भाजपा का चुनावी विजय फार्मूला क्या चौका सकता हैं?

दिल्ली विधानसभा चुनाव

वह भी अपनी पूरी तैयारी में लगी हुई है।

Spread the love

दिल्ली अप-टु-डेट

दिल्ली विधानसभा चुनाव की निश्चित तारीख ज्यों ही करीब आती जा रही है। त्यो ही लोगो, राजनैतिक पार्टियों एवं उम्मीदवारों मे बेचैनी बढ़ती जा रही है। सभी जानना चाह रहे है कि आखिर देश की राजधानी दिल्ली का अगला सीएम कौन होगा? किसको मिलेगी कुर्सी, किसकी होगी हार? इस चर्चा से सभी जगह महौल में गर्मी है। एक अनोखी हलचल देखने को मिल रही है। सभी राजनैतिक पार्टियों के युवा कार्यकताओं में अनोखा जोश एक नई हलचल देखने को मिल रही है जो पार्टिया इस चुनाव में भाग ले रही है। हालांकि इस बार कई अन्य राजनैतिक पार्टिया भी दिल्ली विधानसभा चुनाव में अपनी किस्मत ​​आजमाने के मड में है। उन्होंने भी अपना प्रचार प्रसार जोर कर दिया है। वह भी अपनी पूरी तैयारी में लगी हुई है।

दिल्ली के इस विधानसभा चुनाव में तीन पार्टिया जिसमें आम आदमी पार्टी, कांग्रेस. भाजपा पूर्ण लगन बेहतरीन प्रदर्शन के साथ जमीनी स्तर को मजबूत करने में लगी हुई है। आम आदमी पार्टी वर्तमान सत्तासीन पार्टी है तो वही कांग्रेस इससे पूर्व सत्ता में रही है और अपने कार्यकाल में हुए विकास के मुद्दो पर लगी है एवं केन्द्र में शासित भाजपा अपने प्रिय नेता पीएम मोदी के चेहरे पर चुनाव की तैयारियों में जुटी हुई है। अन्य पार्टिया भी जोर-शोर से इस चुनाव में अपनी पकड़ बनाने के लिए जनता के बीच अन्य मुद्दो को लेकर अपनी राजनैतिक पृष्ठभूमि तैयार करने में जुटी हुई है। हालांकि किसी भी राजनैतिक पार्टी ने अभी तक किसी भी विधानसभा से अपने एक भी उम्मीदवार के नाम की घोषणा नही की है।

जबकि विधानसभा चुनाव का नोटिफिकेशन व अन्य तारीखों की घोषणा चुनाव आयोग कर चुका है। चुनाव आयोग की घोषण के अनुसार नामकंन की तारीख 21 जनवरी है जो समय बहत ही नजदीक है। हालांकि भाजपा की अपने उम्मीदवारों को मैदान में उतारने एवं टिकट देने की एक अनोखी चाल है? शायद जो किसी राजनैतिक दल ने अभी तक नही समझ पायी है? और यह दल सिर्फ अपने उम्मीदवारों की घोषणा उस लिए नही कर रहे है कि अन्य राजनैतिक पार्टिया घोषणा करे तभी करेंगे। जो इनके लिए ज्यादा अच्छा नही है। भाजपा की बात करे तो यह टिकट तो अपने भावी उम्मीदवारों को पहले ही गोपनीय तरीके से देते है। लेकिन इसकी घोषणा एक दम अंत समय में करते है। उसे सिर्फ एक औपचारिकता ही कहा जा सकता है।

बीजेपी से जिस विधानसभा में किसी भी कैंडिटेट को टिकट मिलना होता है। उसे ग्रीन सिंग्लन पहले ही संगठन द्वारा मिल जाता है और वह अपनी तैयारी में पूरी तरह जुट जुट जाता है। यह यह जनता का भी मानना है और जो अन्य उम्मीदवारी के आवेदन देते है। उन्हें पार्टी अंत तक रोके रहती है। टिकट की लालसा में कि सर्वे कर टिकट दिया जायेगा। जो जनता के बीच में अच्छी पकड़ रखता उसे देंगे यह कहकर जबकि टिकट तो सर्वे से मिलती है। उसका सर्वे पार्टी पहले ही करा चुकी होती है और उन उम्मीदवारों को सिर्फ भरोसे में लिये रहती है। वह इसलिए कि पहले उम्मीदवारों की घोषणा होगी तो अन्य दावेदार जिन्हें टिकट नही मिलेगी वे उस उम्मीदवार जो पार्टी ने घोषित किया उस को घातक सिद्ध हो सकते है। बागी तेवर अपना सकते है जिससे चुनाव परिणाम बिगड़ सकते है।

अंत समय में यह बाकी बचे उम्मीदवारी का दावा करने वाले ज्यादा घातक नही हो सकते है और अगर यह ऐसा करते भी है तो सभी जनता बखूबी समझ सकती है कि इसे टिकट नहीं मिला इसलिए यह बागी तेवर पार्टी से अपना रहा है। जबकि अन्य पार्टिया बीजेपी की इस चाल को कही न कही समझ नही पा रही है। वह अपने उम्मीदवार घोषित नही करती है और उनके उम्मीदवार असमंजस में रहते है कि टिकट मिलेगा या नही शायद वे अपनी जमीनी पकड़ मजबूत नही कर पाते और चनाव परिणाम उनके अनकल नही होते है। क्योंकि बीजेपी अपने संगठन को मजबूत रखती है। जिससे चुनाव मजबूती से लड़ा जा सके और चनाव से पहले नये यवाओं को जोडकर किसी को बूथ अध्यक्ष किसी को मण्डल प्रभारी, मंत्री, अध्यक्ष, प्रचार का जिम्मा सौंपती है और चुनाव होने बाद परिणाम अच्छे मिलते है। यह आम बात कि जिस राज्य बीजेपी चुनाव जीत जाते है फिर बूथ स्थर के कार्यकर्ता कोई वजूद नही रहता खत्म जाता है। सिर्फ उच्च पदस्थ संगठन पदाधिकारियों का ही बोलवाला रह जाता है। ऐसा ही उत्तर प्रदेश में देखने को मिला था।

अन्य राजनैतिक पार्टिया इस प्रकार से संगठन खड़ा करने में विफल है। शायद उन्हें इसलिए ही मुंह की खानी पड़ती है। बीजेपी साम-दाम-दण्ड-भेद सभी हथकण्डे अपनाकर वह किसी भी तरह सत्ता को पा सकती है। इसकी तोड़-जोड़ नीति साठ-गाठ नीति भी किसी चक्रब्यूह से कम नही कही जा सकती है। जिस भी प्रदेश के अंदर बीजेपी ने इस प्रकार से तरीके अपनाये है वह बीजेपी ने सत्ता की कुर्सी हासिल की है। यह अपने किसी भी नेता का कद बड़ा या छोटा कर सकती है। इस पार्टी के चाणक्य कहे जाने वाले नेता अमित शाह यह बखबी जानते है कि किस चेहरे से क्या राजनैतिक फायदा मिल सकता है एवं सत्ता को हासिल करने में उसका प्रयोग कर सफलता हासिल की जा सकती है। इनके संगठन में तो तमाम छोटे-मझौले नेताओं को रोकने के लिए अनेक पद होते है। जो मानो झुन झुना के समान है यह इन नेताओं को वह झुन झुना रूपी पद देकर अपने लिए उपयोगी बना लेते है।

चुनाव बाद यह छुटवहियें नेता तो जूस निकले गन्ने के पात की तरह मात्र रह जाते है और पार्टी इनका उपयोग कर इनकी सारी ताकत कोअपने में समाहित कर राजनैतिक लाभ उठा लेती है। बीते रविवार को भाजपा के अध्यक्ष अमित शाह के आवास पर टिकट को लेकर 7 घण्टे मीटिंग हुई जिसकी औपचारिक घोषणा करने की तैयारी कर ली गई। इसमें संगठन के कई नेताओं ने भाग लिया जिसमें 45 विधानसभा क्षेत्रो के उम्मीदवारों के नामों पर मंथन हआ। जिसमें कछ विधानसभाओं पर एक-एक व अन्य विधानसभाओं पर दो-दो नामों की चर्चा हुई। उनमें से एक नाम की घोषणा होनी है। सत्रों का मानना है कि यह नाम गोपनीय केन्द्रीय सर्वे, जनता के सर्वे, प्रदेश संगठन के द्वारा चुने गए नाम है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *