पत्रकारिता इतनी आसान नहीं जितनी दिखती है

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नई दिल्ली। पत्रकारिता शब्द को सरल शब्दों में मतलब है कि समाचारों और सूचनाओं को एकत्र करना, उनका आकलन करना तथा बनाना और प्रस्तुत करना है। लेकिन प्रौद्योगिकी और विज्ञान के आगमन के साथ, अब हम एक ऑनलाइन दुनिया में रह रहे हैं, जहाँ हम अपने स्मार्टफ़ोन और कंप्यूटर में एक क्लिक करके किसी भी चीज़ की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। आपको बता दे कि जो सूचनाएं हमें ऑनलाइन मिलती हैं, वह समाचार और पत्रकारिता नहीं होती है। अधिकांश लोग यह जानकर चौंक जाएंगे कि मीडिया जगत में पत्रकारिता का हिस्सा बहुत ज्यादा नहीं है और राय, अभिकथन, विज्ञापन, प्रचार, तथा मनोरंजन पत्रकारिता में नहीं आता हैं। वास्तव में यह सत्यापन का एक अनुशासन है – जो पत्रकार न केवल तथ्यों को खोजने के लिए उपयोग करते हैं, बल्कि “तथ्यों के बारे में सच्चाई” भी बताते हैं। पत्रकारिता लोगों को सत्यापित जानकारी के जरिए मार्गदर्शन प्रदान करता है जिससे वे विभिन्न संबंधित विषयों पर बेहतर निर्णय ले सके।

पत्रकारिता किसी भी अन्य पेशे की तरह नहीं है क्योंकि इसमें इन फील्ड और इन ऑफिस दोनों जगह काम होते हैं, जिसमें किसी घटना या स्थिति में भाग लेने, रिपोर्टिंग, संपादन और लोगों को जानकारी प्रदान करना शामिल होता है और यह एक 24*7 पेशा है। पत्रकारिता का उद्देश्य नागरिकों को उनके जीवन, उनके समुदायों, उनके समाजों और उनकी सरकारों के बारे में सर्वोत्तम संभव निर्णय लेने के लिए आवश्यक जानकारी प्रदान करना है। गौरतलब है कि पत्रकारिता का मुख्य सार जनता को सच्ची जानकारी और समाचार प्रदान करना है, इस प्रकार इसमें विभिन्न कदम और चीज़े शामिल होती हैं, जिसे यह पेशा आसान और एकविध दिनचर्या वाला कार्य नहीं हैं।निम्नलिखित विभिन्न बिंदु हैं जो एक पत्रकार को लोगों को जानकारी प्रस्तुत करते समय ध्यान में रखना पड़ता है।

सत्यापन का अनुशासन

सच्चाई पत्रकारिता में सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ है जिसे एक प्रस्तुतकर्ता को अपने पाठकों और दर्शकों की सेवा करते समय हमेशा ध्यान में रखना पड़ता है। वर्तमान समय में, कुछ लोग हैं जो पत्रकारिता के इस स्तंभ को स्वयं के लाभों के लिए नज़रअंदाज़ कर देते है और किसी सूचना पर संपूर्ण प्रकाश नहीं डालते है। कभी-कभी लोग यह इंगित करते हैं कि एक समाचार या सूचना किसी विशेष चीज़ की ओर झुकी हुई है और पक्षपातपूर्ण है। आपको बता दे कि यह जाँचने के लिए कि कोई सूचना सही है या नहीं का कोई मानकीकृत कोड नहीं होता है, और प्रत्येक पत्रकार जानकारी का आकलन और परीक्षण करने के लिए कुछ विधियों का उपयोग करता है। अगर पत्रकार ही किसी जानकारी का सही ढंग से आकलन नहीं कर पाता तो वह जनता को स्पष्ट और वास्तविक जानकारी कैसे प्रदान करा पाएगा। इस पेशे में संदेह के लिए कोई जगह नहीं है और अगर कोई पत्रकार अपनी जानकारी और विश्वसनीयता पर संदेह करता है तो वह अपने आपको इस पेशे में सही नहीं ठहरा सकता।

