फेस मास्क कोरोना वायरस से तो बचा लेगा लेकिन जान के लिए हो सकता है खतरनाक

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नई दिल्ली। कोविड-19 ने पूरी दुनिया को दो महीने से अधिक समय से गतिरोध की स्थिति में रखा हुआ है। विश्व के नेताओं और डॉक्टरों का मानना है कि जब तक कोरोना वायरस से लड़ने के लिए वैक्सीन विकसित नहीं होती है तब तक लोगों को वर्तमान स्थिति के साथ जीना सीखना होगा क्योंकि उनके पास अभी कोई दूसरा विकल्प नहीं है। दुनिया में एैसा कोई भी देश नहीं है जो कोरोना वायरस के प्रकोप से प्रभावित नहीं हुआ हो। विभिन्न देश अब तक के सबसे खराब दौर से गुजर रहे हैं क्योंकि संक्रमण ने न केवल उनके लोगों के स्वास्थ्य को प्रभावित किया है बल्कि वायरस के प्रसार को सीमित करने के लिए लगे लॉकडाउन ने इन देशों की अर्थव्यवस्था और विकासदर पर बुरा असर डाला है।

कोरोना के मामलें और मरने वालों की संख्या दिन गुजरने के साथ-साथ तेजी से बढ़ रही है। सरकार लगातार लोगों से सोशल डिस्टन्सिंग और फेस मास्क पहनने के लिए आग्रह कर रही है ताकि संक्रामक वायरस न फैले। गौरतलब है कि सैनिटाइजर का उपयोग, सोशल डिस्टन्सिंग और फेस मास्क (व व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण) ही अबतक कोरोना वायरस के प्रसार को नियंत्रित करने के उपाए माने गए है। लेकिन पिछले कुछ दिनों में फेस मास्क के संबंध में कुछ चौंकाने वाली स्थितियां और अध्ययन सामने आए हैं जिसे जानकर आप हैरान हो जाएंगे।

फेफड़े बन जाएंगे कार्बन डाइऑक्साइड के चैम्बर

फेस मास्क पहनकर कोई काम करते हुए आपने यह जरूर महसूस किया होगा कि आपको सांस लेने में दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है और घुटा हुआ सा अनुभव होता है। आमतौर पर फेस मास्क हमारे मुंह और नाक को ढंकता है जिस वजह से व्यक्ति को उचित मात्रा में ऑक्सीजन नहीं मिल पाती है। एक अध्ययन में यह सामने आया था कि फेस मास्क पहनने से व्यक्ति को हाइपरकेपनिया (Hypercapnia) होने की काफी संभावना होती है। आपको बता दे कि हाइपरकेपनिया एक खतरनाक अवस्था होती है जिसमें ​व्यक्ति के रक्त में असामान्य रूप से कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) का स्तर बढ़ जाता है, कार्बन डाइऑक्साइड शरीर के चयापचय का एक गैसीय उत्पाद है और जो आमतौर पर फेफड़ों के माध्यम से बाहर निकाला जाता है।

हाइपरकेपनिया के लक्षण हल्के से लेकर गंभीर तक हो सकते हैं। जानकारी के अनुसार शरीर में इसके लक्षण धीरे-धीरे विकसित होते है और कई बार लोगों को पता नहीं चलता कि वह हाइपरकेपनिया से प्रभावित है। इस समस्या के निम्नलिखित लक्षणों से अवगत होना बहुत महत्वपूर्ण है।

हल्के लक्षण:

सिर चकराना
तंद्रा
अत्यधिक थकान
सिर दर्द
भटकाव महसूस हो रहा है
त्वचा की निस्तब्धता
सांस लेने में कठिनाई
मांसपेशियों में खिंचाव

गंभीर लक्षण:

भ्रम की स्थिति
कोमा
अवसाद या व्यामोह
हाइपरवेंटिलेशन या अत्यधिक सांस लेना
दिल की अनियमित धड़कन
बेहोशी
पैनिक अटैक्स
पूरे शरीर में भारीपन महसूस होना

N95 फेस मास्क

भारत और अन्य कई देशों में लोगों को कोरोना वायरस से सुरक्षित रहने के लिए N95 फेस मास्क पहनने को कहा गया है। N95 मास्क या N95 श्वासयंत्र एक कण-फ़िल्टरिंग फेसपीस श्वासयंत्र है जो यू.एस. नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर ऑक्यूपेशनल सेफ्टी एंड हेल्थ (NIOSH) का वर्गीकरण है। एन 95 कम से कम 95% वायु के कणों को फ़िल्टर करता है। आपको बता दे कि एन 95 फेस मास्क मूल रूप से खनन, निर्माण और पेंटिंग जैसे क्षेत्रों में औद्योगिक उपयोग के लिए डिज़ाइन किए गए थे लेकिन इस मास्क को कोरोना वायरस से बचने के लिए सबसे उतम माना गया है और यही कारण है कि भारत में एन 95 फेस मास्क को बड़ी संख्या में बनाया जा रहा है।

जॉगिंग या रनिंग के दौरान कभी भी फेस मास्क न पहनें

सरकार ने जनता से घर से बाहर निकलते समय फेस मास्क पहनने के आदेश दिए है जिससे वह स्वयं और दूसरों को कोरोना वायरस से सुरक्षित कर सके। लेकिन जॉगिंग या रनिंग के समय फेस मास्क पहनना खतरे से खाली नहीं है। कुछ दिन पहले एक चीनी व्यक्ति का मामला सामने आया था, जो वुहान में दौड़ पट्टी (running track) पर बेहोश पाया गया था। जानकारी के अनुसार 26 वर्षीय व्यक्ति फेस मास्क पहनकर दौड़ लगा रहा था और शरीर में कार्बन डाइऑक्साइड की ज्यादा मात्रा होने की वजह से बेहोश हो गया था। जांच में यह पता चला है कि इस व्यक्ति का बायाँ फेफड़ा लगभग 90% तक सिकुड़ गया था और दिल शरीर के दाहिने हिस्से में चला गया था। डॉक्टरों की सक्रियता और अस्पताल में समय पर पहुंचने के कारण ही यह व्यक्ति अब खतरे से बाहर है। आपको बता दे कि कोरोना वायरस के दौरान फेस मास्क से सम्बंधित यह पहली जानलेवा घटना नहीं है जो सामने आई है। इसी महीने दो युवा किशोर की ट्रैक पर फेस मास्क पहनकर दौड़ते समय मत्यु हो गई थी, जो अपने फिजिकल एग्जामिनेशन का अभ्यास के लिए दौड़ लगा रहे थे। इन घटनाओं से यह पता चलता है कि दौड़ते और जॉगिंग करते समय फेस मास्क पहनना बेहद खतरनाक है क्योंकि यह फेफड़ों को नुकसान पहुंचा सकता है और शरीर में कार्बन डाइऑक्साइड का स्तर बढ़ा सकता है।

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