे शिशु का मानसिक और शारीरिक विकास अच्छी तरह से होता है। जिन महिलाओं ने नवजात के जन्म के बाद 2 से 23 घंटों के बीच स्तनपान करवाया उनमें शिशु मृत्यु का खतरा 33 पर्सेंट अधिक पाया गया।

वहीं जन्म के एक घंटे के अंदर स्तनपान करवाए गए शिशुओं में यह खतरा नज़र नहीं आया। यूनिसेफ और वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइज़ेशन ने हाल ही में एक रिपोर्ट जारी की, जिसमें बताया गया कि जिन नवजात शिशुओं को जन्म के तुरंत बाद ब्रेस्टफीडिंग (स्तनपान) न करवाकर जन्म के 24 घंटों या उसके भी बाद स्तनपान करवाया गया, उनमें शिशु मृत्यु का खतरा दोगुना दिखा।

यूनिसेफ के एग्जिक्युटिव डायरेक्टर हेनरिटा एचट फोर ने कहा, ‘जब बात ब्रेस्टफीडिंग की आती है तो टाइमिंग काफी मायने रखती है। कई देशों में तो यही चीज शिशु की जाने के लिए खतरे की बात बन जाती है।’ हालांकि भारत ने पिछले एक दशक में इसमें काफी सुधार दिखाया है। 2005 में जहां ब्रेस्टफीडिंग दर 23.4 पर्सेंट थी, वहीं 2015 में यह 41.5 पर्सेंट हो गई, लेकिन अभी भी यह अन्य देशों से पीछे है।

जब यूएन के दो देशों द्वारा ब्रेस्टफीडिंग ऐक्सेस के लिए 76 देशों को परीक्षण किया तो उसमें भारत 56वें स्थान पर था। बता दें कि जन्म के एक घंटे में मां का गाढ़ा पीला दूध नवजात के लिए जीवनदायी होता है। मां का पहला दूध डायरिया, निमोनिया और कुपोषण से तो बचाता ही है, शारीरिक और मानसिक विकास में भी सहायक होता है।

इसीलिए जन्म के एक घंटे के अंदर ब्रेस्टफीडिंग पर ज़ोर दिया जाता है। रवांदा और मालावी जैसे अफ्रीकी देश भी नवजात शिशु को जन्म के एक घंटे के अंदर ब्रेस्टफीडिंग कराने के मामले में काफी आगे हैं, लेकिन सबसे अच्छा परफ़ॉर्मर श्री लंका रहा। नवजात के जन्म के एक घंटे के अंदर ब्रेस्टफीडिंग कराने के मामले में श्री लंका का रेट 90.3 पर्सेंट था।

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