शून्यकाल में 162 सदस्यों को मिला बोलने का अवसर

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लोकसभा सदन में अंग्रेजी की जगह हिन्दी ​का प्रयोग शुरू

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नई दिल्ली। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की नई पहल से शून्यकाल में चुनकर आये पहली बार 162 सांसदों को प्रश्न पूछने का अवसर प्राप्त हुआ है। गुरुवार शाम को शून्यकाल में 4 घंटे 48 मिनट में 162 सदस्यों को बोलने का मिला मौका। बता दे कि गुरुवार सुबह लोक सभा के प्रश्नकाल के दौरान लिया गया अंतिम प्रश्न। सामान्य तौर पर प्रश्नकाल में आखिरी सवाल तक चर्चा नहीं हो पाती थी।
संसद के पटल पर सूचीबद्ध 20 सवालों के बाद भी मंत्री ने एक और सवाल का जवाब दिया। इस दौरान आखिरी सवाल लेते हुए स्पीकर ओम बिरला ने कहा कि मंत्री आगे से इसके लिए तैयार रहें।
लोकसभा सदन में पहली बार अंग्रेजी की जगह हिन्दी ​का प्रयोग पूरी तरह से शुरू किया गया है। लोकसभा में बिल पास करने के दौरान पहले य़स और नो का प्रयोग किया जाता था। लेकिन अब ओम बिरला ने इसको हां और न के शब्दों में बदल दिया। लोकसभा की कार्यवाही के दौरान अंग्रेजी के ‘यस’ और ‘नो’ की परंपरा पहली बार खत्म की। अब बोलते है ‘हां’ के पक्ष में इतने वोट पड़े और ‘ना’ के पक्ष में इतने, ‘हां’ की जीत हुई। लोकसभा स्पीकर बनने के पहले सप्ताह में स्पीकर ने अंग्रेजी के किसी भी शब्द का प्रयोग लोकसभा की कार्यवाही में नहीं किया। इसके साथ ही किसी भी सदस्य को बाध्य भी नहीं किया कि वो हिंदी में ही बोलें। सांसदों को पूरी स्वतंत्रता के साथ किसी भी भाषा में बोलने का मौका दिया।
लोकसभा में प्रश्नकाल की तस्वीर बदल गई है । अमूमन प्रश्नकाल के एक घंटे के टाइम में 11 बजे से 12 बजे तक 20 सवालों की सूची में से औसतन 5 से 6 सवाल ही पूरे हो पाते थे लेकिन अब हर दिन औसतन 10 सवाल तक निपटने लगे है । लोकसभा हर दिन के प्रश्नकाल के लिए 20 सवाल लॉटरी सिस्टम से तय करती है ।
इसके लिए स्पीकर ओम बिरला ने सभी सांसदो की सवाल करने के तरीके में बदलाव किया। स्पीकर ने सांसदों को सलाह दी कि अपना सवाल कम समय में सीधा रखे, पूरक प्रश्नों की संख्या में कटौती की और मंत्रियों से भी स्पीकर ने सवाल का जवाब लंबा खीचने के वजाय टू दा प्वाइंट देने को कहा। इसका सीधा असर ये हुआ कि प्रश्नकाल में ज्यादा सांसदों को सवाल पूछने का मौका मिलने लगा।
इस सत्र में लोकसभा के अब तक के इतिहास में पहली बार चुनकर आए सांसदों को सबसे ज्यादा बोलने का मौका मिला है। यही नहीं स्पीकर ने महिला सांसदों को भी लोकसभा में बोलने को प्रोत्साहन दिया और अधिकतर महिला सांसदो को किसी न किसी डिबेट या शून्य काल में मौका दिया गया है।
प्रश्नकाल के साथ ही स्पीकर शून्यकाल में ज्यादा से ज्यादा सांसदो को अपने अपने मुद्दे उठाने का मौका देने लगे है। लिहाजा कई बार अमूमन एक घंटे का शून्यकाल डेढ़ घंटे तक भी हो रहा है। सांसद खुश हैं कि आखिर उन्हें अपने मुद्दे उठाने का मौका तो मिल रहा है। बीते बुधवार को ही स्पीकर ने 84 सांसदो को जीरो आवर में बोलने का मौका दिया जो लोकसभा के इतिहास में अभी तक सबसे ज्यादा है।
लोकसभा स्पीकर ने सदन के भीतर हंगामा करने वालों पर सख्ती दिखाई है। सदन के भीतर पोस्टर, बैनर दिखाने पर रोक लगा दी है। किसी भी सांसद को बैठे-बैठे दूसरे सांसद या मंत्री पर टिप्पणी करने पर सख्त मनाई है। स्पीकर सत्ता पक्ष समेत विपक्ष के कई सांसदो को बैठे-बैठे बोलने के चलते कई बार वार्निंग दे चुके हैं। लिहाजा अब लोकसभा में शोर-शराबा कम हुआ है।

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