कोरोना के चलते सरल तरीके से निकाली गई जगन्नाथ की रथ यात्रा

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पुरी। देश में कोरोना वायरस के प्रकोप के चलते जगन्नाथ पुरी में हर साल की तरह इस साल की भव्य रथा यात्रा को बहुत सरल तरीके से निकाला गया। संक्रामक वायरस को ध्यान में रखते हुए और सभी एहतियाती कदमों को लेते हुए जगन्नाथ पुरी में दोपहर 12.10 बजे पहला रथा खींचा गया। आपको बता दे कि देवी सुभद्रा का काले घोड़ों से जुता रथ तालध्वज मंदिर के सेवकों ने खींचना शुरू किया। इससे पहले सुबह भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा देवी को गर्भगृह से लाकर रथों में विराजित कर दिया गया। पुरी शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती और गजपति महाराज दिब्यसिंह देब भी पूजन करने पहुंचे। गौरतलब है कि यह भारत के सबसे पुराने ऐतिहासिक स्थानों में से एक है और लगभग 2500 वर्षों के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है जब भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा निकलते समय भक्त मौजूद नहीं थे और घरों में बैठकर दर्शन कर रहे थे।

आपको बता दे कि कोरोना वायरस के प्रकोप के चलते पुरी शहर को सील किया गया था और रथयात्रा को मंदिर के 1172 सेवक गुंडिचा मंदिर तक ले जाएंगे। 2.5 किमी की इस यात्रा के लिए मंदिर समिति को दिल्ली तक का सफर पूरा करना पड़ा क्योकि सुप्रीम कोर्ट की रोक के बाद मंदिर समिति के साथ कई संस्थाओं ने सरकार से मांग की कि रथयात्रा के लिए फिर प्रयास करें। फैसला मंदिर समिति के पक्ष में आया और पुरी शहर में उत्साह की लहर दौड़ गई। मंगलवार को रथयात्रा पूरी कर भगवान जगन्नाथ अपने भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ अपनी मौसी के घर मुख्य मंदिर से ढाई किमी दूर गुंडिचा मंदिर जाएंगे। यहां सात दिन रुकने के बाद आठवें दिन फिर मुख्य मंदिर पहुंचेंगे। कुल नौ दिन का उत्सव पुरी शहर में होता है। मंदिर समिति पहले ही तय कर चुकी थी कि पूरे उत्सव के दौरान आम लोगों को इन दोनों ही मंदिरों से दूर रखा जाएगा। पुरी में लॉकडाउन हटने के बाद भी धारा 144 लागू रहेगी।

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