मंत्रालय को राजस्व घाटे के चलते खर्च कम करने के मिले आदेश

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नई दिल्ली। देशभर में फैले कोरोना संकट और लॉकडाउन से निपटने के लिए सरकार ने इस काल में जितने भी योजनाएँ बनाई थी वह कुछ हद तक सही थी लेकिन उसमे हुए खर्चे से सरकार का राजस्व घाटे में चला गया जिसके कारण सरकार की योजनाओ और राजस्व को काफी नुक्सान हुआ है। इन हालातो को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने इनसे निपटने के लिए कई फैसले लिए थे।

इसके बाद अब सभी मंत्रालयों के खर्च को नियंत्रण करने की कोशिश की जाएगी। वित्त मंत्रालय ने एक बार फिर मंत्रालयों और विभागों को कहा कि चालू वित्त वर्ष के शेष महीनों में अपने खर्च को संशोधित अनुमान के लक्ष्य तक सीमित रखने की कोशिश करे। इस मामले को लेकर वित्त मंत्रालय की दूसरे मंत्रालयों और विभागों के साथ बैठक हुई जिसमे खर्च की सीमा तय की गई और उसका पालन करने का आग्रह किया। वित्त मंत्रालय ने कहा, ‘‘वित्तीय सलाहकार यह सुनिश्चित करें कि 2020-21 के संशोधित अनुमान की बैठकों में तय की गई व्यय सीमा का अनुपालन हो।

सरकार ने लॉकडाउन के दौरान आने वाली नयी योजनाओ पर रोक लगा दी थी ताकि सरकार का खर्च ज्यादा न बढ़े। यह रोक मार्च, 2021 तक के लिए लगाई गयी है। वित्तीय संकट की वजह से सरकार कर्ज़ भी ज़ादा लेने लगी है। चालू वित्त वर्ष के लिए बाजार से कर्ज लेने का अनुमान 4.2 लाख करोड़ रुपये से बढ़ाकर 12 लाख करोड़ रुपये कर दिया गया है। वित्त वर्ष 2020-21 में अनुमानित कर्ज 7.80 लाख करोड़ रुपये के स्थान पर 12 लाख करोड़ रुपये होगा।


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