विक्रम और प्रज्ञान के साथ मिशन पर जाने को तैयार चंद्रयान—2

चंद्रयान—2 बाहुबली रॉकेट' विक्रम साराभाई

मिशन चंद्रयान—2

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नई दिल्‍ली। चंद्रयान-2 के शोध के लिए भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन आज प्रक्षेपण जा रहा है। चंद्रयान-2 की इस लॉन्चिंग के साथ ही भारत अंतरिक्ष क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां प्राप्त करने वाला है। चंद्रयान-2 अंतरिक्ष यान को ‘बाहुबली रॉकेट’ कहे जाने वाले जीएसएलवी मार्क 3/एम1 रॉकेट से दोपहर 2:43 बजे लॉन्‍च किया जाएगा। चंद्रयान-2 के साथ विक्रम और प्रज्ञान भी चांद पर जा रहे हैं जबकि विक्रम एक लैंडर और प्रज्ञान रोवर भी चांद पर जा रहे है।
भारत की ओर से चंद्रयान-2 का कुल वजन 3.8 टन (3,850 किलोग्राम) है। इनका नाम चंद्रयान-2 ऑर्बिटर, विक्रम लैंडर और प्रज्ञान रोवर है। चंद्रयान-2 को इसरो 22 जुलाई यानि आज लॉन्‍च करने जा रहा है। लेकिन चांद की सतह पर लैंडर विक्रम 7 सितंबर, 2019 को लैंड करेगा।
चंद्रयान-2 मिशन के तहत चांद की सतह पर लैंडर विक्रम और रोवर प्रज्ञान उतरेंगे। लैंडर विक्रम का वजन 1,471 किलोग्राम है। इसका नामकरण भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के जनक वैज्ञानिक डॉ. विक्रम साराभाई के नाम पर हुआ है। इसे 650 वॉट की ऊर्जा से ताकत मिलेगी। यह 2.5421.2 मीटर लंबा है। चांद पर उतरने के दौरान यह चांद के 1 दिन तक लगातार काम करेगा। चांद का 1 दिन पृथ्‍वी के 14 दिनों के बराबर होता है। यह चांद के दो बड़े गड्ढों मैजिनस सी और सिंपेलियस एन के बीच उतरेगा।
आपको बता दे कि लैंडर विक्रम के साथ तीन अहम इंस्‍ट्रूमेंट चांद पर शोध के लिए भेजे जा रहे हैं। चांद पर होने वाली भूकंपीय गतिविधियों को मापने और उसपर शोध करने के लिए एक खास इंस्‍ट्रूमेंट लगाया गया है। इसके अलावा चांद पर बदलने वाले तापमान की बारीक जांच करने के लिए भी खास उपकरण भी उपलब्ध किए गए है। इसमें तीसरा उपकरण है लैंगमूर प्रोब। यह चांद के वातावरण की ऊपरी परत और चांद की सतह पर शोध करेगा। विक्रम अपने चौथे उपकरण लेजर रेट्रोरिफ्लेक्‍टर के जरिये वहां मैपिंग और दूरी संबंधी शोध करेगा।

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