कोरोना के साथ-साथ डीजल और पेट्रोल के दामों ने बढ़ाई जनता की मुश्किलें

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नई दिल्ली। देशवासियों को नियमित रूप से पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों के चलते काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। जैसा कि हम सभी जानते हैं कि मौजूदा कोरोना वायरस के प्रकोप के कारण लोग पहले से ही वित्तीय संकट का सामना कर रहे हैं और तेल की लगातार बढ़ती कीमतों ने आम लोगों की कमर तोड़ कर रख दी है। आपको यह भी बता दे कि यह पहला मौका है जब देश में डीजल का दाम पेट्रोल की कीमतों से ज्यादा हो गई है। राजधानी में डीजल पहली बार पेट्रोल से महंगा हो गया है। तेल कंपनियों ने बुधवार को लगातार 18वें दिन डीजल के दामों को महंगा रखा है। दिल्ली में डीजल 79.88 रुपए प्रति लीटर रेट पर मिल रहा है।

पेट्रोल और डीजल पर केंद्र सरकार सेंट्रल एक्साइज ड्यूटी लगाती है और राज्य सरकारें वैल्यू एडेड टैक्स यानी वैट वसूलती हैं, जिस वजह से राजधानी में डीजल के दाम पेट्रोल के दामों से भी ज्यादा हो गए है। देश की जनता तेल की लगातार बढ़ती कीमतों से काफी नाराज़ हैं, उनका मानना है कि डीजल और पेट्रोल के दाम बढ़ने से अन्य चीजें भी महंगी हो जाऐंगी। गौरतलब है कि अप्रैल 2014 में जब क्रूड ऑयल 105 डॉलर प्रति बैरल के आसपास था, तब दिल्ली में डीजल करीब 55 रुपए प्रति लीटर बिकता था। इसमें बेस प्राइस, किराया भाड़ा और डीलर कमीशन 45.5 रुपया था। इसके ऊपर 10 रुपए सरकार टैक्स के तौर पर वसूलती थी। यानी एक लीटर डीजल के लिए आप जितना पैसा देते थे, उसका 18% हिस्सा सरकार टैक्स वसूल लेती थी। आपको बता दे कि इस समय क्रूड ऑयल 42 डॉलर प्रति बैरल पर है। 16 जून के प्राइस ब्रेकअप के मुताबिक, डीजल 75 रुपए पर है। इसमें बेस प्राइस, किराया भाड़ा और डीलर कमीशन 25.76 रुपया है। इसके ऊपर 50 रुपए सरकार टैक्स के तौर पर वसूल रही है। यानी एक लीटर डीजल के लिए आप जितना पैसा दे रहे हैं, उसका 66% हिस्सा सरकार टैक्स वसूल ले रही है।

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