मोदी की लोकप्रियता या डूबते जहाज को छोड़ तैरते पर सवारी?

BJP मोदी की लोकप्रियता आम आदमी बागियों

मोदी की लोकप्रियता या डूबते जहाज

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दिल्ली अप टु डेट
नई दिल्ली। वर्ष 2014 में हुए लोकसभा चुनाव जीतने के बाद बीजेपी की लोकप्रियता बढ रही है या राजनेता अपने डूबते जहाज को छोड़ बीजेपी रूपी चलते जहाज पर सवार हो रहे है। जैसें पुरानी कहावत है चौके पर चौका इस में आशय है कि जब अपने घर में खाने को न रहे, तब क्वार के महीने में नानी जी के यहा दावत खाने चले जाओ पर कह दो अभी तो कनागत चल रहे है।

ऐसे हर नेताओ का हाल है साहब जब अपनी दुकाने बंद होने की कगार पर है तो दूसरे के यहां जाकर बैठने लगे। इस समय देखा जा रहा है कि पूरे देश में बीजेपी सत्तावादी पार्टी अपने आप को मजबूत करने के लिए पूरे देश में सदस्यता अभियान चला रही है तो बड़े पैमाने पर आम जन तथा अनेक राजनैतिक दलो के नेता सदस्यता ले रहे है। एक समय वह भी था कि लोग बीजेपी के नाम को लेने से कतराते थे और आज बीजेपी का भूत देश की जनता के दिलों दीमाग पर है तो दूसरे दलो के नेता भी बीजेपी में सदस्यता बढ़ चढ़कर ले रहे है। इस कदर सदस्यता ले रहे कि मानो पीछे कोई दौड़ा आ रहा है।

इसलिए अपने आपको बचाने के लिए यह बीजेपी रूपी सुरक्षा कवच को धारण कर अपने आप को सुरक्षित रख सकते है। जहां तक देखा जाए तो अन्य पार्टियो के नेता बीजेपी की सदस्यता नही ले रहे। यह अपने आप को बचाने के लिए नया तरीका अपना रहे है। यह कहना कतई गलत नही हो सकता है लेकिन बढ़ते कुनबे को देखकर अभी तो बीजेपी खुश है लेकिन आगे आने वाले समय में इसका परिणाम भी उल्टा हो सकता है। जहां एक तरफ लोग ज्यादा को बाधा मानते है वही दूसरी तरफ बीजेपी में ज्यादा की हुंड लगी हुई है।

एक तरफ हम दो हमारे दो का नारा लगाने वाली पार्टी बीजेपी अपने आप को नही देख रही है और खुद हम एक हमारे अनेक मंत्र को जपते सत्ता पर सत्ता पाने की ललक में बढती जा रही है। इस तरह से बढ़ती बीजेपी कुनवे की जनसंख्या उसमें होने वाले विस्फोट को बढ़ावा देने का काम भी कर सकते है और उनका क्या साहब जो एक घर छोड़कर दूसरे पे सवार हुए है तो वह तीसरे पर भी सवार हो सकता है।

यह विचार योग्य है सत्ता वाली पार्टी में ज्यादातर वही लोग बैठते है जिनकी मानसिकता 24 घंटे दलाली व भ्रष्टाचार की हो गयी है। सामान्य व्यक्ति तो साहब अपने खोटे सिक्के पर ही भरोसा करती है क्योंकि वक्त पर वही काम आता है लेकिन भ्रष्ट को अपने आप को छुपाने के लिए सत्ता का सहारा जरूरी समझते है।

लेकिन फिर भी सत्ताधारी पार्टी ऐसे बेजान नेेताओ को अपने कुनबे में शामिल कर भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने का कृत्य कर रही है। यह उनके लिए एक श्राप भी बन सकते है और वरदान भी लेकिन दागी व्यक्ति कभी किसी को सफलता नही दिला सकता। यह तो सत्य है, हाल में ही दिल्ली विधानसभा का चुनाब होना है तो बीजेपी दिल्ली में कुनबा बढ़ाने में पूर्ण रूप से लगी हुई है।

लेकिन वह कुनबा बढ़ाने में इस बात की फिक्र बिल्कुल नही करती है कि वह किस तरीके के व्यक्ति को शामिल कर रही है। क्या वह सही सिद्ध हो सकता है जो अपनी बंद दुकान को चलाने के लिए तो नही बीजेपी में शामिल हो रहे है। सोच रहे हो कि केंद्र में सरकार है, साहब इज्जत तो बची रहेंगी।

लेकिन इसका परिणाम बीजेपी को दिल्ली विधानसभा चुनाव में कही उल्टा न पड़ जाय। यह भी विचार योग्य तथ्य है। क्योंकि दिल्ली के अंदर सत्ताधारी पार्टी आम आदमी बागियों को बाहर का रास्ता दिखा रही है तो बीजेपी अपने साथ लेकर चलने को तैयार है। इसका असर बीजेपी पर भारी पड़ सकता है।

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