ऑनलाइन एंट्री पास बना हिमाचली लोगो के लिए वरदान, लेकिन प्रशासन की बढ़ी चिंता

लॉकडाउन लागू होने के कुछ दिन बाद ही संसाधनों की कमी के चलते भारी संख्या में श्रमिक और अन्य लोग पैदल ही अपने गृहनगर की ओर बढ़ना शुरू हो गए थे।

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नई दिल्ली। (संजीव ठाकुर) कोविद -19 के प्रसार को सीमित करने के लिए चल रहे लॉकडाउन ने उन लोगों को सबसे ज्यादा प्रभावित किया है जो अपने गृहनगरों से दूर दूसरे राज्यों में फंसे हुए है। गौरलतब है कि पहले लॉकडाउन लागू होने के कुछ दिन बाद ही संसाधनों की कमी के चलते भारी संख्या में श्रमिक और अन्य लोग पैदल ही अपने गृहनगर की ओर बढ़ना शुरू हो गए थे। आपको बता दे कि हिमाचल सरकार ने दूसरे राज्यों में फंसे अपने लोगों को वापिस लाने के लिए एंट्री पास की शुरूआत की जिसका नतीजा यह हुआ कि केवल दो दिन के अंदर ही भारी संख्या में लोग हिमाचल प्रदेश में वापिस आना शुरू हो गए है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि राज्य सरकार के ऑनलाइन पास के निर्णय से वह बेहद खुश है क्योंकि वे कोरोना वायरस महामारी के इस कठिन समय में अब अपने प्रियजनों के साथ है। हिमाचल सरकार राज्य की सीमाओं पर लोगों के बड़े जमावड़े के कारण चिंतित हैं। सरकार का मानना है कि अगर लोग सोशल डिस्टन्सिंग का यहां पालन नहीं करेंगे तो कोरोना वायरस के मामलें राज्य में बढ़ सकते है। सरकार क्वारंटाइन कैम्पस के आयोजन के विचार में भी हैं ताकि राज्य के बाहर से आने वाले लोगों को इन कैम्पस में कुछ दिन रोकने के बाद उन्हें घर भेजा जा सके। गौरतलब है कि राज्य में कोरोना वायरस के कुछ ही मामले सामने आए है और राज्य सरकार संक्रमण के प्रसार को नियंत्रित करने में अब तक सक्षम रही है।

सरकार ने लोगो को सभी दिशानिर्देशों का पालन करने का अनुरोध भी किया है। साथ ही सरकार बाहर से आए लोगों के मोबाइल नंबर को सर्वलांस पर लगा कर उनकी मूवमेंट पर भी नज़र रख रही है। इन सभी के बीच में इन दिनों काँगड़ा के DC राकेश कुमार प्रजापति के व्यवहार की तारीफ हर किसी से सुनने को मिल रही है कि इस मुश्किल वक़्त में वे गरीब से लेकर अमीर तक की समस्याओं का समाधान कर रहे है, तथा यह दूसरें अधिकारियों के लिए सिखने वाली बात है जो जनता से संवाद कर रहे है।

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