कोरोना की जंग को ​​जीतने के लिए सरकार और जनता का एक होना जरुरी

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नई दिल्ली। विश्व में कोरोना वायरस महामारी से संक्रमित लोगों की संख्या आठ लाख 60 हजार हो गई है। साथ ही 42 हजार 322 लोगों की मौत हो चुकी है। डॉक्टर और वैज्ञानिक/शोधकर्ता इसे ठीक करने के लिए किसी भी वैक्सीन को विकसित करने में विफल हैं तथा वायरस से रिकवर होने वालों की संख्या (1,78,101) बेहद ही कम हैं जो दुनिया में एक चिंताजनक विषय बन गया है। यह इतिहास में पहली बार है जब विकसित देश किसी विश्व विषय में विकासशील देशों की तुलना में ज्यादा प्रभावित हुई है, लेकिन अगर हम पश्चिमी देशों की गलतियों से नहीं सीखे हैं, तो नोवल कोरोना वायरस विभिन्न आबादी वाले विकासशील देशों में फैल जाएगा।

दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत की बात करे तो देश में कोरोना संक्रमण तीसरे स्तर में है और यह स्तर बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि इसी स्तर में कोरोना बहुत सक्रिय होता है तथा तेजी से फैलता है। समस्या की गंभीरता को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूरे राष्ट्र में 21 दिनों का लॉकडाउन किया। लेकिन कुछ देशवासी देश मे चल रही कोरोना की विपदा में साथ देने के बजाए अप्रत्याशित चीजें कर रहे है। राजधानी दिल्ली के निजामुद्दीन की मरकज बिल्डिंग में इन दिनों भारत ​वायरस का केंद्र बन गया है। जानकारी के अनुसार, यहां से बुधवार सुबह तक सभी 2000 से ज्यादा जमातियों को बाहर निकाल लिया गया है। यहां से निकले लोगों की तलाश में 20 से ज्यादा राज्यों में अभियान छेड़ा गया है। इनमें से कई लोगों को ट्रेस कर लिया गया है। हैरान करने वाली बात यह है कि मरकज से गए 120 लोग कोरोना पॉजिटिव मिल चुके हैं। इनमें से 77 अकेले तमिलनाडु में हैं। 9 मरीज अंडमान-निकोबार, 4 आंध्र प्रदेश और दिल्ली में अभी तक 24 मरीज पॉजिटिव पाए गए हैं।

भारत लॉकडाउन के दूसरे सप्ताह में है और कोरोना कम होने की बजाए तेजी से फैल रहा है तथा हर दिन संक्रमण के नए मामले सामने आ रहे है। भारत सरकार ने वायरस को कम करने के लिए अब तक प्रशंसनीय कदम उठाए हैं, लेकिन क्या हम एक जिम्मेदार नागरिक की तरह लॉकडाउन में सरकार द्वारा जारी किए गए निर्देशों का ठीक ढंग से पालन कर रहे है। आपको बता दे कि यदि देश में कोरोना के केस नहीं थमे तो 21 दिन का यह लॉकडाउन बढ़ भी सकता है और कर्फ्यू भी लागू हो सकता है। हमारे विश्लेषक शिखा जैन और मोइनुद्दीन मंडल के अनुसार भारत में वायरस के बढ़ते मामलों का प्राथमिक कारण किराने की दुकानों, मेडिकल स्टोरों पर जनता का भारी जमावड़ा है। ऐसी भी खबरें आ रही है कि लॉकडाउन के पहले सप्ताह के अंत के बाद लोग लापरवाह हो गए है और बेवजह सड़कों पर घूमना शुरू हो गए है जो वायरस के संचरण को पहले से ज्यादा तेजी से फैला सकता है।

हमारे विश्लेषक के मुताबिक वायरस के प्रसार से निपटने के लिए सरकार को कुछ और कदम उठाने की जरुरत है। सरकार ने आवश्यक वस्तुओं के वितरण के लिए विक्रेताओं को पास दिए हुए है। एसडीएम एक लॉग बनाए जिसमें इन विक्रेताओं का नाम उचित रूप से हो ताकि इनको बॉडीसूट प्रदान किया जाए। जिससे किसी भी तरह के संक्रमण के प्रसार को रोका जा सके। सरकार नगरपालिका या स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को बाजारों को नियमित रूप से सेनिटाइज या पूरी तरह से बन्द करने के आदेश देने चहिए, जिस प्रकार दिल्ली नगर निगम लोगों को सड़कों पर कचरा फेंकने से रोकने के लिए कचरा वैन को सायरन के माध्यम से सूचित करते हुए वैन में कचरा डालने को कहती है, उसी प्रकार उन्हें हर क्षेत्र में आवश्यक खाद्य पदार्थों के लिए वैन चलाना चाहिए और एक समय में 5 से अधिक व्यक्ति को आवश्यक वस्तुओं को खरीदने के लिए एक स्थान पर खड़े नही होने देना चहिए।

कुछ दिन पहले आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति के चलते महानगरों से बड़ी संख्या में श्रमिक अपने गृहनगर की ओर चलने लग गए थे जिस व​जह से राज्यों की सीमाओं पर उनका भारी जमावड़ा हो गया था। गौरतलब है कि सरकार के निर्देश के बाद से यह लोग एहतियातन तौर पर खुद को 14 दिन के लिए अलग-थलग कर रहे हैं। सरकार और नगर पालिका को नियमित रूप से इन लोगों और उनके परिवारों की जांच करनी चाहिए ताकि यह पता चल सके कि इनमें से किसी को कोरोना वायरस के लक्षणों तो नहीं है। यह जनता के लिए समझना बहुत जरुरी है कि सरकार ने लॉकडाउन हमारी भलाई के लिए ही किया है और हमें सरकार द्वारा दिए गए निर्देशों का पालन अच्छे से करना ​चहिए।

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