सच की मौत? व्यंग

To tease someone dear to you

झूठ का जमाना

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दिल्ली-अप-टु-डेट

वर्तमान समय में झूठ का जमाना चल रहा है। किसी कि भी झूठी तारीफ कर दो वह उसको सच समझता है और आप आज किसी भी व्यक्ति को सही बात बतायेंगे तो उसे बुरी लगती है और वह आपके ऊपर हावी हो जाता है। क्योकि सभी सच से दूरी बना रहे है। इतिहास में सभी को सच प्रिय था लेकिन आज सब विपरीत हो रहा है सभी को प्रिय है ता वह सिर्फ झूठ है। किसी अपने प्रिय को चिढ़ानें के लिए बस आप किसी व्यक्ति की झूठी तारीफ उसके सामने कर दो इतना चिढ़ जाता है कि मानों वह अब अपना आपा खोने वाला है। जबकि वह उसकी झूठी तारीफ करते रहो वह आपसे इतना ज्यादा खुश रहेगा कि आप उसे एकदम प्रधानमंत्री की मानों कुर्सी सौंप रहे है और भले ही उसकी पीट पीछे बुराई क्यों न करते हो। इस मानसिकता के लोग अधिक हो गये है। आज बहुत से चाप लूस लोगो ने अपने आप कामयाब बनाने के लिए यह फार्मूला शुरू कर दिया है। वैसे ज्यादातर महिलायें अपनी तारीफ सुनना पसंद करती है। उन्हें इस बात से कोई फर्क नही पड़ता है कि सामने वाला उनकी झूठी तारीफ कर रहा है या वास्तविक वह तो सिर्फ वाह वाही लूटने की शौकीन मात्र रह गयी है। ज्यादातर देश के अंदर क्राइम सिर्फ इसी कारण हो रहा है कि लोग झूठ बोलकर अपनी तरफ आकर्षित करते है और ऐसे पागल लोग बिना विचार किए उनके झूठे झासे में फंस जाते है। बड़ी ही आसानी से उनके मकसद को कामयाब बना देते है। इसे विश्वास घात नही कहेंगे तो यह क्या है। लेकिन वह भी करे क्या। क्योंकि सारा समाज ही इस झूठ के जमाने का आप बादशाह है। यह बात आम लोगो से लेकर आप अधिकारी, कर्मचारी सभी में देख सकते है अगर कोई सच बोलता भी है तो यह लोग उसके दुश्मन बन बैठते है। झूठ बोलकर आज आप वह सौहरत कमा सकते है। जो आप कभी भी कड़ी से कड़ी मेहनत कर हासिल नही कर सकते है। ज्यादातर राजनेताओं के वह लोग ही प्रिय होते है जो सिर्फ उनकी बैठे-बैठे तारीफ करते रहते है और उनकी आड़ मे अपनी जीविका का आसानी से संचालन करते है। जिन्हें हम शुद्ध भाषा में नेताओं का चमच्चा या दलाल कहते है। यह उन नेताओं को बड़े-बड़े सपने दिखाते है कि आप सारी फिक्र छोड़कर फ्री रहो। यह सारे काम तो हम एक मिनट में निपटा देंगे और आप चुनाव जीतने की बात कर रहे है। यह तो हमारे लिए बहुत छोटी बात है। दो रात में सारी जनता हमारे फेवर में होगी हमारी ही गुणगान करेगी। ऐसी लुभावनी स्कीमी सपने दिखाकर यह उस व्यक्ति का अस्तित्व समाप्त कर देते है तथा समाज में कुछ आज ऐसे भी ठेकेदार है। जो अधिकारियों की हाँ हजूरी का काम करते है और जब वह अधिकारी दूसरी जगह स्थानतंरित हो जाता है। फिर उसकी जगह पर आये दूसरे अधिकारी से यह सांठगांठ कर लेते है और अपना धंधा शुरू कर देेेते है। इनकी चापलूसी को जल्दी कोई नही समाप्त कर सकता है। इनका मुख्य धंधा वही होता है और इस तरह से यह अपना जीवन यापन करते रहते है। कोई जिला मुख्यालय एवं तहजीलों व जोनो में प्रदेशो के मुख्य कार्ययालयों के बाहर ऐसे व्यक्ति आपको घूमते मडरातें आसानी से मिल जायेंगे और यह लोगो को बड़े ही आसान तरीके से फंसा लेते है। क्योंकि सभी सरकारी योजनाओं का लाभ लेना बड़ा मुश्किल काम है। आप जनता के लिए क्योकि उसकी कागजी कार्यवाही इतनी लम्बी बड़ी व सख्त है। यह उस झूठे चापलूस व्यक्ति के बहकावे में आसानी से आ जाते है और वह अपना उल्लू सीधा कर लेता है। उस सच की कड़ी परीक्षा फिर भी होती थी। लेकिन इस झूठ की कोई परीक्षा ही नही है। क्योंकि इसका परिणाम ही निल है आज कचहरियो में ऐसे लाखों मुकद्में चल रहे है। जिसमें निर्दोश करीब फंसे हुए है और वर्षो से बिना किये की सजा काट रहे है और उनके पास व उनके परिवार वालों के पास धन नही है। जिसे वह अपनी जमानत करा सके। देश के अंदर करोड़ो की संख्या में मुक्द्में है। जिसमें लाखों मुक्द्में बीसों साल पुराने है और उनमें फंसे विचाराधिन कैदी बिना किये की सजा भुगत रहे है और उन अधिवक्ताओं की क्या कहे जो सिर्फ पैसे के लालच में तारीख पर तारीख लेते है और सुनवाई करवानें का नाम ही नही लेते है। उन्हें भी किसी के सुख-दुख से क्या मतलब और वह कैसे पैसे जुटा रहे है। उन्हें तो अपनी जीविका चलानी है। आज के समय में मानों सच्चाई की मृत्यु हो चुकी है। ऐसा लगता है और आगे क्या होगा इसकी कल्पना में तो यह कहना गलत नही होगा कि मनुष्य ही मनुष्य को खुले आम मारकर खाने लगेगा।

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