आत्म निर्भरता और उच्च मूल्य

पत्रकार अक्सर लोकप्रिय व्यक्तित्वों और शक्तिशाली लोगों से घिरे रहते हैं और इससे प्रभावित हुए बिना अंतर्दृष्टि जानकारी लाना एक वास्तविक पत्रकारिता है। इस पेशे के लोगों को खुले दिमाग बौद्धिक जिज्ञासा के साथ अपने आपको  आर्थिक स्थिति, नस्ल, जातीयता, धर्म, लिंग या अहंकार से परे देखने पड़ता। गौरतलब है कि यदि हम वेबसाइट या समाचार पत्र में कोई संपादकीय पढ़ते हैं, आमतौर पर यह देखा जाता हैं कि संपादक किसी विशेष चीज़ पर ध्यान केंद्रित कर रहा होता है और उसके विचार एक चीज़ के पक्ष में होते है, जबकि दूसरे विचार को वह नज़रअंदाज़ कर देता है। इसका मतलब यह नहीं है कि वह पक्षपाती है या केवल एक बिंदु की ओर झुका हुआ है। जबकि तथ्य यह है कि उनकी विश्वसनीयता सटीक है, बौद्धिक निष्पक्षता और सूचित करने की क्षमता और एक निश्चित समूह या परिणाम के लिए उनका झुकाव नहीं है।

गहन शोध

पत्रकारिता कभी न खत्म होने वाला शोध कार्य है जिसमें वर्तमान स्थितियों के साथ अतीत की घटनाओं को संकलित तथा आंकलन करना और भविष्य में होने वालें अवसर को सुधारा जा सकें का निरंतर प्रयास शामिल होता है। पेशे से पत्रकार होने के बावजूद कुछ लोग अनुसंधान की अवधारणा को नजरअंदाज कर देते हैं क्योंकि वे बहुत शालीन होते हैं और किसी चीज को व्यापक तरीके से नहीं देखते हैं। 21 वीं सदी में हर व्यक्ति पत्रकारिता की गतिविधियों में छोटे या बड़े तरीके से शामिल होता है जैसें- आग लगने की घटना पर सेल-फोन से तस्वीर खींचना या समाचार और टिप्पणी के लिए एक ब्लॉग साइट बनाना — आपको बता दे कि यह केवल जानकारी हेतु होता है और पत्रकारिता के कार्य और अंतिम परिणाम के बीच अंतर होता है।

भाषा में कमांड केवल महत्वपूर्ण नहीं है

हम आम तौर पर देखते हैं कि लेख में संपादक ने जबरदस्त शब्दों, वाक्यविन्यास, विभिन्न पैराग्राफों के कनेक्शन और प्रवाह का उपयोग किया है। गौरतलब है कि लेख को प्रारूपित करने में भाषा बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है लेकिन तथ्य यह है कि हमेशा ऐसा नहीं होता है कि भाषा और लेखन का अच्छा ज्ञान रखने वाला व्यक्ति एक अच्छा पत्रकार हो।

आलोचना के लिए मंच

पत्रकारिता देश के नागरिक और सरकार के बीच एक सेतु के रूप में काम करता है। समाचार मीडिया सार्वजनिक चर्चा के सामान्य वाहक हैं और यह जिम्मेदारी विशेष विशेषाधिकारों के लिए एक आधार बनाती है जो समाचार और सूचना प्रदाता लोकतांत्रिक समाजों से प्राप्त होती हैं।

कुछ लोग पत्रकारिता के पेशे का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं

आजकल हम देखते है आमतौर पर लोग साम, दाम, दंड और भेद का इस्तमाल कर जुगाड़ नीति से कुछ अधिकार प्राप्त कर जनता और सरकार को सहयोग करने की अपेश अपने निज स्वार्थ के लिए उसका दुरुपयोग करते है और वास्तविक धरातल पर काम करने की बजाए अपने मनोभावों को खबर का रुप देकर प्रस्तुत कर देते है।

1 thought on “पत्रकारिता इतनी आसान नहीं जितनी दिखती है

  1. Sir,
    Bhot accha likha hai or true ki koi bhi jankari ki satayata ko samne lana hee main motive hota hai.
    🙏🙏👏👏👏

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