कोरोना वायरस: ‘पूरा देश 21 दिन के लिए लॉकडाउन’

नहीं संभले तो स्थिति बहुत विकट हो जाएगी। इन 21 दिनों के लिए भूल जाइये कि घर से बाहर जाना है।

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नई दिल्ली। महामारी बना कोरोना वायरस जिसने पूरे विश्व की नींदे तक उड़ा ​दी है। इतना ही नही जिन देशों की आर्थिक स्थिति बेहतर है उन देशों को भी कोरोना वायरस ने अपनी गिरफ्त में ले लिया है। हालांकि पूरा विश्व इस वायरस पर काबू पाने की को​शिश कर रहा है। भारत में कोरोना वायरस की जंग पूरे जूनून के साथ लड़ रहा है। वही प्रधानमंत्री मोदी पूरे देश में कोरोना वायरस से एहतियात बरतते हुए लॉकडाउन की घोषणा कर दी है।

संबोधन में पीएम मोदी ने कहा कि मैं आज एक बार फिर से कोरोना वैश्विक महामारी पर बात करने के लिए आपके बीच आया हूं। 22 मार्च को जनता कर्फ्यू का जो संकल्प हमने लिया था उसकी सिद्धि के लिए हर भारतवासी ने पूरी जिम्मेदारी के साथ अपना योगदान दिया। एक दिन के जनता कर्फ़्यू से भारत ने दिखा दिया कि जब देश पर संकट आता है, जब मानवता पर संकट आता है तो किस प्रकार से हम सभी भारतीय मिलकर, एकजुट होकर उसका मुकाबला करते हैं।

बता दे कि प्रधानमंत्री मोदी ने 24 मार्च को पूरे देश को संबोधित किया और अपने संबोधन में कोरोना वायरस से बचाव करने को कहा है। साथ ही पीएम मोदी ने कहा कि लॉ​कडाउन एक तरह से कर्फ्यू ही है। यह जनता कर्फ्यू से थोड़ा ज्यादा और सख्त है। कोरोना से लड़ने के लिए उठाया गया यह कदम बहुत आवश्यक है। आपके जीवन को बचाना, आपके परिवार को बचाना मेरी, भारत सरकार की देश की हर राज्य सरकार की, हर स्थानीय निकाय की सबसे बड़ी प्राथमिकता है। साथ ही प्रधानमंत्री मोदी लॉकडाउन को 21 दिनों तक के लिए बढ़ा दिया है।

आप कोरोना वैश्विक महामारी पर पूरी दुनिया की स्थिति को समाचारों के माध्यम से सुन भी रहे हैं और देख भी रहे हैं। आप ये भी देख रहे हैं कि दुनिया के समर्थ से समर्थ देशों को भी कैसे इस महामारी ने बिल्कुल बेबस कर दिया हैं कुछ लोग इस गलतफहमी में हैं कि सोशल डिस्टेंसिंग केवल बीमार लोगों के लिए आवश्यक हैं ये सोचना सही नहीं, सोशल डिस्टेंसिंग हर नागरिक के लिए है, हर परिवार के लिए है, परिवार के हर सदस्य के लिए है। पिछले दो दिनों से देश के अनेक भागों में लॉकडाउन कर दिया गया है। सभी को राज्य सरकार के इन प्रयासों को गंभीरता से लेना चाहिए। सोशल डिस्टेंसिंग पूरे देश के लिए जरूरी है। कुछ लोगों की लापरवाही आपके देश और समाज को बहुत बड़ी मुश्किल में झोंक देगी।

कोरोना से संक्रमित व्यक्ति पूरी तरह से स्वस्थ लगता है। इसलिए एहतियात बरतना है। अपने घरों में रहें, जो लोग घरों में है, वो लोग सोशल मीडिया पर इनोवेटिव तरीके से इस बात को बता रहे हैं। एक बैनर मुझे भी पसंद आया है, इसमें लिखा है कोरोना यानि कोई रोड पर ना निकले।

पीएम मोदी ने कहा, ‘ऐसे समय में जाने अनजाने कई बार अफवाह भी खूब उड़ती है। आपके द्वारा सरकार के निर्देशों का पालन करना बहुत जरूरी है। इस बीमारी के लक्षणों के दौरान बिना डॉक्टरों की सलाह के कोई दवा ना लें। हर भारतीय संकट की इस घड़ी में सरकार के स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करेगा। 21 दिन का लॉकडाउन लंबा समय है, लेकिन आपके जीवन की रक्षा के लिए आपके परिवार की रक्षा के लिए एक ही उपाय है। मुझे विश्वास हर भारतवासी इस संकट की घड़ी में विजय होकर निकलेगा। आप अपना ध्यान रखिए, अपने अपनों का ध्यान रखिए। आत्मविश्वास के साथ संयम बरतते हुए हम सब इन बंधनों को स्वीकर करें।’

पीएम मोदी ने कहा कि ‘इस वैश्विक महामारी को मिटाने के लिए भारत सरकार लगातार बड़े फैसले ले रही है। देश के हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्टर को मजबूत बनाने के लिए केंद्र सरकार ने 15 हजार करोड़ के बजट का ऐलान किया है। देश का प्राइवेट सेक्टर भी इस घड़ी में देशवासियों के साथ खड़ा है। प्राइवेट लैब और अस्पताल सरकार के साथ काम करने के लिए आगे आ रहे हैं।

आपको याद रखना है जान है तो जहान है, ये धैर्य और संकल्प की घड़ी है। जब तक देश में लॉकडाउन की स्थिति है। हमें अपना वचन निभाना है। मेरी आपसे हाथ जोड़कर प्रार्थना है, आप उन लोगों के लिए प्रार्थना जो अपना जीवन खतरे में डालकर काम कर रहे हैं। डॉक्टर, नर्सेज, पैथोलॉजिस्ट दिन रात अस्पताल में काम कर रहे हैं। अस्पताल कर्मी, वार्ड ब्वायज, सफाईकर्मचारी, एंबुलेंस चलाने वाले आप उन लोगों के लिए प्रार्थना करें जो आपके सार्वजनिक स्थानों को सेनिटाइज करने के काम में जुटे हैं।

इटली और अमेरिका जैसे स्वास्थ्य संसाधन पूरी दुनिया में बेहतरीन है बावजूद इसके यह देश कोरोना का प्रभाव कम नहीं कर पाए। सवाल ये कि इस स्थिति में उम्मीद की किरण कहां है? विकल्प क्या है? यहां उम्मीद की किरण सिर्फ यह है कि उन देशों के नागरिक घरों से बाहर नहीं निकले। उन देशों ने सरकारी निर्देशों का पालन किया और वो देश अब इस महामारी से बाहर आने की ओर बढ़ रहे हैं।

ये मेरी प्रार्थना। आपको ये याद रखना है कि घर से बाहर पड़ने वाला आपका सिर्फ एक कदम कोरोना जैसी गंभीर बीमारी को आपके घर में ला सकता है। कोरोना महामारी के जानकारों का मानना है कि इस लड़ाई के लिए कम से कम 21 दिन का समय लगता है। अगर ये 21 दिन नहीं संभले तो स्थिति बहुत विकट हो जाएगी। इन 21 दिनों के लिए भूल जाइये कि घर से बाहर जाना है।

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