पीएम मोदी ने किया चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ का जिक्र— क्या है ?

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15 अगस्त, 2019 को जब प्रधानमंत्री मोदी ने लाल किले से 92 मिनट लंबा अपना भाषण दिया, तो उसमें सेना के लिए एक और पोस्ट चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ का जिक्र किया।
इस जिक्र के बाद ही चर्चा होने लगी कि क्या प्रधानमंत्री मोदी राष्ट्रपति के हाथ में निहित सेना की शक्ति को कमजोर करने वाले हैं। लेकिन ऐसा नहीं है. चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ की मांग देश में करीब 20 साल पुरानी है।


देश की रक्षा के लिए सरहदों पर तैनात देश की तीन सेनाएं,आर्मी, नेवी और एयरफोर्स।

तीनों सेनाओं का होता है एक-एक मुखिया। थल सेना के लिए थल सेनाध्यक्ष, नेवी के लिए नौसेना अध्यक्ष और एयरफोर्स के लिए वायुसेना अध्यक्ष। और इन तीनों के ऊपर एक और शक्ति होती है, जो सबको नियंत्रित करती है, वो शक्ति होती है देश के राष्ट्रपति के पास। देश की तीनों सेनाओं के मुखिया होते हैं देश के राष्ट्रपति।

15 अगस्त, 2019 को जब प्रधानमंत्री मोदी ने लाल किले से 92 मिनट लंबा अपना भाषण दिया, तो उसमें सेना के लिए एक और पोस्ट चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ का जिक्र किया।
इस जिक्र के बाद ही चर्चा होने लगी कि क्या प्रधानमंत्री मोदी राष्ट्रपति के हाथ में निहित सेना की शक्ति को कमजोर करने वाले हैं। लेकिन ऐसा नहीं है. चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ की मांग देश में करीब 20 साल पुरानी है।


यहां हम आपको बता दे कि 1999 में जब कारगिल की लड़ाई हुई थी जिसमे पाकिस्तान को मुंह की खानी पड़ी थी। लगभग 65 दिनों तक चली इस जंग में भारत का भी काफी नुकसान हुआ था।
2001 में कारगिल की लड़ाई की समीक्षा हेतू तत्कालीन उपप्रधानमंत्री और गृहमंत्री लाल कृष्ण आडवाणी की अध्यक्षता में मंत्रियों का एक समूह गठित किया गया। जिसकी समीक्षा मे पाया गया था कि लड़ाई के दौरान तीनों सेनाओं के बीच तालमेल की कमी थी। जिसके चलते ही लड़ाई में भारत को इतना नुकसान हुआ था । अगर तीनों सेनाएं वक्त पर एक दूसरे के साथ आ गई होतीं, तो देश को इतना नुकसान नहीं उठाना पड़ता। और इसी के मददेनजर देखते हुए मंत्रियों के समूह ने चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ बनाने का सुझाव दिया। किन्तु सेना के अधिकारियों ने ही इस पर आपत्ति जता दी।

फिर 2012 में नरेश चंद्र टास्क फोर्स बनी जिसने चीफ्स ऑफ स्टाफ कमेटी बनाने का सुझाव दिया गया। इस स्टाफ कमेटी में थल सेना, जल सेना और वायु सेना के मुखिया शामिल होते हैं. इन तीनों में जो भी सीनियर होता है, उसे चीफ ऑफ स्टाफ कमेटी का चेयरमैन बनाया जाता है। फिलहाल एयर चीफ मार्शल बीएस धनोआ चीफ ऑफ स्टाफ कमेटी के चेयमैन हैं। लेकिन चीफ्स ऑफ स्टाफ कमेटी के पास कोई पावर नहीं होती है। और इसीलिए अब पोस्ट को स्थाई करने और उन्हें पावर देने की बात की जा रही है। और इसी का जिक्र 15 अगस्त, 2019 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने भाषण में किया है।

चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ का काम क्या होगा?
चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ केंद्र सरकार को सुझाव देगा। चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ तीनों सेनाओं के मुखिया से विचार—विर्मश कर प्रधानमंत्री को सलाह देगा। कुल मिलाकर ये चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ राष्ट्रपति के नीचे रहकर तीनों सेनाओं का संचालन कर सकेगा।
पूर्व थल सेनाध्यक्ष जनरल एनसी विज ने भी साल 2016 में कहा था कि एक ऐसी पोस्ट होनी चाहिए, जो राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर तीनों सेनाओं की बात को सरकार तक पहुंचा सके।

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