क्रिकेट में बड़ा बदलाव:नो-बॉल का फैसला फील्ड अंपायर नहीं थर्ड अंपायर देंगे

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आईसीसी ने नो बॉल टेक्नोलॉजी को दी मंजूरी

आपने क्रिकेट में नो बॉल को लेकर अंपायरों के कई फैसलों से मैच के रुख बदलते देखा होगा, एक नो बॉल पूरे मैच का रूख पलटने का दम रखती है।


आईसीसी ने इसका रास्ता ढूंढने की दिशा में कदम बढ़ा दिया है ऐसा बहुत मैचों में देखा गया है कि फील्ड अंपायर नो बॉल पकड़ने में नाकाम रहे, उस गेंद पर बल्लेबाज आउट हुए और जब रीप्ले में सच्चाई पता चली तो खूब विवाद भी हुए।

इस तकनीक का सबसे पहले प्रयोग भारत में ही होने वाला है। आपको बता दे इस तकनीक का इस्तेमाल पहले भी थोड़े समय के लिए इंग्लैंड और पाकिस्तान के बीच 2017 में हुई वनडे सीरीज में किया गया था।

मैच के बहुत ही कम हिस्से के लिए इस्तेमाल में लाई जाने वाली यह तकनीक काफी महंगी पड़ रही थी।

वास्तव मे नो बॉल टेक्नोलॉजी काफी महंगी है। एक मैच में इसके इस्तेमाल पर हजारों डॉलर का खर्चा आ सकता है, इसीलिए आईसीसी इसे लागू करने में हिचकिचा रही थी।

अब भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड यानी बीसीसीआई के आग्रह पर यह तकनीक पुन इस्तेमाल में लाई जायगी।

क्या खास है इस तकनीक में?
इस तकनीक में थर्ड अंपायर को अब कही अधिक काम करना होगा क्योकि अभी तक डीआरएस के दौरान ही थर्ड अंपायर नो बॉल पर अपना निर्णय देते थे।

लेकिन नई तकनीक बोलिंग के दौरान गेंदबाज का पैर क्रीज से बाहर निकलते ही फील्ड अंपायर के हाथ में लगा पेजर वाईब्रेशन करेगा अगर थर्ड अंपायर समय रहते फील्ड अंपायर को नो बॉल के बारे में बता नहीं पाए तो वे मैदान पर उपलब्ध दूसरे माध्यमों से नो बॉल की जानकारी देंगे।

मलिंगा की गेंद पर हुआ था विवाद।
आईपीएल 2019 के एक मैच में लसिथ मलिंगा की एक नो बॉल को अंपायर पकड़ने मे चूक गए ​थे वो मुकाबला आखिरी गेंद तक गया और बेंगलुरू को हार का सामना करना पड़ा

जिसपर बेंगलुरू के कप्तान विराट कोहली ने इस पर काफी नाराजगी जताई थी। यही से ही क्रिकेट में नो बॉल तकनीक लाने की सुगबुगाहट तेज हो गई थी।

क्यों उठी नो बॉल टेक्नोलॉजी की मांग?
हाल ही में आईपीएल के दौरान मुंबई इंडियंस और रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर के मैच में नो बॉल पर बवाल हो गया था। ये मुकाबला आखिरी गेंद तक गया था और मुंबई की जीत हुई थी।

रीप्ले में पता चला था कि मलिंगा की वो गेंद नो बॉल थी, जिसे अंपायर देखने में चूक गया। इसके बाद बीसीसीआई के सामने नो बॉल टेक्नोलॉजी की मांग उठी।

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