‘जय जवान, जय किसान’ का नारा देने वाले लाल बहादुर शास्त्री का आज ताशकंद में हुआ था निधन

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नई दिल्ली। 55 साल पहले आज के ही दिन देश के दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री का पूर्व सोवियत संघ के देश उज्बेकिस्तान के ताशकंद में निधन हो गया था। देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू की मृत्यु के बाद शास्त्री को देश की कमान सौंपी गई थी और उन्होंने प्रधानमंत्री के रूप में लगभग 18 महीने तक देश की सेवा की। जब शास्त्री भारत के पीएम बने तो उस वक्त देश दो बड़ी समस्याओं से जूझ रहा था, एक था पड़ोसी देश पाकिस्तान के साथ बिगड़ते रिश्ते और दूसरा देश की संघर्षशील कृषि प्रणाली। जिसके बाद शास्त्री ने देश को ‘जय जवान, जय किसान’ का नारा दिया था तथा देशवासियों को देश की सेना और किसानों को विशेष महत्व व सम्मान देने को कहा।

शास्त्री के नेतृत्व में ही भारत ने 1965 की जंग में पाकिस्तान को शिकस्त दी थी और जिसके बाद वो पाकिस्तान के राष्ट्रपति अयूब खान के साथ युद्ध समाप्त करने के समझौते पर हस्ताक्षर करने के लिए ताशकंद गए थे और वहीं उनकी मौत हो गई। शास्त्री की मृत्यु का रहस्य 1966 से अब तक हल नहीं हो पाया है। गौरतलब है कि 10 जनवरी 1966 को पाकिस्तान के साथ ताशकंद समझौते पर हस्ताक्षर करने के महज 12 घंटे बाद 11 जनवरी को तड़के 1 बजकर 32 मिनट पर उनकी मौत हो गई। बताया जाता है कि शास्त्री मृत्यु से आधे घंटे पहले तक बिल्कुल ठीक थे, लेकिन 15 से 20 मिनट में उनकी तबियत खराब हो गई। इसके बाद डॉक्टरों ने उन्हें एंट्रा-मस्कुलर इंजेक्शन दिया। इंजेक्शन देने के चंद मिनट बाद ही उनकी मौत हो गई।

लाल बहादुर शास्त्री की मृत्यु पर कुछ साल पहले एक फिल्म भी बनाई गई थी और उनकी मौत के संबंध में कई तथ्य फिल्म ताशकंद फाइल्स में दिखाए गए थे, जिसने देश की खुफिया एजेंसियों और राजनीतिक नेताओं की भूमिका पर कई सवाल भी उठाए थे। आपको बता दे कि शास्त्री की मौत पर संदेह इसलिए भी किया जाता है, क्योंकि उनका पोस्टमॉर्टम भी नहीं किया गया था। उनकी पत्नी ललिता शास्त्री ने दावा किया था कि उनके पति को जहर देकर मारा गया तथा उनके बेटे सुनील का भी कहना था कि उनके पिता की बॉडी पर नीले निशान थे। जब शास्त्री के पार्थिव शरीर को दिल्ली लाने के लिए ताशकंद एयरपोर्ट पर ले जाया जा रहा था तो रास्ते में सोवियत संघ, भारत और पाकिस्तान के झंडे झुके हुए थे। शास्त्री के ताबूत को कंधा देने वालों में सोवियत प्रधानमंत्री अलेक्सी कोसिगिन और पाकिस्तान के राष्ट्रपति अयूब खान भी थे।

लाल बहादुर शास्त्री बहुत ही गतिशील और देश के आम आदमी के बीच बेहद ही प्रसिद्ध थे। 1965 में जब भारत-पाकिस्तान के बीच जंग छिड़ी हुई थी तो अमेरिकी राष्ट्रपति लिंडन जॉनसन ने शास्त्री को धमकी दी थी कि अगर आपने पाकिस्तान के खिलाफ लड़ाई बंद नहीं की, तो हम आपको जो लाल गेहूं भेजते हैं, उसे बंद कर देंगे। गेहूं की कमी के जोखिम को कम करने के लिए शास्त्री ने देश की जनता से दिन के एक वक्त के भोजन को छोड़ने का अनुरोध किया था जिसे देशवासियों ने माना तथा एक वक्त के खाने को त्याग दिया था।


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