चेक बाउंस होने पर तुंरत होगी कार्यवाही

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नई दिल्ली। देश में चेक बाउंस के मामलें दिन प्रतिदिन बढ़ते जा रहे है चीफ जस्टिस एस ए बोबड़े और एल नागेश्वर राव की बेंच ने चेक बाउंस होने के मामलें को लेकर देश की सभी हाई कोर्ट्स से जवाब मांगा है। देश के सभी राज्यों के पुलिस महानिदेशक को 1 महीने के अतंर्गत रिपोर्ट देने का आदेश दिया है तथा राज्यों के गृह विभाग, केंद्र के वित्त मंत्रालयों की भी मदद ली जाएगी।

चेक बाउंस केसों का निपटारा परक्राम्य लिखत अधिनियम सेक्शन 138 के तहत होता है। सुप्रीम कोर्ट ने 2020 मार्च माह में चेक बाउंस केसों को निपटाने के लिए मैकेनिज्म तैयार करने के लिए खुद संज्ञान किया था। एमिकस क्यूरी और वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ लूथरा ने चेक बाउंस होने मामलें को प्रीलिमनरी रिपोर्ट तैयार की थी जिसमे देश के सभी हाई कोर्ट से जवाब मांगा गया था। प्रीलिमनरी रिपोर्ट पर अभी तक केवल मध्य प्रदेश हाई कोर्ट, राजस्थान हाई कोर्ट और सिक्किम हाई कोर्ट के जवाब आए हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने यह संज्ञान स्वंय इसलिए लिया क्योकिं देश में 40 लाख चेक बाउंस के मामले अलग—अलग अदालतों मे पेंडिंग है। जिसमें से 18 लाख मामलों में आरोपियों का तपा नही है कि ​कहा है। कानून के अनुसार चेक बाउंस मामलों का निपटारा 6 महीने के अंदर हो जाना चाहिए लेकिन ये मामले 3-4 साल तक चलते रहते हैं जिसके कारण अदालतों का काफी समय बर्बाद होता है।


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