अब भारत में तीन तलाक होगा अपराध

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दिल्ली। तीन तलाक से संबंधित मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) विधेयक 2019 पर संसद की मुहर लग गयी। राज्यसभा में इस विधेयक को आज मतविभाजन से पारित कर दिया गया जबकि लोकसभा इसे पहले ही पारित कर चुकी है।

विधेयक पारित कराने की प्रक्रिया के दौरान विपक्ष के नेता गुलाम नवी आजाद ने कहा कि तीन तलाक को आपराधिक मामला न बनाकर सिविल मामला बनाया जाना चाहिए था और विधेयक को प्रवर समिति में भेजा जाना चाहिए था जिसके कारण विपक्ष ने इस पर मतविभाजन की मांग की । विधेयक को 81 मुकाबने 99 मतों से पारित कर दिया गया।

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के इलामारम करीम तथा कई अन्य सदस्यों के विधेयक को प्रवर समिति में भेजने के प्रस्ताव को 84 के मुकाबले 100 वोट से अस्वीकार कर दिया गया । इससे पहले भाकपा के विनय विश्वम तथा तीन अन्य सदस्यों के मुस्लिम महिला (विवाहअधिकार संरक्षण) द्वितीय अध्यादेश को नामंजूर करने के प्रस्ताव को ध्वनिमत से अस्वीकार कर दिया गया। विधेयक पर लाये गये संशोधनों के प्रस्तावों को भी ध्वनिमत से अस्वीकार कर दिया गया।


भारत से पहले दुनिया के 22 ऐसे देश हैं जहां ट्रिपल तलाक पूर्णतः प्रतिबंधित है। पाकिस्तान, बांग्लादेश, सीरिया सहित कई मुस्लिम देश भी हैं
मिस्र दुनिया का पहला ऐसा देश है जहां तीन तलाक को पहली बार बैन किया गया था।
बांग्लादेश ने भी संविधान में संशोधन कर तीन तलाक को बैन कर दिया था।
साइप्रस, जॉर्डन, अल्जीरिया, इरान, ब्रुनेई, मोरक्को, कतर और यूएई में भी तीन तलाक पर बैन है।

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