रसगुल्ला गिरा रे उड़ीसा के बाजार में।

Rasgulla sweet
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नई दिल्ली। भारत मे अधिकांश लोग मिठाइयों के शौकिन है जिनके लिए मिठाई को खाने का मजा ही कुछ और होता है।
रसगुल्ला एक ऐसा मिष्ठान है जिसका नाम आते ही सभी के मुंह में पानी आने लगता है। भले ही वो मधुमेह रोग से ग्रस्त क्यो न हो रसगुल्ला खाना उसे भी खूब भाता है।


भारत के हर मिष्ठान भंडार पर आपको रसगुल्ला मिला जायेंगा लेकिन ये प्रसिद्ध—मशहूर रसगुल्ला है कहां का कहां बनता है ये किस प्रदेश का मूल मिष्ठान है इसकी उत्पति कहां हुई? ये सब शायद ही आप जानते हो? अधिकांश लोग रसगुल्ले को बंगााल का मिष्ठान मानते है जबकि ऐसा नही है।
चलिए आज हम आपको इसी के बारे मे बताते है।


वर्षो से बंगाल और उड़ीसा के बीच रसगुल्ले को लेकर काफी कसा कसी चल रही थी। अथक प्रयासों के बाद आखिरकार उडीसा ने इस जंग को जीत लिया है। रसगुल्ले से उडीसा को जी आई टैग यानी भौगोलिक पहचान मिल गया है। रसगुल्ला बहुत समय पहले से भगवान जगन्नाथ को चढ़ाई जाने वाली तमाम मिठाइयो में से एक है।


बता दे कि जी आई रजिस्ट्री ने वर्ष 2017 में पश्चिम बंगाल को रसगुल्ला के लिए जी आई टैग दे दिया था। जिसके चलते उडीसा ने इस पर आपत्ति दर्ज कराई थी। उस आपत्ति पर विचार करते हुए रजिस्ट्री से उडीसा को दो महीने का समय दिया गया था कि रसगुल्ले से संबंधित तथा अविष्कार और बनाने की विधि का पूर्ण ब्यौरा तमाम सबूतो सहित पेश करना है ताकि उडीसा अपने दावे की पुष्टि कर सके। इस पर उडीसा ने सारे सबूत तय समय में पेश कर जी आई टैग ले लिया और अब भारत सरकार की तरफ जी आई टैग प्रमाण पत्र उडीसा को मिल गया और रसगुल्ला टैग पा कर उडीसा के बाजारो में मजबूत हो गया। अब हम आपको जी आई टैग के बारे में बतायेंगे। जी आई टैग खासकर उस वस्तु या उत्पाद के गुणवत्ता और उसकी खास पहचान का सबूत होता है।

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