शिक्षा बनी व्यापार

शिक्षा का मंदिर शिक्षित व्यक्ति

हर जगह शिक्षा का मंदिर

Spread the love

दिल्ली अप टु डेट
नई दिल्ली। आज हर जगह शिक्षा के मंदिर (विद्यालय) खुले हुए है। गांव—देहात क्षेत्र की तो बात थोड़ी अलग है लेकिन शहरों मे तो हर दूसरी गली में आपको एक—दो विद्यालय देखने को मिल जायेंगे लेकिन ये बात अलग है कि उनमे मिलने वाली शिक्षा का स्तर क्या है? देखकर यह लगता है कि अब सभी शिक्षित हो जायेंगे और सभी शिक्षित हो भी रहे है । इंसान पढ़—लिख तो गया लेकिन आज की शिक्षा व्यक्ति को तहजीब—संस्कार और ज्ञान नही दे पा रही है।

शिक्षा मे भी भ्रष्टाचार अपनी जड़े जमा चुका है। शिक्षा मंदिरो में शिक्षा बेची जाती है। रजनीश ओशो ने कहा था कि जो भी जरूरत से ज्यादा हो जाता है उसकी वेल्यू कम हो जाती है तथा उसका कम महत्व हो जाता है। ठीक इसी प्रकार शिक्षा के मंदिर अधिक हो गए है और शिक्षा मे ज्ञान कम देखने को मिल रहा है।

वह इसलिए कि भ्रष्टाचार बढ़ा है और ज्यादा की वेल्यू वैसे भी कम हो जाती है। जिस समय में हमने देखा था तो उस एक प्राइवेट विद्यालय में प्रवेश परीक्षा कराई जाती थी। वह भी शिक्षा छः में प्रवेश पाने के लिए लेकिन आज तो साहब आप किसी भी लेबल की शिक्षा प्राइवेट संस्थान में रूपयों के दम पर तथा पावर को इस्तेमाल कर प्रवेश ले सकते है। आज से सिर्फ 25 वर्ष पहले बहुत कम शिक्षित होने का प्रमाण पत्र लेकर घुमने वाले लोगो को अधिक देख रहे है, ज्ञान नही होता है।

पहले ज्ञानी अधिक और प्रमाण पत्र वाले कम थे यह इसलिए था क्योकि शिक्षा संस्थान कम थे और ज्ञान अधिक लेकिन अब अधिक शिक्षण संस्थान होने की वजह से भ्रष्टाचार बढ़ा है। ज्ञान की कमी हुई है हर जगह भ्रष्टाचार है शिक्षा व्यापार बन गयी है। न कि शिक्षा एक मार्गदर्शन का केंद्र आप इस तथ्य को सही मानने के लिए इस तर्क से भी परीक्षण कर देख सकते हो कि आज के समय में बच्चे को स्कूल भेजने के लिए सारे साधनों को प्रयोग में लाया जाता है और सारी सुविधाए भी उपलब्ध कराई जाती है। फिर भी बच्चे आना कानी शिक्षा प्राप्त करने के लिए जाने में करते थे।

लेकिन उस समय मे कोई साधन नही था और सभी लोग पैदल जाकर शिक्षा प्राप्त करने के लिए जाते थे और कठिन प्रवेश परीक्षाओं को उत्तीर्ण कर शिक्षा प्राप्त करते थे। लेकिन आज तो व्यापार ही शिक्षा है। रूपयों से खरीदी जाती है क्योकि अधिक शिक्षण संस्थानों ने बिजनेस बना दिया है शिक्षा पैसे खर्च करो और प्रवेश पाओ। इसलिए ही शिक्षा के ज्ञान का क्रेज खत्म और शिक्षा के प्रमाण पत्रों की संख्या अधिक मिल रही है। आज के छात्र अपने गुरूजनो का कितना सम्मान करते है।

यह किसी से छिपा नही है। क्योकि प्रत्येक दिन आम तरह – तरह की घटनाएं देख सकते है लेकिन पूर्व के शिक्षको और छात्रों के इतिहास को देखोगे या सुनोगे तो आप शिक्षा और सम्मान छात्र का गुरू के प्रति प्रेम सुनकर दंग रह जायेंगे। छात्र गुरू की परछाई को भी भगवान की तरह प्रणाम करते थे और आज के छात्र गुरूओ और शिक्षा के बारे में कहना बड़ा ही शर्मनाक है।

क्योंकि आधुनिक शिक्षण संस्था गुरू और छात्र सभी मार्डन और और एक ही साथ गाने पर थिरकते नजर आते है। एक साथ सिनेमा हाल में फिल्म देखते है और सैर करते है, सारी गरिमा का अंत हो चुका है। पैसे के लालच और धनी बनने की चेष्टा ने लोगो को इतना गिरा दिया है कि वह कुछ भी करने को तैयार है और शिक्षा का महत्व एक व्यापार बनकर रह गयी है।

क्योकि देखा जाए तो पढ़ लिखकर डिग्री प्राप्त कर डाॅक्टर, इंजीनियर तो बन जाते है लेकिन अनुभव की बड़ी कमी देखने को मिलती है और वह शिक्षा के अभाव में ही होता है और शिक्षा प्रणाली ऐसी है कि सभी को शिक्षा जो शिक्षा ग्रहण करने की क्षमता रखते है या नही। लेकिन उत्तीर्ण की डिग्री सबको दी जाती है। यही सबसे बड़ा कारण है, जो योग्य है वह भी उन्हीं के पास जो उस लायक नही है और इस प्रकार इनका बुरा प्रभाव देखने को मिल रहा है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *