सरकारे भ्रष्ट या सरकारी तंत्र? सभी विभागो में बड़ी कुव्यवस्थाएं

व्यवस्थाएं लचर भ्रष्टाचार सरकारी कर्मचारी

विभागो में बड़ी कुव्यवस्थाएं

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दिल्ली अप-टु-डेट
स्वतंत्रता के 72वर्ष बीत जाने के बाद भी देश के सभी सरकारी विभागो में व्यवस्थाएं लचर है। भ्रष्टाचार हावी है और कोई अधिकारी कर्मचारी काम करना नही चहा रहा है। वह तो सिर्फ ऐसे आराम फरमाना चाहते रहते है। यह हालात है इसके पीछे का मुख्य कारण घूस है। देश के अंदर आज भी जो काम न हो वह घूस देकर कराया जा सकता है। चाहे वह नौकरी प्राप्त करना हो अथवा उच्च पद पाना हो सारे काम घूस के बलबूते पर चल रहे है।

क्योंकि देश में राजनेताओं की खूब चलती है और वह रूपये लेकर अधिकारी को डरा धमका कर सारे काम करा देते है और गरीब जनता की तो बात छोड़िए नौकरी तो उसे मिलती है जिसका कोई सगा सम्बंधी पद पर विराजमान है। क्योकि भाई-भतीजा बाद परिवार बाद और सगा-संबंधी बाद आज अधिक हावी है।

गरीब-गरीब बनता जा रहा है और अमीर अमीर बनता जा रहा है। क्योकि हालात ऐसे है कि सिर्फ नौकरी उसी को मिल पा रही है जिसका मामला सेटल है। शायद इसलिए ही भ्रष्टाचार चर्म सीमा पर है। क्योंकि ज्ञान तो है नही और बिना ज्ञान और अनुभव के पैसे से नौकरी मिल गयी तो यह पहले से नकारा थे काम से जी चुराने वाले पढ़ाई से जी चुराने वाले नौकरी प्राप्त कर उससे भी जी चुराते है और नौकरी तो मिल गयी तनख्वाह भी ले रहे है। लेकिन ड्यूटी करने नही जाते है। उस के लिए भी इन्हें नकारो ने नौकर लगा लिए है।

जो गरीब है और नौकरी नही मिल पायी है। गरीबी के चलते यह उनके बदले में दो चार हजार रूपयें लेकर ड्यूटी पर जाकर काम करते है और अपनी जीविका चलाते है। शिक्षा विभाग से लेकर लगभग सभी विभागों में यह हालात है। पूरे भारत के कई प्रदेश ऐसे अनेको मामलें सामनें आयें है। उत्तर प्रदेश के अंदर कोई भी सरकारी कर्मचारी चाहे वह किसी भी विभाग का हो काम करना नही चाहता है। सिर्फ पुलिस को छोड़कर क्योंकि पुलिस तो 60 प्रतिशत अपना काम स्वयं करती है।

लेकिन इनके केसो की विवेचना का पूरा घटनाक्रम भी किराये के मुंशी आकर लिखते है। वही शिक्षा विभाग में अध्यापको के बदलें उनके परिवार के सदस्य या नौकर पढ़ाने जाते है तो सरकारी स्वाथ्य केन्द्रो अस्पतालों में भी यही हालात है। डाॅक्टर साहब सरकारी इलाज तो कम करते है लेनिक प्राइवेट क्लीनिक पर ज्यादा बैठते है। इधर नौकरी की तनख्वाह तो उधर प्राइवेट क्लीनिक से महीनें में 3-4 लाख रूपयें कमा लेते है तो वही सफाई कर्मचारी भी खुद गांवो के अंदर सफाई करने नही जाते है। बल्कि उनके बदलने में उनके नौकर सफाई करने जाते है।

यह तो उत्तर प्रदेश था अब बात हम बिहार की करते है। जहां बिहार सरकार ने रिश्वत के आरोप में एक मुश्त 45 पुलिस कर्मचारियों को निलंबित किया है। इसी प्रकार का एक मामला अभी जल्द ही नागालैण्ड में पकड़ा गया। म्यामार के साथ लगते किफिरे जिले में विभिन्न सरकारी स्कूलो के निरीक्षण के दौरान 16 नियमित अध्यापको के स्थान पर उनके द्वारा पढ़ाने के लिए कम वेतन पर रखे हुए 16 प्राक्सी अध्यापक पकड़े गये। इसके बाद अध्यापको को पकड़ने के लिए एक अभियान शुरू किया गया है।

इसके बाद निर्देशालय ने सबसे पहले स्कूलों मे हाजिर होने का आदेश दिया है कि वे सभी शिक्षक अपने तैनाती वाले स्कूलों में पहुंच कर प्रत्येक दिन विद्यालय की इमारत के सामने दो फोटो खीच कर विभाग को ई-मेल करे। इस आदेश का पालन उन्हें शिक्षा सत्र की समाप्ति तक करना होगा। यह सिलसिला पूरे देश के लगभग सभी राज्यों में चलता रहता है। कुछ ही मामलें है जो दिए गये है। ऐसी घटनाक्रम प्रत्येक दिन हो रहे है।

सरकारों के साथ साथ सरकारी तंत्र भी भ्रष्टाचारी में बराबरी का हिस्सेदार है। यह कहना गलत नही हो सकता है क्योंकि अगर सरकारी तंत्र के सभी अधिकारी महज 72 घण्टे ईमानदारी से काम कर लें तो देश की जेलो में भ्रष्टाचारियों और राजनेताओं के साथ ऐसे-ऐसे चेहरे भरे जायेंगी कि उनमें पैर रखने की जगह तक नही रहेगी।

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