जड़ी बूटियों का खाली नाम, बाबा के शिष्य का चला एलोपैथिक से काम?

पतंजलि आयुर्वेदिक सीईओ बालकृष्ण

बाबा के शिष्य का चला एलोपैथिक से काम

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दिल्ली अप—टु—डेट
पतंजलि योगपीठ के महामंत्री तथा पतंजलि आयुर्वेदिक के सीईओ बालकृष्ण की तबीयत एक पेड़ा खाने से खराब हो गई। ऐसा माना जा रहा है कि योगा ने एक पेडा नहीं पचा पाया और फूड प्वाइजनिंग हो गई और योगा फेल हुआ तो साथ’ साथ पतंजलि आयुर्वेद हींग बटी भी फेल हो गई। जहां पूरे विश्व के अन्दर बाबा जी योगा के नाम से जाने जाते हैं, तो वही योगा बाबाजी के आचार्य को धोखा दे गया।

जब एक पेड़ा हजम नही हो सकता है। तो उस योगा से भयंकर बीमारी कैसे ठीक होगी। राम देव जी उसकी गारंटी लेते घूम रहे हैं। बड़े आश्चर्य की बात है कि पतंजलि के लाखो प्रोडक्ट लोगों के लिए तमाम तरह के विज्ञापन में प्योर बताये जा रहे हैं। उनका असर शिष्य के रोगो पर सफल क्यो नही हुआ। आश्चर्य की बात यह है कि बाबा जी देश के करोड़ों लोगों को पतंजलि के प्रोडक्ट दे रहे हैं।

लेकिन खुद पर असर नहीं करते तो क्या उससे आमजन की समस्या खत्म की जा सकती है या सिर्फ यह एक ठगी है। यह कहना इसलिए गलत नहीं हो सकता क्योंकि रामदेव का प्रोडक्ट आचार्य बालकृष्ण पर काम नहीं कर पाया और उन्हें ऋषिकेश के एम्स में खुद का इलाज कराना पड़ा। बड़ी हैरानी की बात है। सुनने में तो यह भी आ रहा है कि पतंजलि कुछ ऐसे प्रोडक्ट लांच करने जा रही है। जो बाबा जी को और उनके शिष्य को लाभदायक नहीं हो सकते लेकिन फिर वही प्रोडक्ट जनता के लिए 200 प्रतिशत शुद्ध है। क्योंकि बाबा जी को यह श्राप लगा है। जो प्रोडक्ट बाबाजी के लिए तैयार होगे उन पर वही काम करेगा और जो लोगों के लिए तैयार होंगे वह उन पर काम करेगा।

देखा जाए तो कहीं ना कहीं पतंजलि लोगों के साथ लुका छुपी तो नहीं खेल रही है। शिष्य पेड़ा खाए तो फूड प्वाइजनिंग लोग पत्थर भी खा ले तो पतंजलि की शुद्ध हींग बटी से वह हजम हो जाता है, वाह क्या बात है। पतंजलि ने ऐसी गाय पाली है जो दूध फुल क्रीम, शुद्ध देसी घी, लस्सी, दही, छाछ चारों एक साथ देती हैं। लेकिन देश के किसानों के पास सिर्फ ऐसी गाय व भैसे है जो सिर्फ दूध ही देती हैं। वही छाछ बनाने में टाइम खर्च होता है। लेकिन बाबा जी से लोग यह गाय खरीदना चाहते हैं।

पतंजलि यह प्रोडक्ट बेचना नहीं चाहती क्योंकि वह 1000% शुद्ध है। प्रत्येक जगह पॉलिथीन पर प्रतिबंध है। परंन्तु पतंजलि पॉलिथीन पर छूट क्योंकि वह बाबा जी ने योगा कर के तैयार की है।पतंजलि की मधुमक्खियां दिन मे आकर शहद देती है। वह भी 24 घण्टे 11 माह 365 दिन चाहे चन्द्र पक्ष हो या कृष्ण पक्ष यह मधुमक्खियां शहद खुद नही चाटती है और अश़ुद्ध मधुमक्खियां जो गावं जगलो और पेड़ो पर पायी जाती है। वह एक महीने मे 15 दिन ही शहद जोड़ती है और तो और तो बाबाजी को एक योजना सूझी और उन्होने पत्तो और जडो से औषधी तैयार की जिसे किसी सख्सियत ने खरीदा बाबा जी ने प्रोडक्ट का नाम पतजडि से पत्त् + अजलि कर दिया जो अब पतंजलि के नाम से मशहूर है।

देखा जाए तो बाबा जी के टूथपेस्ट ने दांतो के दाग के साथ दांत भी कतई साफ कर दिये। इसलिए लोग अब क्रान्ति टूथपेस्ट को कपड़ो के दाग मिटाने के लिए प्रयोग कर रहे है। आज तक लोगो ने पढ़ा कि पहाड़ी इलाको मे चावल नही उगाया जा सकता। धान की खेती नही की जा सकती लेकिन बाबा की पतंजलि पौध ने ऋषिकेश के पहाड़ी इलाके मे चावल क्रान्ति उत्पन्न कर दी। मोदी जी तो एक बार मे दो चार देशो की यात्रा मे 60—70 घण्टे खर्च करते है। लेकिन पतंजलि मैन 12 घण्टो मे विश्व के सभी देशो की यात्रा कर सकते है। देश के अन्दर सरसो से तेल निकलता है। लेकिन पंतजलि मे पत्तो से तेल निकलता है। तभी तो प्योर है। यह सरसो बनने नही देते तने से ही काम चला लेते है। देश प्रगति कर रहा है।

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