मन के जीते जीत।

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इस बुजुर्ग महिला ने 105 वर्ष की उम्र में कक्षा चौथी की पास

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इस बुजुर्ग महिला ने 105 वर्ष की उम्र में कक्षा चौथी की पास

दिल्ली अप-टु-डेट

इस समूचे संसार में हर व्यक्ति के अपने अपने सपने होते हैं किसी के वक्त रहते पूरे हो जाते हैं तो कुछ ऐसे भी व्यक्ति होते हैं जिनके सपने भले ही देर से पूरे होते हैं लेकिन वे इतिहास रच देते हैं। लेकिन यहां पर एक बड़ा संशय हैं। सभी कहते हैं कि सपने तो झूठे होते हैं। हां यह तो सोलह आने सच है कि सपने तो झूठे होते हैं परंतु यहां पर उन सपनों की बात नहीं की जा रही जो रात में देखे जाते हैं। वैसे ऐसा आज तक लोग कहते रहे कि जो सपने रात में देखे जाते हैं वे झूठे होते हैं और जो बात चल रही है वह रात में देखे गए सपनों की नहीं बल्कि दिन में खुली आंखों से और मन के द्वारा की गई रचना कल्पना के द्वारा रचित और उत्पन्नित भावनाओं के सपनों की चर्चा की जा रही है।

यह वह सपने हैं जो व्यक्ति देखता है और पूरी उम्र उन्हें पूरा करने के लिए लगा रहता है। इनमें से कुछ व्यक्ति ऐसे भी होते हैं जो अपने देखे गए सपने पूर्ण नहीं कर सकते। बल्कि सपनों को पूरा करने की जंग में अपने घुटने टेक देते हैं। वे लोग अपने मकसद में असफल हो जाते हैं उनमें से कुछ ऐसे भी व्यक्ति होते हैं जो हर कदम पर अपने सपनों को पूरा करने की जंग को जारी रखते हैं। परंतु कुछ असाहसी व्यक्ति जिनका काम दूसरे के कामों की अवहेलना करना रहता है। वह उसकी जंग को उसे जारी नहीं रखने देते हैं और साहस छुड़वा देते हैं। लेकिन जिन्हें सिर्फ अपने लक्ष्य के अलावा कुछ भी दिखाई नहीं देता है।

ऐसे व्यक्ति भले ही देर से सही लेकिन अपने मकसद में कामयाब हो जाते हैं। उन्हें तो सफलता जरूर ही मिलती है। इतिहास गवाह है इस बात का जब तक व्यक्ति विफल नहीं होता है तब तक उसे कभी सफल होने का मार्ग नहीं मिलता है। इतिहास में अनेकों राजा महाराजा हुए हैं। जिनके सफल होने से पहले उन्हें विफलता हासिल हुई है और उसी विफलता ने सफलता का मार्ग खोजा है। महाराणा प्रताप भी कई बार मुगलों की जंग में पराजित हुए इनके कहानी किससे आज भी समाज में एक उदाहरण के तौर पर लोगों को सुनाए जाते हैं।

कि महाराणा प्रताप गुफा में बैठे थे और उन्होंने चींटी को अपने आकार से कई गुना बड़ा अपना भोजन खींच कर ले जाते देखा चींटी अपने लक्ष्य तक पहुंचने में कई बार असफल हुई और अंत में उसने पुनः प्रयास किया और सफलता हासिल कर ली। इस सब दृश्य को देखकर ही महाराणा प्रताप ने भी मुगलों से जंग जीतने का निश्चय किया और उन पर आक्रमण कर जीत हासिल की वह उनके द्वारा भी दिन में देखे गए एक सपने की तरह ही था। मन के जीते जीत मान कर उन्होंने अपने सपने को सफल कर लिया। ठीक इसी प्रकार भागीरथी अम्मा की कहानी है जो आज किसी उदाहरण से कम नहीं है और वैसे भी किसी कार्य को करने की कोई उम्र नहीं होती जब मन तन शरीर उस काम को करने की ठान ले तो निश्चित ही पूर्ण हो जाता है।

ऐसा ही केरल से ताल्लुक रखने बाली 105 वर्ष की बुजुर्ग महिला ने कर दिखाया। माताजी को बचपन से ही पढ़ाई करने की इच्छा थी। लेकिन परिवार की स्थिति और परिस्थितियों के कारण उनकी पढ़ाई मात्र 9 वर्ष की उम्र में छूट गई। तब यह अम्मा कक्षा तीन में पढ़ती थी। उसके कुछ दिन बाद ही अम्मा के परिवार वालों ने उनकी शादी कर दी और अम्मा परिवार एवं बच्चों की जिम्मेदारियों में फस गई मौजूदा समय में अम्मा के 6 बच्चे और 16 नाती पोते हैं लेकिन अम्मा का सपना था उन्हें सपना साकार करने की ललक थी उधर वक्त ने करवट ली और राज्य में साक्षरता मिशन की शुरुआत हुई।

तब भागीरथी अम्मा पिछले वर्ष नवंबर में राज्य साक्षरता अभियान द्वारा कोल्लम में आयोजित परीक्षा में शामिल हुई और हाल ही में इस परीक्षा का रिजल्ट जारी हुआ जिसमें अम्मा ने कुल 275 अंकों में से कक्षा 4 की परीक्षा में 205 अंक हासिल कर अपनी कक्षा 4 की परीक्षा को 74.5% अंकों से उत्तीर्ण किया। इस परीक्षा में लगभग 11593 विद्यार्थियों ने कक्षा चौथी की परीक्षा में भाग लिया था जिसमें से 10012 विद्यार्थियों ने सफलता हासिल की है। आखिरकार देर से ही सही लेकिन अम्मा का सपना जो खुली आंखों से पढ़ने के लिए देखा गया था। वह तो 105 वर्ष की अवस्था में पूर्ण हुआ ! दुर्भाग्यवश देर से सही लेकिन उन्होंने सफलता हासिल की है जो सभी के लिए प्रेरणा देने वाली बात है कि उन्होंने इतनी उम्र में यह जज्बा दिखाया और पढ़ाई की शुरुआत कर सफलता हासिल की अम्मा के साथी जज्बाती कदम से निश्चित ही सभी प्रभावित होकर अपने सपनों को पूरा करने के लिए प्रयास करेंगे।

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