निजी विद्यालयों के सामने नतमस्तक है केजरीवाल सरकार

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नरेन्द्र धवन : दिल्ली अपटुडेट।

नई दिल्ली। दिल्ली प्रदेश काँग्रेस ने दिल्ली में नर्सरी दाखिले में निजी विद्यालयों द्वारा की जा रही मन मर्जी पर दिल्ली सरकार के नतमस्तक होने और मूकदर्शक बने रहने का बड़ा आरोप लगाया। दिल्ली प्रदेश काँग्रेस ने कहा कि जिस प्रकार नर्सरी दाखिले प्रक्रिया में निजी विद्यालयों द्वारा मनमर्जी की जा रही है उसे देखकर लगता है कि राजधानी दिल्ली में सरकार नाम की कोई चीज नहीं है। दिल्ली काँग्रेस ने शिक्षा मंत्री को निजी स्कूलों की कठपूतली होने का आरोप लगाया।

ज्ञात हो कि इससे पहले बुद्धवार को नर्सरी दाखिले की प्रक्रिया शुरू होने से पहले दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष चौ.अनिल कुमार ने शिक्षा मंत्री मनीष सीसोदिया को शिक्षा माफिया का सरगना बताया था। उन्होने अपने बयान में निजी विद्यालयों पर दिल्ली सरकार द्वारा जारी गाइडलाइंस के पालन नहीं करते हुए पूरे दाखिले प्रक्रिया को अंधेरे में रखने का आरोप भी लगाया था। उन्होने अधिकांश निजी विद्यालयों द्वारा अपने व शिक्षा निदेशालय की वैबसाइट पर अपनाई जाने वाले दाखिले प्रक्रिया से जुड़ी जानकारी नहीं डालने व मात्र 1700 निजी विद्यालय पर ही सरकार द्वारा जारी निर्देश लागू होने व उसका भी पालन नहीं किए जाने पर अपनी प्रतिक्रिया दी थी।

दिल्ली प्रदेश काँग्रेस ने 18 फरवरी से शुरू हुए दाखिले प्रक्रिया के शुरूआती कुछ दिनों में बरती गई लापरवाही व छात्रों की समस्याओं के बारे में कहा कि दाखिले प्रक्रिया में निजी स्कूल मनमानी कर रहे है तथा साथ ही बड़े पैमाने पर ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया नहीं अपनाए जाने व अभिभावकों को विद्यालाय आकर ऑफलाइन आवेदन देने की शिकायतें भी आ रही है।

दिल्ली प्रदेश काँग्रेस ने कहा है कि दिल्ली हाई कोर्ट द्वारा जिन शर्तों को प्रतिबंधित किया गया है, उन शर्तों को भी आधार बनाकर नर्सरी दाखला नामांकन किया जा रहा है । इन निजी स्कूलों की मनमर्जी से दाखिले नामांकन की प्रक्रिया पहले आओ पहले पाओ और मैनेजमेंट कोटा की सीटों के आधार पर किया जा रहा है।

दिल्ली प्रदेश काँग्रेस ने कहा है कि दिल्ली सरकार के शिक्षा निदेशालय की मिलीभगत से ये सब हो रहा है। दाखिला प्रक्रिया में जारी गाइडलाइंस का सरकार द्वारा सही से पालन नहीं किया जा रहा है और अभिभावकों को अधंरे में रखा जा रहा है। शिक्षा निदेशालय की वैबसाइट पर दाखिले प्रक्रिया से जुड़ी जानकारी आज तक मात्र 1187 विद्यालयों ने सार्वजनिक की है, जबकि राजधानी में 4 हजार से भी अधिक निजी विद्यालय है

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