नेपाल में नए नक्शे को लेकर संसद में पास हुआ बिल

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काठमांडू। नेपाल और भारत के सीमावर्ती क्षेत्रों के चलते तनातनी के बीच शनिवार को नेपाल के संसद में देश के नक्शे में बदलाव को लेकर बिल पास हो गया है। बिल नेपाल की कानून मंत्री डॉ. शिवमाया तुम्बाड ने प्रतिनिधि सभा में पेश किया था जिसे सभी सांसदों ने बिना किसी विरोध के पास कर दिया। आपको बता दे कि नेपाल में 275 सदस्यों वाली प्रतिनिधि सभा में विधेयक पारित कराने के लिए दो तिहाई वोटों की जरूरत थी। विपक्षी पार्टियों नेपाली कांग्रेस, राष्ट्रीय जनता पार्टी नेपाल, और राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी ने इसके पक्ष में वोट किया।

गौरतलब है कि इस बिल को अब राष्ट्रीय सभा (संसद के ऊपरी सदन) में भेजा जाएगा। भारत ने लिपुलेख से धारचूला तक सड़क बनाई है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 8 मई को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए इसका उद्घाटन किया था। इसके बाद ही नेपाल की सरकार ने विरोध जताते हुए 18 मई को नया नक्शा जारी किया था। भारत ने इस पर आपत्ति जताई थी। भारत ने कहा था- यह ऐतिहासिक तथ्यों पर आधारित नहीं है। हाल ही में भारत के सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे ने चीन का नाम लिए बिना कहा था कि नेपाल ने ऐसा किसी और के कहने पर किया। नेपाल और ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के बीच 1816 में एंग्लो-नेपाल जंग के बाद सुगौली समझौते पर दस्तखत हुए थे। समझौते में काली नदी को भारत और नेपाल की पश्चिमी सीमा के तौर पर दिखाया गया है। इसी आधार पर नेपाल लिपुलेख और अन्य तीन क्षेत्र अपने अधिकार क्षेत्र में होने का दावा करता है। हालांकि, दोनों देशों के बीच सीमा को लेकर तस्वीर साफ नहीं है। दोनों देशों के पास अपने-अपने नक्शे हैं।

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