मुर्गे ने ली कोर्ट की शरण तो बोलनी की मिली आजादी

Hen मुर्गे ने ली शरण मिली आजादी

बोलने की आजादी

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दिल्ली अप—टु—डेट
नई दिल्ली। आज मेरा सवाल है कि मुर्गा क्या करता है? जो जबाव में सभी ने यही बताया कुकडू कूं यानि की मुर्गे के बोलने की आवाज जिसे आम भाषा में बांग देना कहा जाता है। वैसे आज तक हम सभी मुर्गे की बांग देना स्वाभाविक समझते आये है। वह किसी के बिना कहे या सिखाए स्वयं बांग लगता है और यहां तक माना जाता है रीति रिवाजो के हिसाब से कि वह समय हेाते ही बांग देना शुरू कर देता है।

ग्रामीण क्षेत्र की जनता यहा तक बताती है कि मुर्गे की बांग से समय क्या हो गया है। उसका आभाष किया जाता है और तो और रामायण में भी मुर्गे की बांग का उल्लेख मिलता है। जिसे ऋषि गौतम व पत्थर की नारी बनी अहिल्या की घटना क्रम से भी जोड़ते है।

सुबह मुर्गा के बांग देने पर गंगा में स्नान करने जाते थे इसी बीच इन्द्र ने उनकी पत्नी अहिल्या के साथ छल किया जिससे रूष्ट होकर मुनि ने इंद्र को श्राप दिया और अहिल्या को पत्थर की शिला बनने का श्राप दिया परंतु इतनी बड़ी ऐतिहासिक घटना घटने के बाद मुर्गे को अपने बोलने के बाग देने के लिए कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ी।

लेकिन एक सचमुच मामला सामने आया है जिसमें मुर्गे को बांग देने के लिए कोर्ट में मुकद्मा लड़ना पड़ा। यह मामला एशिया महाद्वीप के एक प्रांत फ्रांस का है। यहा एक मौरिस नाम के मुर्गे को बांग देने के लिए बड़ी कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ी। इस मुर्गी की बांग शहरी व ग्रामीण समुदाय के बीच तनाव की वजह बन गयी। मौरिस की बांग को लेकर झगड़ा तब शुरू हुआ जब एक पड़ोसी ने उसके मालिक को सुबह होने वाले शोर की वजह से अदालत मे घसीटा।

चार साल का मौरिस फ्रांस के ओलोन में रहता है। औलोन वह जगह है जहां फ्रांस के कुछ शहरियों ने अपना दूसरा मकान खरीदना शुरू किया है। इन्हीं में से एक शहरी ज्यालुई बिहोन को मौरिस की बांग से परेशानी होने लगी जिसकी शिकायत उन्होंने मुर्गे के मालिक व मालकिन से की तथा इसके बाद साल 2017 में जब लुई ने अपने पड़ोसियों को लिखे पत्र में बताया कि यह मुर्गो मौरिस सुबह चार बजे से ही बांग देना प्रारभ कर देता है तथा दोपहर 12 बजे तक बांग देता रहता है।

जब मालिक ने उसे चुप कराने से लगातार मना किया तो मामला अदालत पहुंचा और राष्ट्रीय बहस का मुद्दा बन गया। कुछ लोगो को मौरिस से सहानूभूति होने लगी और मौरिस के बांग देने के लिए लोागो ने आॅनलाइन याचिका दायर कर दी और देखते ही देखते उसकी सपोर्ट में एक लाख 40 हजार हस्ताक्षर जुटाए गये। यहां तक फ्रांस में लोग मौरिस के फैन हो गये और तस्वीर वाली टी-शर्ट पहनना शुरू कर दी।

तस्वीर वाली टी-शर्ट बेचने वाले एक स्थानीय कारोबारी ने भी मुर्गे मौरिस के प्रति अपना दर्द बया किया और कहा कि हम चाहते है तथा हमे नाराजगी भी है कि कोई किसी मुर्गे को भी मुक्दमे में घसीट सकता है। जबकि लुई के वकील इस मुक्दमे में शांति भंग के तहत मौरिस को सजा दिलाना चाहते थे तो दूसरी तरफ अदालत ने मौरिस के पक्ष में फैसला सुनाया।

उल्टा लुई को मौरिस के मालिक को परेशान करने के लिए 1,100 डालर का जुर्माना देने को कहा तथा इस फैसले पर मौरिस की हिना ने अदालत के फैसले पर खुशी जताई तथा एक समाचार एजेंसी रायटर्स में कहा कि गांवो को वैसा ही होना चाहिए जैसा वे हमेशा से रहे है। उधर मुर्गे के बांग देने का यह फैसला फ्रांस में एक विशाल बन गया है। इसी आधार के अन्य मामलों की सुनवाई अक्टूबर में होनी है।

जिसमें बत्खो और सरसो के बहुत जोर से आवाज किये जाने की शिकायत का है। इतना ही नही फ्रांस में चर्च की घंटियो और गायों की आवाज का मसला भी कानूनी लड़ाई बन गया है। फ्रंास में ज्यादातर लोग ग्रामीण क्षेत्र में बसते जा रहे है। इसलिए जहां तक देखा जाए तो सभी को स्थानीय पंरापराओं को स्वीकार ही करना पड़ता है।

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