कोरोना वायरस ने इटली को बनाया अपंग, जारी है मौत का तांडव

Spread the love

नई दिल्ली। कोरोनो वायरस महामारी ने लगभग पूरी दुनिया में अपने पैर पसार लिए हैं और मानवजात के लिए गंभीर परिणाम प्रस्तुत किए हैं। हर दिन बीतने के साथ, दुनिया भर में हजारों नए वायरस के मामले सामने आ रहे है और मरने वालों की संख्या तेजी से बढ़ती जा रही है। गौरतलब है कि कोरोना वायरस का एपीसेंटर चीन था। लेकिन इटली के लिए कोरोना सबसे ज्यादा घातक साबित हुआ है।

आपको बता दे कि इटली में कोरोना से होने वाली मौत का आंकड़ा चीन से भी ज्यादा हो गया है। इटली में कोरोना से 3400 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई है। गुरुवार को इटली में 427 लोगों की कोरोना वायरस से मौत हो गई जिससे मरने वालों का कुल आंकड़ा 3405 हो गया। चीन में अब तक 3245 लोग इस बीमारी से मारे गए हैं। गौरतलब है कि 12 मार्च से इटली में लॉकडाउन है और ये कब तक है सरकार को भी इसका अंदाजा अब नहीं रहा है।

इटली की आबादी करीब 6 करोड़ है। बुजुर्गों की आबादी में इटली नंबर दो पर हैं। मरने वाले ज्यादातर मरीज 70 साल के अधिक के थे। इटली जब मौतों के मामले में रिकॉर्ड बना रहा है, वहीं चीन में अब कोरोना वायरस दम तोड़ता नजर आ रहा है। चीन के वुहान शहर से कोरोना की शुरुआत हुई थी लेकिन अब वहां पर कोई भी नया मामला सामने नहीं आया है। इटली में कोरोना वायरस को लेकर बड़ी लापरवाही हुई है लेकिन पहले आपको बताते हैं कि आखिरी इटली और चीन के बीच ऐसा क्या रिश्ता है कि कोरोना वायरस बड़ी तेजी से इटली में फैला और बेकाबू हो गया। संक्रमण ने इटली को अपंग बना दिया है, देश में दहशत का ऐसा माहौल है कि लोग अपने घर में हैं। इटली में सरकार की तमाम कोशिशों के बाद भी कोरोना वायरस का संक्रमण और मौतें रुकने का नाम नहीं ले रही हैं।

इटली में फैशन का ब़ड़ा उद्योग है। इटली कपड़ों की सप्लाई चीन से लेता है। इटली के फैशन हाउस में बड़ी तादाद में चीनी मजदूर काम करते हैं जिनमें से ज्यादातर वुहान के नागरिक हैं। यही वजह है कि वुहान से कोरोना वायरस इटली पहुंचा और फिर इटली में तबाही मचाने लगा। कोरोना को लेकर इटली के प्रशासन की नींद देर से खुली और जब खुली तो यह तेजी से फैल चुका था। इटली में कोरोना का संक्रमण फैलने के बाद अचानक मरीजों की तादाद बढ़ गई। डॉक्टरों की कमी हो गई। डॉक्टर की पढ़ाई करने वाले छात्र से लेकर नर्स तक दिन रात मरीजों को बचाने में जुट गए लेकिन जल्दी ही अस्पताल कम पड़ गए। आईसीयू में बेड कम पड़ने लगे और अस्पताल के स्टाफ भी कोरोना के संक्रमण का शिकार होने लगे। इटली ने अपनी अर्थव्यवस्था बचाने के लालच में व्यवसाय और दफ्तरों को बंद नहीं किया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *