क्या जीवित है हिंदुत्व या सिर्फ वोट की राजनीति

क्या जीवित है हिंदुत्व

यह प्रक्रिया लगातार जारी है लोगों के दिलों से नफरत निकलना और उनके दिलों को जोड़ना सचमुच बहुत ही मुश्किल होता जा रहा है।

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हिंदुओं की सरकार में हिंदुओं की हत्याएं क्यों?

दिल्ली अप-टू-डेट ब्युरो

देशभर में विवादित बयान विध्वंस हिंदू-मुस्लिम जाति—पाति भेदभाव और काटने बांटने को लेकर पीड़ित कराहाता हुआ मानो दौर चल रहा है ऐसा महसूस किया जा रहा है। लोगों के दिलों से नफरत कि बू आनी शुरू हो गई है। अखंडता में एकता कुछ दरकती नजर आ रही है। एक तरफ किसी मामले को लेकर शांति नहीं बन पाती है तब तक नफरत का दूसरा मामला सामने आ जाता है दूसरा समाप्त हो पुनः किसी न किसी रूप में तीसरा उठता है।

यह प्रक्रिया लगातार जारी है लोगों के दिलों से नफरत निकलना और उनके दिलों को जोड़ना सचमुच बहुत ही मुश्किल होता जा रहा है। ऐसे में हमारे मुनियों महाऋषियों की शिक्षा ही मनुष्य को बचा सकती है। देश के अंदर ऐसी स्थिति कई बार आई और उन महाऋषियों की वाणी द्वारा निकले शब्दों के असर से उस स्थिति से निजात पाई गई।

भारत में एक समय अंगुलिमाल डाकू का कहर कायम था और जो व्यक्ति उस उंगली मार डाकू के इलाके से गुजरता था। वह उनकी उंगलियां काट कर माला बना लेता था। उसकी प्रतिज्ञा थी कि वह सौ लोगों की अंगुलियां काटकर माला बनाएगा। इस चर्चा के कारण लोगों ने उस इलाके से गुजरना छोड़ दिया था और जो अनजाने में अंगुलिमाल डाकू के इलाके से गुजरते थे डाकू उसकी उंगलियां काट लेता था। धीरे-धीरे उसने 99 लोगों की उंगली काट ली थी अब उसकी प्रतिज्ञा के अनुसार एक व्यक्ति बाकी रह गया था तब तक मामला कुछ और बन गया और सौ वें व्यक्ति का उसे इंतजार होता है वह सौ वें व्यक्ति गौतम बुद्ध जी डाकू अंगुलिमाल के इलाके से गुजरते हैं इनका सुंदर स्वरूप देखकर वह विचलित हो जाता है और कहता है कि तुम इस इलाके में क्यों आए हो तुम्हें पता नहीं यह डाकू अंगुलिमाल का इलाका है मैं तुम्हें मारना नहीं चाहता हूं तुम तो निहत्थे भी हो तुम्हें मारना और उंगली काटना उचित नहीं है।

इसलिए तुम यहां से वापस चले जाओ बुद्ध जी कहते हैं मेरा तो रास्ता यही है अब तुम्हें जो करना है मैं उसके लिए तैयार हूं तब बुद्ध जी कहते हैं की क्या तुम्हारी यह तलवार इस वृक्ष की टहनी को काट सकती है डाकू अंगुलिमाल कहता है काट सकती है तो उन्होंने कहा कि काट के दिखाओ और डाकू एक पल में पेड़ की टहनी काट देता है तब बुद्ध जी कहते हैं कि क्या तुम इसे पुनः जोड़ सकते हो डाकू आश्चर्य में पड़ गया और कहां नहीं मैं इसे जोड़ नहीं सकता हूँ। बुद्ध जी ने डाकू अंगुलिमाल से कहां तो तुम क्या कर सकते हो ”कुछ भी नहीं” काटने का तो काम एक बच्चा भी कर सकता है। काटना तो आसान है लेकिन जोड़ना बहुत ही मुश्किल है।

इस प्रकार बुद्ध जी की बातों का गहरा असर डाकू अंगुलिमाल पर पड़ा। उसने अपनी तलवार और सारे हथियार वहीं फेंक दिए और क्षमा मांगी ”आ भिक्षु” कहकर बुद्ध जी ने उसे दीक्षा दी! इससे यह कहना गलत नहीं ठहराया जा सकता कि हिंसा करना और कराना बहुत आसान काम है हत्या करना और हत्याएं करना भी आसान है और इन सब का लाभ उठाना सत्ता की कुर्सी पाना इस तरीके से तो अति आसान सिद्ध होता है।

लेकिन किसी को अपना बनाना बहुत ही मुश्किल है। बिछड़ने में कुछ नहीं जाता है जो व्यक्ति सृर्जन करता है। वह ही महान है जो विध्वंस करता है वह तो शैतान ही कहलाया जा सकता है लेकिन इस सत्ता की कुर्सी पर काबिज होने के लिए आज ना जाने नित्य कितने शैतान पैदा हो रहे हैं और कितने पहले से काबिज है। यह सब अपने आप कुर्सी पाने के सिवाय कुछ नहीं कर रहे हैं। ऐसा प्रतीत हो रहा है कि सिर्फ तोड़ने का काम धड़े बाजी का काम देश की राजनीति में बड़े जोर शोर से चल रहा है। यह तो अभी तक गोपनीय तरीके से होता था।

लेकिन अब खुलेआम यह शैतान बच्चों से माइक साउंड से चिल्लाकर कर रहे हैं। देश के कई हिस्सों मैं शाहीन बाग है तो कई हिस्सों में उनको भगाने वालों का आंदोलन है आखिर यह कब तक जारी रहेगा कुछ समझ में नहीं आ रहा है इस देश भारत के कई टुकड़े हो चुके हैं क्या अभी भी और कुछ बाकी है जो इस प्रकार के कृत्य किए जा रहे हैं आज देश के अंदर लगभग 70% हिंदू नेता है केंद्र में भगवा धारियों की सरकार है भगवा का कार्य हमेशा शब्दों के प्रहार से लोगों पर प्रभाव छोड़ना रहा है इतिहास उठाकर देखा जा सकता है।महाऋषियों ने हमेशा अपने प्रवचनों से अच्छे से अच्छे डाकूऔ जैसे पापी लोगों को सही शिक्षा देकर धर्म के मार्ग पर लाने का काम किया है लेकिन आज विडंबना ही कुछ और है भगवाधारियों का शासन है। फिर भी भगवाधारी सुरक्षित नहीं है उनकी लगातार हत्याएं हो रही है। विश्व हिंदू परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष की हत्या कर दी गई। उन्हें टहलते वक्त गोलियों से भून दिया गया।

हिंदू खतरे में है सोशल साइटों पर बखूबी वायरल भी हो रहा है। आज देश के अंदर जब सब कुछ तुम्हारे हाथ में है तो तुम्हारे अपनों की निर्मम हत्या क्यों हो रही है कुछ दिन पूर्व हिंदू पार्टी के नेता कमलेश तिवारी की हत्या हुई थी इससे सिद्ध होता है कि कहीं कोई आस्तीन का सांप तो नहीं बन बैठा। शब्दों के प्रहार से सीधे सच्चे मार्ग पर लाने वाले सत्ता का चाबुक लेकर भी व्यवस्थाएं सही नहीं कर पा रहे है। प्रश्न तो यहां पर यह भी खड़ा होता है ”क्या हिंदुत्व जिंदा” है या इसकी भी मृत्यु हो चुकी है। इसकी आड़ में सिर्फ वोट बैंक शासन सत्ता की राजनीति हो रही है ऐसा प्रतीत हो रहा है कि सिर्फ चिकनी चुपड़ी बातें की जा रही है शायद इसलिए ही हिंदू भगवा धारियों की सरकार में हिंदुओं की हत्याएं हो रही है।

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