भारत की अर्थव्यवस्था में सीपीडब्ल्यूडी की अ​हम भूमिका

Central public works department

50 खरब डालर की अर्थव्यवस्था

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नई दिल्ली। केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (सीपीडब्ल्यूडी) के महानिदेशक प्रभाकर सिंह ने निर्माण कार्यों में नवाचार, विशेष वास्तुशिल्प, ऊर्जा कुशल और स्थानीय संसाधनों के इस्तेमाल बल पर देते हुए आज कहा कि भारत की 50 खरब डालर की अर्थव्यवस्था में सीपीडब्ल्यूडी की मुख्य भूमिका होगी।

सिंह ने यहां राष्ट्रीय सम्मेलन ‘लोक वास्तुकला के उभरते चलन’ के बाद संवाददाता सम्मेलन में कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था बहुत तेजी से आगे बढ़ रही है और इसमें निर्माण क्षेत्र की महती भूमिका होगी। सीपीडब्ल्यूडी सरकारी विभाग होने के इस प्रक्रिया में पूरी तरह से शामिल होगा और केंद्रीय भूमिका निभायेगा।

उन्होेेंने जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और अन्य दुर्गम क्षेत्रों में निर्माण का उल्लेख करते हुए कहा कि सीपीडब्ल्यूडी से लगभग 25 हजार कर्मचारी जुड़े हैं और देश के प्रत्येक हिस्से में विभाग की मौजूदगी है। सबसे कठिन इलाकों में निर्माण कार्य के लिए सीपीडब्ल्यूडी काे आमंत्रित किया जाता है।

उन्होंने कहा कि सीपीडब्ल्यूडी अपनी निर्माण प्रक्रिया में नवाचार पर जोर दे रहा है। निर्माण कार्य में नवाचार किये जा रहे हैं जिससे भवन ऊर्जा कुशल बन रहे हैं। निर्माण कार्यों के लिए स्थानीय संसाधनों का इस्तेमाल किया जा रहा है और मिट्टी की ईंटों का इस्तेमाल पूरी तरह से बंद कर दिया गया है। निर्माण कार्य में मलबे और अन्य संबंधित वस्तुओं का इस्तेमाल हो रहा है।

सिंह ने कहा कि सीपीडब्ल्यूडी के अधिकतर ग्राहक विशेष वास्तुशिल्प की मांग करते हैं। इसी काे ध्यान में रखकर सीपीडब्ल्यूडी ने एक अलग शाखा स्थापित की है और इसमें लगातार नवाचार किया जा रहा है। सीपीडब्ल्यूडी ने देश के अलग अलग हिस्सों में ऐसे भवनों का निर्माण किया है जो अपने आप में अनूठे हैं।

उन्होंने कहा कि सीपीडब्ल्यूडी कौशल विकास पर खास ध्यान दे रहा है। जो मजदूर सीपीडब्ल्यूडी के निर्माण कार्य से जुुड़ते हैं, उन्हें प्रशिक्षण दिया जाता है और प्रमाण पत्र भी जारी किया जाता है। इससे उन्हें देश और विदेश में काम मिलने में आसानी होती है।

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