खुफिया एजेंसी के शिकंजे में भारतीय रेलवे के कर्मचारी

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नई दिल्ली। वैश्विक महामारी कोरोना वायरस से विश्व के सभी देश जूझ रहे है और लोगो में इस महामारी कोरोना वायरस को लेकर डर भी देखा गया है। लेकिन आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने वाले ये पाकिस्तानी आतंकी अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा है। इसका ताजा उदाहरण ये है कि पाकिस्तानी जासूसों के जरिए खुफिया एजेंसी ISI भारतीय सेना के मूवमेंट की जानकारी प्राप्त करने की कोशिशों में लगी हुई है।

बता दे कि पाकिस्तानी जासूसों के मामले में जांच एजेंसियों के रडार पर भारतीय रेलवे के कुछ कर्मचारी भी लपेटे में आ गए हैं, जिनसे जल्द ही स्पेशल सेल और मिलिट्री इंटेलीजेंस भी पूछताछ कर सकती है। जांच एजेंसियां पता लगाना चाहती हैं कि रेलवे के इन कर्मचारियों से क्या जानकारी या डॉक्यूमेंटस लिए गए थे और कब इनकी मुलाकात पाकिस्तानी जासूसों से हुई थी।

आशंका है कि रेलवे के ये कर्मचारी मूवमेंट डिपार्टमेंट से जुड़े हो सकते हैं। ये डिपार्टमेंट सेना की यूनिट को ट्रेन से एक जगह से दूसरी जगह भेजने का काम करता है। स्पेशल सेल ने इन जासूसों के मोबाइल फोन डाटा की जांच कर ली है और इनकी मूवमेंट देश में कहां-कहां हुई ये भी पता लगा लिया गया है। स्पेशल सेल को लगता है कि पाकिस्तान हाईकमीशन में कुछ ओर लोग भी जासूसी के काम मे जुड़े हुए होंगे, जो डिप्लोमेट इम्यूनिटी का फायदा उठाकर आईएसआई के लिए काम कर रहे हैं।

बता दें कि मिलिट्री इंटेलीजेंस, दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल और IB ने रविवार को दिल्ली के करोलबाग से जिन पाकिस्तानी हाई कमीशन के दो अधिकारी और एक ड्राइवर को पकड़ा था, दरअसल वो पाकिस्तान आर्मी से जुड़े थे। ये लोग पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई (ISI) के एक सीक्रेट प्लान के तहत 2013 से दिल्ली स्थित पाकिस्तानी हाई कमीशन में बतौर वीजा सेक्शन में काम करने लगे और एक पेशे से पाकिस्तानी हाई कमीशन का ड्राइवर बन गया।पाकिस्तान महामारी कोरोना वायरस से लड़ने की जगह आतंकी साजिश रचने में जुटा हुआ है।

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