लोहड़ी और मकर संक्रांति पर कैसे होगा सूर्य और शनि से लाभ

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नई दिल्ली। साल का सबसे पहला त्यौहार लोहड़ी प्रत्येक वर्ष जनवरी महीने में ही मनाया जाता है यह त्यौहार पजांब और हरियाणा में बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है यह उत्तर भारत का एक प्रमुख त्योहार है इस त्यौहार में लोग संध्या को अग्नि जलाकर उसमें आहुति देते हैं, सामान्यतः अग्नि में तिल, मक्का और रेवड़ी आदि की आहुति दी जाती है परिवार में विवाह होने पर या घर में किसी बच्चे के जन्म पर इस त्योहार को और भी धूमधाम से मनाया जाता है।

साल में 12 महीनों के साथ 12 संक्रांतियां होती हैं सूर्य का किसी राशि विशेष पर भ्रमण करना संक्रांति कहलाता है। सूर्य हर माह में राशि का परिवर्तन करता है, इसलिए कुल मिलाकर साल में बारह संक्रांतियां आती ​है। लेकिन साल में दो संक्रांतियां सर्वाधिक महत्वपूर्ण होती हैं. एक मकर संक्रांति और दूसरी कर्क संक्रांति सूर्य जब मकर राशि में जाता है तब मकर संक्रांति होती है। मकर संक्रांति से अग्नि तत्त्व की शुरुआत होती है इस समय सूर्य उत्तरायण होता है अतः इस समय किए गए जप और दान का फल अनंत गुना होता है।

आपको बता दे कि इस त्योहार पर सूर्य अपने पुत्र शनि से मिलने के लिए आते हैं अगर कुंडली में सूर्य या शनि की स्थिति ख़राब हो तो इस पर्व पर पूजा कर उपाय कर ​​ठीक हो जाता है। मकर संक्रांति पर लोग ज्यादा से ज्यादा स्नान, ध्यान और दान करते है।

सूर्य से लाभ पाने के लिए — लाल फूल और अक्षत डाल कर सूर्य को अर्घ्य देंते है, सूर्य के बीज मंत्र का जाप करते “ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः”, लाल वस्त्र, ताम्बे के बर्तन तथा गेंहू का दान करते है।

शनि से लाभ पाने के लिए — तिल और अक्षत डाल कर सूर्य को अर्घ्य देतें है,शनि देव के मंत्र का जाप करते है “ॐ प्रां प्री प्रौं सः शनैश्चराय नमः”, घी, काला कम्बल और लोहे आदि का दान करते है।

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