स्वतंत्रता दिवस : कुछ रोचक तथ्य

15 August अंग्रेजी शासन आजादी मिल

स्वतंत्रता दिवस के रोचक तथ्य

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दिल्ली अप—टु—डेट
हम आपको स्वतंत्रता दिवस के आज कुछ ऐसे तथ्यों के बारे में बतायेंगे जो शायद ही आप जानते हो। यह बिल्कुल ही ​दिलचस्प है तथा यह जानना भी बहुत ही जरूरी है। यह हम सभी जानते है कि अंग्रेजी शासन से मुक्ति पाने के लिए भारत ने बहुत समय तक स्वतंत्रता की जंग लड़ी और सफलता प्राप्त की । जिसमे हमारे देश के कई स्वतंत्रता सेनानी भी शहीद हुए तथा कईयों को अग्रेजी शासन द्वारा फांसी भी दी गई।

15 अगस्त सन् 1947 में भारत (हमारे) देश को आजादी मिल गयी थी लेकिन आजादी के जश्न मे महात्मा गांधी शामिल नही थे। क्योंकि उस दिन गांधी जी दिल्ली से हजारो किलो मीटर दूर बंगाल की नोआखली में हिंदू और मुस्लिम के बीच हो रही सम्प्रदायिक हिंसा को रोकने के लिए अनशन कर र​हे थे। ​जबकि 14 अगस्त की मध्य रात्रि को जवाहर लाल ने​​हरू ने अपना एतिहासिक भाषण ‘ट्रिस्ट विद डेस्टनी’ दिया था।

माना जा रहा है कि इस भाषण को पूरी दुनिया ने सुना था और महात्मा गांधी ने नही वह इसलिए के महात्मा गांधी उस रात जल्दी सोने चले गये थे। जबकि हर साल भारत के प्रधानमंत्री दिल्ली स्थित लाल किले से झण्डा फ​हराते है लेकिन 15 अगस्त 1947 को ऐसा नही हुआ था। लोकसभा सचिवालय के शोध पत्र के मुताबिक 16 अगस्त 1947 को लाल ​किले से गया था। 15 अगस्त 1947 तक भारत और पाकिस्तान के बीच की सीमा का निर्धारण नही हुआ था। इसका फैसला भी 17 अगस्त 1947 ​को किया था। उस सीमा रेखा का नाम रेडक्लिफ लाइन रखा गया था जो कि भारत और पाकिस्तान की सीमाओं का निर्धारण करती है। भारत के आजाद होने के उपरांत भी इसका कोई अपना राष्ट्रगान नही था। जबकि रवीन्द्र नाथ टैगोर ने जन गण मन 1911 में ही लिख चुके थे फिर भी राष्ट्रगान जन गण मन को 1950 में बनाया गया था।

15 अगस्त को​ सिर्फ भारत का ही नही बल्कि विश्व के तीन और देशो का भी स्वतंत्रता दिवस मनाया जाता है। हांलाकि यह देश अलग—अलग वर्ष मे आजाद हुए थे।
जिसमें दक्षिण कोरिया 15 अगस्त 1945 तथा बहरीन 1971 और कांगो देश 1960 मे आजाद हुए था।
भारत का राष्ट्रीय ध्वज 22 जुलाई 1947 को स्वीकृत किया गया था। तीन रंग होने कारण इसे तिरंगा कहा जाता है। प्रत्येक रंग का एक अलग संदेश है तथा तिरंगे के बीच यानि सफेद वाली पट्टी पर बना चक्र भी एक विशेष त्याग का प्रतीक है तो 24 तीलियो वाले चक्र का मतलब निरंतर प्र​गति की और बढ़ते रहने से है जो कि सारनाथ स्थित अशोक के धर्म चक्र से लिया गया था।

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