सांसद द्वारा किया जा रहा दान, सांसद फंड से ही क्यों?

संसाधन की कमी के चलते सरकार के इस फैसले ने देश की गरीब आबादी की मुश्किलों को बढ़ाया है।

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क्या सांसद अपनी निजी संपत्ति से कर रहे है दान?

नई दिल्ली। नोवल कोरोना वायरस के रडार में विकसित से लेकर विकासशील देश सभी आए है। प्रत्येक दिन बीतने के साथ वायरस के नए मामले और मृत्यु दर में तेजी से वृद्धि हुई है, साथ ही संक्रमण से ठीक हुए मरीजों की संख्या बेहद ही कम है जो एक चिंताजनक बात है। भारत सरकार ने वायरस के प्रसार को सीमित करने के लिए पूरे राष्ट्र में 21 दिन का लॉकडाउन लागू किया है। संसाधन की कमी के चलते सरकार के इस फैसले ने देश की गरीब आबादी की मुश्किलों को बढ़ाया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोरोना वायरस महामारी से लड़ने तथा स्वस्थ भारत के लिए नागरिकों से 28 मार्च को नागरिक सहायता और आपातकालीन राहत कोष में योगदान करने की अपील की थी, जिसके बाद से ही विभिन्न पृष्ठभूमि के लोगों ने डोनेशन करके अपना समर्थन दिखाया। पिछले कुछ दिनों से खबरें आ रही हैं कि सांसदों ने पीएम राहत कोष में सरकार द्वारा ही दिए हुए कल्याणकारी परियोजनाओं में से 1 करोड़ का दान दिया। आपको बता दे कि लोकसभा या निचले सदन में कुल 545 सदस्य होते है जिन्हे अपने निर्वाचन क्षेत्र में काम करने के लिए प्रतिवर्ष 5 करोड़ की राशि दी जाती है।

भारत में कई अमीर राजनीतिक नेता हैं जो चुनावों को जीतने के लिए मतदाताओं को पैसा और शराब देते है लेकिन कोरोना वायरस जैसी आपदा में कोई भी राजनेता सामने नहीं आया है। सांसद ने पीएम राहत कोष में जो एक करोड़ रुपये दिए है वह जनता का ही पैसा है जो जनता के कल्याण पर ही लगा है, इसलिए इसे दान का नाम नहीं दिया जा सकता क्योकि जनता का कल्याण ही सांसदों का मूल कर्तव्य होता है। उम्मीद करते है कि राजनीतिक नेता और सांसद वास्तविक रूप से देश में आई कोरोना जैसी आपदा में अपना योगदान करेंगे। गौरतलब है कि पीएम राहत फंड में जो पैसा इकट्ठा होगा वह देश की चिकित्सा प्रणाली को उन्नत और सुधार लाने पर लगेगा।

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