वर्चस्व की लड़ाई पुल पर अजमाई

West bengal वर्चस्व की लड़ाई हिंसात्मक घटनायें

पश्चिम बंगाल में फिर दोबारा वर्चस्व की लड़ाई की चिंगारी तेज होना प्रारंभ

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दिल्ली अप-टु-डेट
राजनीति गंदी-गंदी की बात छोड़िए अति गंदी होती जा रही है और पश्चिम बंगाल में राजनीति की भाजपा-टीएमसी की उठा पटक की तो हद ही हो गयी है और पिछलें कितने माह से राजनीतिक उठा पटक इतनी बढ़ी की हिंसात्मक घटनायें भी घट गयी। कितने निर्दोष लोगो की जान चली गई और आरोपो को दोनो पार्टियों ने एक दूसरे पर लगाया था और दोनो पार्टी के मुखियो पर कोई फर्क नही पड़ा पदो पर आसीन दाव-पेच राजनीति कर रहे है।

लेकिन उन परिवारों से पूछिए जिनके घर पालने वाले हिंसात्मक घटनाओं में अपनी जान गवा बैठे। आखिर कैसे उनके परिवार और नौनिहाल बच्चो और माता पिता का जीवन व्यतीत होता होगा। शायद इसकी किसी को भी चिंता नही है। अब पश्चिम बंगाल में फिर दोबारा वर्चस्व की लड़ाई की चिंगारी तेज होना प्रारंभ हो गयी है।

इससे पहले लोकसभा चुनाव में तो तेज तेज जलने लगी थी राजनीति की आग लेकिन कुछ समय शांत रही लेकिन बिल्कुल बुझ नही पाई थी कि एक पुल फ्लाई ओवर पर जोर आजमाई वर्चस्व की कुश्ती शुरू हो गयी है। देखना इस प्रकार वर्चस्व के दंगल की चिंगारी इस बार कितनी जाने ले सकती है।

जनता का पागल पन भी अजीबों गरीब है कि वह यह नही देखते कि दोनो पार्टियों के मुखिया खुद तो वीआईपी सुरक्षा में रहते है और आम नागरिक तुम आपस क्यों लड़े मरे जा रहे हो। खूब पता है कि इन्हें आपके आंतिम संस्कार में भी आने का वक्त नही होगा। कहीं मीटींग में होंगे और उनके वर्चस्व की लड़ाई तुम क्यो अपने सिर पर ओढ़ रहे हो।

मामला फ्लाई ओवर के उद्धघाटन का है, जो वर्धमान रेलवे स्टेशन के निकट नवनिर्मित है जिसको केंद्र और राज्य दोनो सरकारो ने मिलकर बनवाया है। जिसका अब दूसरी बार उद्धघाटन होने जा रहा है। जबकि एक बार पश्चिम बंगाल सरकार के मंत्री एक बार उद्धघाटन कर चुके है। जिसके उद्धघाटन की राजनीति चरम पर पहुंच चुकी है। अब केंद्र सरकार द्वारा इसका उद्धघाटन होने जा रहा है।

जबकि एक बार उद्धघाटन होने के बाद बैरिकेटिंग लगा दी गयी थी और उसका कारण सुरक्षा के लिहाज से बंद होना बताया गया था कि रेलवे की तरफ से सेफ्टी क्लीरेंस सार्टीफिकेट पुल को अभी नही दिया गया है और पुल पर अभी स्ट्रीट लाइटे भी नही लगी है। जबकि एक बार उद्धघाटन होने के बाद टीएमसी के कार्यकर्ताओं ने वैरिकेटिंग को हटाकर रास्ते को खोल दिया। तत्पश्चात पुलिस ने पहुंच कर पुनः बंद कर दिया गया था।

पुल वर्धमान के लिए गर्व की बात माना जा रहा है। फिर बीजेपी कार्यकर्ताओं ने पुनः खोलने की कोशिश की इस पर बीजेपी के जिला अध्यक्ष संदीप नंदी ने कार्यकर्ताओं से कहा सुरक्षा के लिहाज से ऐसा न करे। जब रेलवे इसको सर्टिफिकेट दे देगा। तब इस पुल को खोला जायेगा। फिर पुनः नए सिरे से इसका स्वागत करेंगे लेकिन यह सब तो राजनीति के अलावा और कुछ नही लग रहा है। सिर्फ वर्चस्व की लड़ाई व मंद बुद्धिता का एक प्रतीक है।

दोनो सरकारे भी अपनी बेज्जत्ति कराने में लगी हुई है। जबकि केन्द्र की सरकार बड़ी है उसे ही इस बात को भुला देना चाहिए था और दूसरे फ्लाई ओवर का निर्माण करा के उद्धघाटन कर लेते। लेकिन उनकी भी तुच्छ मानसिकता दोबारा उद्धघाटन कर अपनी आत्मा को शांति देने जैसा कृत्य करने जा रही है। जो जनता की दृष्टि में उक्त मूर्खता के अलावा और क्या हो सकता है।

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